IAS शिल्पा गुप्ता की मनमानी के खिलाफ शिक्षकों की बड़ी जीत, हाईकोर्ट ने दिया 100% वेतन का आदेश

Sanjay Dhiman | May 02, 2026, 17:41 IST
Photograph: (the sootr)
मध्य प्रदेश के शिक्षकों को शिल्पा गुप्ता IAS द्वारा दी गई समस्याओं के बाद अब हाईकोर्ट से राहत मिली है। शिक्षकों की सेवा को पूरी तरह सम्मानित किया गया है, साथ ही उन्हें 100% वेतन और पसंदीदा जिले में पदस्थापना का आदेश दिया गया है।

News in Short

  • हाईकोर्ट ने शिक्षकों को 100% वेतन और वरिष्ठता के साथ नियुक्ति देने का आदेश दिया।
  • तत्कालीन आयुक्त शिल्पा गुप्ता के 70% वेतन वाले पुराने आदेश को असंवैधानिक घोषित किया।
  • आरक्षित वर्ग के शिक्षकों को अब उनके पसंद के जिलों में पदस्थापना मिलेगी।
  • सुप्रीम कोर्ट ने भी शिक्षकों के हक में फैसला देते हुए सरकारी याचिका खारिज की।
  • विभाग को 30 दिनों के भीतर कोर्ट के आदेश का पालन करना अनिवार्य होगा।

News in Detail

मध्य प्रदेश के सरकारी स्कूलों में पढ़ाने वाले हज़ारों शिक्षकों के लिए आज खुशी का दिन है। लंबे समय से चल रही कानूनी लड़ाई में आखिरकार शिक्षकों की ही बड़ी जीत हुई है। जबलपुर हाईकोर्ट की डबल बेंच ने शिक्षकों के पक्ष में एक ऐतिहासिक फैसला सुनाया है।



अदालत ने तत्कालीन DPI कमिश्नर शिल्पा गुप्ता के पुराने सभी आदेशों को पूरी तरह रद्द कर दिया। कोर्ट ने साफ कहा कि शिक्षकों को उनकी पुरानी सेवा के आधार पर पूरा वेतन मिले। अब शिक्षकों को 70% के बजाय सीधे 100% वेतन के साथ नई जॉइनिंग दी जाएगी।



शिल्पा गुप्ता बनाम शिक्षक: क्या है पूरा विवाद?

यह पूरी कहानी मध्य प्रदेश के शिक्षा विभाग की संयुक्त काउंसलिंग के समय से शुरू हुई थी। DPI विभाग ने भर्ती के दौरान आरक्षण के नियमों की जमकर धज्जियां उड़ाने का काम किया। ओबीसी, एससी और एसटी वर्ग के होनहार उम्मीदवारों को उनके घर से बहुत दूर भेज दिया।



इन शिक्षकों को उनके निवास स्थान से करीब 900 किलोमीटर दूर ट्राइबल एरिया में भेजा गया। जबकि कम अंक वाले सामान्य अभ्यर्थियों को उनके घर के पास ही स्कूल मिल गए थे। इस भेदभाव के खिलाफ शिक्षकों ने वकील रामेश्वर सिंह ठाकुर के जरिए अदालत का दरवाजा खटखटाया।



हाईकोर्ट आदेश की गलत व्याख्या और IAS अधिकारी की जिद

हाईकोर्ट ने पहले ही शिक्षकों को उनकी पसंद के जिले में भेजने का आदेश दिया था। लेकिन DPI की तत्कालीन कमिश्नर शिल्पा गुप्ता ने अदालत के आदेश को गलत तरीके से लागू किया। उन्होंने शिक्षकों को नई नियुक्ति बताकर केवल 70% वेतन देने का तानाशाही फरमान जारी किया।



इसके साथ ही शिक्षकों पर तीन साल की नई प्रोबेशन अवधि (परिवीक्षा) भी थोप दी गई। जब शिक्षकों ने इसका विरोध किया, तो प्रशासन ने उनकी एक भी बात नहीं सुनी। कमिश्नर साहिबा अपनी जिद पर अड़ी रहीं और शिक्षकों को परेशान करना जारी रखा।



सुप्रीम कोर्ट की फटकारा और हाईकोर्ट ने जारी किया वारंट

आईएएस शिल्पा गुप्ता ने हाईकोर्ट के आदेश को मानने के बजाय सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दे डाली। उन्होंने बिना किसी कानूनी सलाह के सुप्रीम कोर्ट में याचिका (SLP) दाखिल करने का रिस्क लिया। लेकिन देश की सबसे बड़ी अदालत ने उनकी दलीलों को पहली बार में ही खारिज कर दिया। इससे पहले हाईकोर्ट ने उनके खिलाफ 10,000 रुपए का जमानती गिरफ्तारी वारंट भी जारी किया था। इसके बावजूद उन्होंने शिक्षकों की वरिष्ठता और पुरानी सेवाओं को जोड़ने से साफ इनकार कर दिया था। अंत में जस्टिस विवेक अग्रवाल की बेंच ने इस कृत्य को पूरी तरह असंवैधानिक माना।



अदालत का फाइनल फैसला: अब शिक्षकों को क्या-क्या लाभ मिलेंगे?

हाईकोर्ट ने अपने ताज़ा फैसले में स्पष्ट कर दिया है कि शिक्षक कोई अपराधी नहीं हैं। उनकी ट्राइबल विभाग की पुरानी सेवाओं को उनकी नई पोस्टिंग में पूरी तरह जोड़ा जाएगा।



  • शिक्षकों को अब 70% के बजाय 100% पूरा वेतन हर महीने दिया जाएगा।
  • शिक्षकों की पुरानी सीनियरिटी बरकरार रहेगी और उन्हें प्रमोशन में भी इसका पूरा लाभ मिलेगा।
  • विभाग को 30 दिनों के भीतर इन सभी आदेशों का पालन सुनिश्चित करना होगा।
  • शिक्षकों को उनकी चॉइस फिलिंग के आधार पर मनचाहे जिलों में तुरंत पदस्थापना मिलेगी।

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