लेफ्टिनेंट कर्नल पर रेप के आरोप, हाईकोर्ट बोला- 13 साल तक कोई धोखे में नहीं रह सकता
News in short
- भोपाल की महिला आरक्षक ने सेना के लेफ्टिनेंट कर्नल पर शादी का झांसा देकर रेप का केस दर्ज कराया था।
- दोनों के बीच 2012 से 2025 तक करीब 13 साल तक संबंध रहे।
- महिला को 2013 में ही पता चल गया था कि अधिकारी पहले से शादीशुदा है।
- हाईकोर्ट ने कहा कि इतने लंबे समय बाद रेप का आरोप लगाना कानून की प्रक्रिया का दुरुपयोग है।
News in detail
मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने कहा कि जब महिला खुद पुलिस विभाग में कार्यरत है और उसे शुरू से आरोपी की वैवाहिक स्थिति की जानकारी थी, तो 13 साल तक संबंध बनाए रखने के बाद इसे बलात्कार नहीं माना जा सकता।
आर्मी कैंटीन में हुई थी पहली मुलाकात
मामले के अनुसार, भारतीय सेना के लेफ्टिनेंट कर्नल वरुण प्रताप सिंह और मध्यप्रदेश पुलिस में आरक्षक महिला की पहली मुलाकात भोपाल में हुई थी।
इसके बाद दोनों के बीच बातचीत बढ़ी। महिला का आरोप था कि अधिकारी ने खुद को अविवाहित बताते हुए उससे शादी का वादा किया था।
एक साल बाद सामने आई सच्चाई
एफआईआर में दर्ज घटनाक्रम के मुताबिक, रिश्ते के लगभग एक साल बाद यानी 2013 में महिला को यह पता चला कि सेना अधिकारी पहले से शादीशुदा है। जब महिला ने इस बारे में सवाल किया, तो अधिकारी ने कथित तौर पर कहा कि वह अपनी पत्नी से अलग रहता है और जल्द ही तलाक लेकर उससे शादी करेगा।
13 साल रहे संबंध
अदालत के सामने आए दस्तावेजों के अनुसार, 2012 से लेकर 2025 की शुरुआत तक दोनों के बीच लगातार संपर्क बने रहे।
इस दौरान कई बार दोनों मिले भी। लेकिन फरवरी 2025 में स्थिति उस समय और बिगड़ गई जब महिला को पता चला कि अधिकारी अन्य महिलाओं के साथ भी संपर्क में है।
इसके बाद महिला ने भोपाल के महिला थाने में शिकायत दर्ज कराई थी।
शादी का वादा पूरा न होना और झूठा वादा - अलग परिस्थितियां
मामले की सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि हर मामले में यह देखना जरूरी है कि संबंध सहमति से बने थे या धोखे से।
अदालत ने कहा कि केवल शादी का वादा पूरा न होना अपने आप में बलात्कार का मामला नहीं बनाता। यदि शुरुआत से ही किसी को धोखा देने के उद्देश्य से वादा किया गया हो, तभी इसे अपराध माना जा सकता है।
कोर्ट ने पुलिसकर्मी होने पर भी की टिप्पणी
अदालत ने इस बात पर भी टिप्पणी की कि शिकायतकर्ता खुद पुलिस विभाग में कार्यरत है और एक शिक्षित महिला है। ऐसे में यह मानना मुश्किल है कि वह 13 साल तक किसी गलतफहमी में रही हो, खासकर तब जब उसे 2013 से ही आरोपी के शादीशुदा होने की जानकारी थी।
हाईकोर्ट ने FIR और चार्जशीट को किया रद्द
सभी तथ्यों और परिस्थितियों को देखते हुए अदालत ने कहा कि यह मामला बलात्कार का नहीं बल्कि आपसी सहमति से बने रिश्ते के टूटने का है।
कोर्ट ने इसे कानून की प्रक्रिया का दुरुपयोग मानते हुए भोपाल महिला थाने में दर्ज एफआईआर और उसके बाद दाखिल चार्जशीट को पूरी तरह रद्द कर दिया है।
भविष्य के मामलों पर पड़ सकता है असर
कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि इस फैसले का असर भविष्य में शादी के झूठे वादे पर बलात्कार से जुड़े मामलों की सुनवाई पर पड़ सकता है।
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