शिवपुरी एसपी को हाईकोर्ट की फटकार, थानों में CCTV नहीं लगा तो होगी कार्रवाई
मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने शिवपुरी की पुलिस अधीक्षक यंगचेन डोलकर भूटिया को सख्त चेतावनी दी है। कोर्ट ने कहा है कि अगर जिले के सभी पुलिस थाने और चौकियां पूरी तरह सीसीटीवी निगरानी में नहीं आईं, तो एसपी के खिलाफ अवमानना की कार्रवाई होगी।
इसके अलावा अदालत ने साफ कहा कि कैमरों की कवरेज में कमी रहने से पुलिसकर्मी गैर-कानूनी काम करने से नहीं डरेंगे। यही वजह है कि कोर्ट ने इस मामले में कोई ढील देने से इनकार कर दिया है।
सुनवाई में क्या हुआ
बता दें कि यह मामला 12 अगस्त को अदालत में सुना गया था। न्यायमूर्ति जज जीएस अहलूवालिया और न्यायमूर्ति अनुराधा शुक्ला की खंडपीठ ने यह सुनवाई की थी। बेंच ने एसपी को निर्देश दिया था कि हर थाने और चौकी परिसर का कोई भी कोना कैमरे की निगरानी से बाहर नहीं रहना चाहिए।
कोर्ट ने यह भी कहा कि लगाए जाने वाले कैमरों में नाइट विजन की सुविधा होनी चाहिए। साथ ही ऑडियो और वीडियो, दोनों तरह की रिकॉर्डिंग होना जरूरी है। बिना इन सुविधाओं के कैमरे लगाना काफी नहीं माना जाएगा।
हलफनामे की सख्त डेडलाइन
अदालत ने एसपी को 2 सितंबर तक की समय सीमा दी है। इस तारीख तक उन्हें मुख्य रजिस्ट्रार के सामने खुद पेश होकर अनुपालन हलफनामा दाखिल करना होगा। इस हलफनामे में यह प्रमाणित करना होगा कि सभी थानों में पूरी सीसीटीवी कवरेज हो चुकी है।
वहीं अगर 3 सितंबर तक हलफनामा दाखिल नहीं हुआ, या उसमें पूरे परिसर की कवरेज का जिक्र नहीं मिला, तो मुख्य रजिस्ट्रार खुद अवमानना का मामला दर्ज करेंगे। यानी एसपी के पास चूक की कोई गुंजाइश नहीं बची है।
खनियाधाना थाने का दावा खारिज
यह पूरा आदेश एक रिपोर्ट के बाद आया है। इस रिपोर्ट में दावा किया गया था कि खनियाधाना थाने में लगे 13 कैमरे सुप्रीम कोर्ट के दिशा-निर्देशों के मुताबिक हैं। खंडपीठ ने इस दावे को सिरे से खारिज कर दिया था।
कोर्ट ने सुप्रीम कोर्ट के 2021 के निर्देशों का हवाला दिया। इन निर्देशों के मुताबिक थाने में प्रवेश और निकास द्वार, लॉक-अप, गलियारे, स्वागत क्षेत्र, कमरे, बरामदे और ड्यूटी अधिकारी का कमरा, सभी सीसीटीवी की जद में आने चाहिए। खंडपीठ ने कहा कि पेश की गई रिपोर्ट इन निर्देशों के अनुरूप नहीं थी और कानून के विपरीत थी।
कोर्ट ने यह भी नोट किया कि एसपी ने खुद पहले कवरेज में कमियां होने की बात मान ली थी। इसके बावजूद रिपोर्ट में पूरी तस्वीर सही नहीं दिखाई गई।
फंड और खर्च को लेकर राहत
अदालत ने एसपी को एक राहत भी दी है। कोर्ट ने कहा कि पुलिस मुख्यालय से फंड आने का इंतजार करने की जरूरत नहीं है। एसपी चाहें तो पहले खुद पैसा खर्च कर सकती हैं और बाद में प्रतिपूर्ति की मांग कर सकती हैं। इससे सीसीटीवी लगाने के काम में देरी नहीं होगी।
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