एमपी के 99 हजार शिक्षकों के लिए बड़ी खुशखबरी! हाईकोर्ट ने OPS पर दिया अहम फैसला, सरकार की दलील खारिज

Harrison Masih | Nov 07, 2026, 14:33 IST
मध्य प्रदेश के शिक्षकों को बड़ी राहत: हाईकोर्ट ने पुरानी पेंशन के पक्ष में सुनाया ऐतिहासिक फैसला
MP High Court’s landmark decision brings hope of Old Pension Scheme benefits for over 99,000 teachers appointed between 1998 and 2005.
मध्य प्रदेश के हजारों शिक्षकों के लिए बड़ी राहत की खबर सामने आई है। सालों से पुरानी पेंशन योजना (OPS) का इंतजार कर रहे शिक्षकों की उम्मीद अब पूरी होती नजर आ रही है। मध्य प्रदेश हाईकोर्ट की ग्वालियर बेंच ने पेंशन से जुड़े एक अहम मामले में शिक्षकों के पक्ष में फैसला सुनाया है।

कोर्ट ने साफ कहा है कि जब सरकार शिक्षकों की पिछली सेवा को मान्यता देकर उन्हें वरिष्ठता और क्रमोन्नति का लाभ दे रही है, तो उन्हें पुरानी पेंशन से वंचित नहीं किया जा सकता।



इस फैसले से प्रदेश के 99 हजार से ज्यादा शिक्षकों को फायदा मिलने की उम्मीद है। ये वे शिक्षक हैं, जिनकी नियुक्ति साल 1998 से 2005 के बीच पंचायत और नगरीय निकायों के माध्यम से हुई थी। लंबे समय से ये शिक्षक पुरानी पेंशन की मांग कर रहे थे। अब हाईकोर्ट के फैसले ने उनकी उम्मीदों को मजबूत कर दिया है।



सरकार की नई नियुक्ति वाली दलील खारिज

इस मामले में राज्य सरकार की ओर से दलील दी गई थी कि साल 2018 में शिक्षकों का नए शैक्षणिक संवर्ग में संविलियन किया गया था। इसलिए इसे नई नियुक्ति माना जाना चाहिए। इसी आधार पर सरकार इन शिक्षकों को पुरानी पेंशन का लाभ देने से इनकार कर रही थी।



हालांकि, हाईकोर्ट ने सरकार की इस दलील को स्वीकार नहीं किया। कोर्ट ने माना कि शिक्षकों की मूल नियुक्ति पहले ही हो चुकी थी। साल 2018 में संविलियन होने से उनकी पुरानी सेवा खत्म नहीं हो जाती। उनकी नौकरी की शुरुआत जिस तारीख से हुई थी, उसे ही महत्वपूर्ण माना जाना चाहिए।



कोर्ट का कहना है कि जब सरकार पुरानी सेवा के आधार पर शिक्षकों को वरिष्ठता और क्रमोन्नति दे रही है, तो पेंशन के मामले में भी उसी सेवा को मान्यता देनी होगी।




1 जनवरी 2005 की तारीख से जुड़ा है पूरा मामला

इस पूरे विवाद में 1 जनवरी 2005 की तारीख सबसे महत्वपूर्ण है। मध्य प्रदेश में इस तारीख के बाद नियुक्त कर्मचारियों के लिए नई पेंशन योजना (NPS) अनिवार्य की गई थी। वहीं, इससे पहले नियुक्त कर्मचारियों को पुरानी पेंशन योजना का लाभ मिलना था।



दरअसल, प्रदेश में साल 1998 से 2005 के बीच पांच चरणों में बड़ी संख्या में शिक्षकों की नियुक्ति हुई थी। इनकी शुरुआती नियुक्ति शिक्षाकर्मी के रूप में हुई थी। कई शिक्षकों की नियुक्ति 1998 से 2001 या 2003 के दौरान हुई थी।



बाद में साल 2018 में इन शिक्षकों को नए शैक्षणिक संवर्ग में शामिल किया गया। सरकार ने इस प्रक्रिया को नई नियुक्ति मान लिया। इसी वजह से शिक्षकों को पुरानी पेंशन का लाभ नहीं मिल पा रहा था।



अब हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया है कि शिक्षकों की मूल नियुक्ति और पिछली सेवा को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। इससे 1 जनवरी 2005 से पहले नियुक्त शिक्षकों का OPS पाने का दावा मजबूत हुआ है।




99 हजार से ज्यादा शिक्षकों को मिल सकता है लाभ

हाईकोर्ट के इस फैसले का सीधा असर प्रदेश के 99 हजार से अधिक शिक्षकों पर पड़ सकता है। इनमें पंचायत और नगरीय निकायों के माध्यम से नियुक्त अध्यापक और शिक्षक शामिल हैं।



ये शिक्षक काफी समय से अपनी मांग को लेकर संघर्ष कर रहे थे। उनका कहना था कि जब सरकार उनकी पुरानी सेवा को वरिष्ठता और क्रमोन्नति के लिए जोड़ रही है, तो पेंशन के मामले में भी उनकी पहली नियुक्ति की तारीख को आधार बनाया जाना चाहिए।



अब कोर्ट के फैसले से इन शिक्षकों को बड़ी राहत मिलने की उम्मीद है। हालांकि, वास्तविक लाभ आदेश के क्रियान्वयन और संबंधित पात्रता के आधार पर मिलेगा।



NPS फंड को OPS में ट्रांसफर करने का आदेश

इस मामले में शिक्षक बचाव सभा की ओर से हाईकोर्ट में याचिका दायर की गई थी। याचिका में शिक्षकों की पुरानी सेवा को मान्यता देने और पुरानी पेंशन का लाभ देने की मांग की गई थी।



सुनवाई के बाद कोर्ट ने महत्वपूर्ण निर्देश दिए। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, हाईकोर्ट ने NPS फंड को OPS में ट्रांसफर करने का आदेश भी दिया है। इससे उन शिक्षकों को राहत मिलने की उम्मीद है, जिनकी पेंशन राशि अब तक नई पेंशन योजना के तहत जमा हो रही थी।



यह फैसला इसलिए भी अहम है, क्योंकि पेंशन कर्मचारियों के भविष्य की आर्थिक सुरक्षा से जुड़ी होती है। रिटायरमेंट के बाद नियमित पेंशन उनके जीवन का बड़ा सहारा बनती है।




OPS क्या है?

OPS यानी Old Pension Scheme (पुरानी पेंशन योजना) सरकारी कर्मचारियों के लिए रिटायरमेंट के बाद मिलने वाली पेंशन व्यवस्था है। भारत में पुरानी पेंशन के नियम 1972 में बनाए गए थे। केंद्र सरकार ने 1 जनवरी 2004 से नई भर्ती वाले कर्मचारियों के लिए OPS की जगह NPS लागू कर दी।



वहीं, मध्य प्रदेश में 1 जनवरी 2005 से नियुक्त कर्मचारियों को नई पेंशन योजना के दायरे में रखा गया। OPS में कर्मचारी को रिटायरमेंट के बाद उसकी आखिरी बेसिक सैलरी का आमतौर पर 50 प्रतिशत पेंशन के रूप में मिलता है। जैसे किसी कर्मचारी की रिटायरमेंट के समय बेसिक सैलरी 60 हजार रुपए है, तो उसे करीब 30 हजार रुपए मासिक मूल पेंशन मिल सकती है।



इसके अलावा महंगाई राहत (DR) भी मिलती है। कर्मचारी की सैलरी से पेंशन के लिए अलग से 10 या 14 प्रतिशत पैसा नहीं कटता। सरकार पेंशन का खर्च उठाती है। इसके साथ नियमों के अनुसार ग्रेच्युटी, परिवार पेंशन और पेंशन का कुछ हिस्सा एकमुश्त लेने की सुविधा भी मिलती है।




वरिष्ठता मिल रही है तो पेंशन से वंचित क्यों?

हाईकोर्ट के फैसले का सबसे महत्वपूर्ण आधार पिछली सेवा की मान्यता है। सरकार शिक्षकों को उनकी पुरानी सेवा के आधार पर वरिष्ठता और क्रमोन्नति का लाभ दे रही है। ऐसे में केवल पेंशन के मामले में उनकी पुरानी नियुक्ति को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।



कोर्ट ने इसी आधार पर सरकार की नई नियुक्ति वाली दलील को खारिज किया। इस फैसले को शिक्षकों के लंबे संघर्ष की बड़ी जीत माना जा रहा है।



कुल मिलाकर, मध्य प्रदेश के 99 हजार से ज्यादा शिक्षकों के लिए यह फैसला बड़ी राहत लेकर आया है। इससे पुरानी पेंशन योजना (OPS) पाने की उनकी उम्मीद बढ़ गई है। अब सभी की नजर इस बात पर रहेगी कि सरकार हाईकोर्ट के आदेश का पालन किस तरह करती है और पात्र शिक्षकों को इसका लाभ कब तक मिलता है।

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