MP हाईकोर्ट का बड़ा फैसला: प्रमोशन रुका, लेकिन उच्च पद का प्रभार देने पर कोई रोक नहीं

Neel Tiwari | Apr 30, 2026, 13:39 IST
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मध्य प्रदेश में प्रमोशन पर लगी रोक के बीच हाईकोर्ट ने बड़ा रास्ता खोल दिया है। कोर्ट ने साफ कहा है कि पदोन्नति भले रुकी हो, लेकिन उच्च पद का प्रभार देने पर कोई रोक नहीं है। साथ ही 30 दिन में प्रक्रिया पूरी करने के निर्देश दिए हैं।

News in short

  • प्रमोशन पर स्टे लगा है लेकिन प्रभार देने पर रोक नहीं है।
  • इस आदेश से अभी पुलिस विभाग के अधिकारियों को राहत मिली है।
  • 30 दिन के भीतर उच्च पद का प्रभार देने के निर्देश दिए गए हैं।
  • नए प्रमोशन नियम 2025 पर पहले से ही रोक लगी है।
  • अन्य विभागों को कोर्ट पहुंचने पर ही राहत मिलेगी।

News in detail

प्रमोशन रुका, लेकिन प्रभार का रास्ता खुला

मध्य प्रदेश में पदोन्नति को लेकर जारी विवाद के बीच हाईकोर्ट ने एक अहम फैसला सुनाया है। इस फैसले से प्रशासनिक हलचल तेज हो गई है। कोर्ट ने स्पष्ट कर दिया है कि भले ही नए प्रमोशन नियमों पर रोक लगी हो, लेकिन उच्च पद का प्रभार देने पर कोई कानूनी प्रतिबंध नहीं है।



इस आदेश से अभी पुलिस विभाग के अधिकारियों को राहत मिली है। यदि अन्य विभाग भी हाईकोर्ट पहुंचते हैं तो इस फैसले के हवाले से उन्हें भी राहत मिल सकती है।





9 याचिकाकर्ता पहुंचे हाईकोर्ट

यह आदेश रिट याचिका में दिया गया है। जबलपुर के कंट्रोल रूम प्रभारी सतीश झरिया सहित नौ सब इंस्पेक्टर्स ने याचिका दायर की है। इसमें राज्य सरकार के 20 जून 2025 के उस आदेश को चुनौती दी थी, जिसमें कार्यवाहक नियुक्तियों और प्रभार देने की प्रक्रिया रोक दी गई थी।



30 दिन में देना होगा उच्च पद का चार्ज

जबलपुर हाईकोर्ट ने निर्देश दिया है कि याचिकाकर्ताओं को 30 दिनों के भीतर नियमों के तहत उच्च पद का प्रभार दिया जाए। यह मामला पुलिस कंट्रोल रूम से जुड़े अधिकारियों द्वारा दायर याचिका के बाद सामने आया था। कोर्ट ने साफ कहा कि प्रक्रिया तय समयसीमा में पूरी की जाए।



नए प्रमोशन नियम बने विवाद की वजह

दरअसल, राज्य सरकार द्वारा लागू किए गए मध्य प्रदेश सिविल सेवा नियम (पदोन्नति) 2025 को लेकर विवाद खड़ा हुआ था। इन नियमों को कोर्ट में चुनौती दी गई है। फिलहाल इन पर स्टे लगा हुआ है।



इसी आधार पर सरकार ने सभी विभागों में उच्च पद का प्रभार देने की प्रक्रिया भी रोक दी थी। इससे कर्मचारियों में असंतोष बढ़ गया है।



आपको बता दें कि इस मामले की सुनवाई जबलपुर हाईकोर्ट पूरी कर चुका है लेकिन 17 फरवरी 2026 से यह मामला हर्ड एंड रिजर्व है और इस पर आखिरी फैसला आना बाकी है।





पुलिस रेगुलेशन का दिया गया हवाला

सुनवाई के दौरान कोर्ट ने स्पष्ट किया कि मध्यप्रदेश पुलिस रेगुलेशन का संशोधित पैरा 72 अभी भी प्रभावी है। इसलिए विभाग इन नियमों के आधार पर उच्च पद का प्रभार देने की प्रक्रिया जारी रख सकता है। कोर्ट ने यह भी कहा कि नए नियमों का इस प्रक्रिया पर कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा क्योंकि वे पहले से स्थगित हैं।



अन्य विभागों में अब भी असमंजस

हालांकि यह आदेश फिलहाल पुलिस विभाग तक सीमित है, लेकिन इसके प्रभाव अन्य विभागों पर भी पड़ सकते हैं। वन सहित कई विभागों में अभी भी स्थिति स्पष्ट नहीं है। माना जा रहा है कि यदि अन्य विभाग भी कोर्ट का रुख करते हैं, तो उन्हें भी इसी तरह की राहत मिल सकती है।



कोर्ट ने अपने आदेश में यह भी स्पष्ट किया कि यह प्रभार अंतिम निर्णय के अधीन रहेगा। राज्य सरकार को 30 दिन में जवाब दाखिल करना होगा। मामले की अगली सुनवाई 15 जून को तय की गई है।



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