एमपी हाईकोर्ट सख्त: जूनियर वकीलों के स्टाइपेंड पर राज्य बार काउंसिल को 6 महीने की डेडलाइन
जबलपुर हाईकोर्ट में एक जूनियर वकील ने बताया कि उन्हें स्टाइपेंड नहीं मिलता। जस्टिस विशाल धगट ने इस पर सख्त रुख अपनाया। उन्होंने राज्य बार काउंसिल को छह महीने में दिशानिर्देश बनाने को कहा। ये दिशानिर्देश शुरुआती तीन साल के जूनियर वकीलों के लिए होंगे। कोर्ट ने पांच वरिष्ठ अधिवक्ताओं से जुड़े मामले की जांच के निर्देश भी दिए।
सुनवाई में कैसे खुली यह बात?
मामला रिट याचिका (कोर्ट में दी गई अर्जी) क्रमांक 7749/2005 का था। इसका नाम विपिन पांडे विरुद्ध रानी दुर्गावती विश्वविद्यालय है। सुनवाई मध्य प्रदेश हाईकोर्ट की जबलपुर पीठ में हुई।
याचिकाकर्ता की अधिवक्ता आयुषी मिश्रा ने सुनवाई टालने की मांग की। उनके मुताबिक मुख्य बहस करने वाले अधिवक्ता उस दिन उपलब्ध नहीं थे। तभी कोर्ट ने वहां मौजूद जूनियर अधिवक्ता से सवाल किए।
जूनियर वकील ने कोर्ट को क्या बताया?
"मुझे कोई स्टाइपेंड नहीं दिया जा रहा है।"
-आयुषी मिश्रा, जूनियर अधिवक्ता, मध्य प्रदेश हाईकोर्ट
यह जवाब सुनते ही बात जूनियर वकीलों के हितों तक पहुंच गई। लेकिन असली कहानी अभी शुरू हुई थी।
जस्टिस धगट ने क्या कहा?
"शुरुआती दौर में वकालत सीखने वालों के खर्चों की अनदेखी नहीं होनी चाहिए।"
-जस्टिस विशाल धगट, मध्य प्रदेश हाईकोर्ट
जूनियर वकील शुरुआती सालों में वरिष्ठों के साथ काम करके सीखते हैं। उनके पास अक्सर अपना स्वतंत्र काम नहीं होता। इसलिए रोज का खर्च और आने-जाने का किराया भारी पड़ सकता है।
कोर्ट ने राज्य बार काउंसिल और दोनों एसोसिएशनों से ध्यान देने को कहा। संस्थाओं को यह भी देखना है कि जूनियर वकीलों को स्टाइपेंड मिले।
BCI ने कितना स्टाइपेंड सुझाया?
बार काउंसिल ऑफ इंडिया (BCI – Bar Council of India) ने सिफारिश की थी। यह परिपत्र (सर्कुलर) 15 अक्टूबर 2024 को जारी हुआ था। इसमें सभी राज्य बार काउंसिलों को निर्देश दिए गए थे। सिफारिश में शुरुआती तीन साल तक न्यूनतम मासिक स्टाइपेंड की बात थी। शहरी क्षेत्रों के लिए 20 हजार रुपए प्रति माह सुझाए गए। ग्रामीण क्षेत्रों के लिए यह राशि 15 हजार रुपए प्रति माह थी। यानी शहर में साल भर के 2.4 लाख रुपए बनते हैं। गांव में यह 1.8 लाख रुपए सालाना होता है।ॉ
क्या BCI सर्कुलर मानना जरूरी है?
मध्य प्रदेश हाईकोर्ट के मुताबिक यह परिपत्र बाध्यकारी (मानना जरूरी) नहीं है। यानी BCI सर्कुलर सिर्फ सिफारिश है। इसलिए मध्य प्रदेश के लिए अलग दिशानिर्देश जरूरी हैं।
छह महीने में क्या करना होगा?
जस्टिस विशाल धगट ने राज्य बार काउंसिल को जरूरी कदम उठाने को कहा। हाईकोर्ट बार एसोसिएशन से सलाह लेनी होगी। हाईकोर्ट एडवोकेट्स बार एसोसिएशन से भी परामर्श करना होगा। इन संस्थाओं की सलाह से शहरी और ग्रामीण इलाकों का न्यूनतम स्टाइपेंड तय होगा। पूरी प्रक्रिया के लिए छह महीने की समयसीमा रखी गई है। अब गेंद राज्य बार काउंसिल के पाले में है।
पांच वरिष्ठ वकीलों पर जांच क्यों?
कोर्ट ने एक अलग जांच भी सौंपी है। राज्य बार काउंसिल को पांच वरिष्ठ अधिवक्ताओं से जुड़ी स्थिति देखनी है। इनमें राजेश दुबे, अनिरुद्ध कुमार मिश्रा और चंद्रिका प्रसाद द्विवेदी शामिल हैं। धनंजय चतुर्वेदी और नवीन कुमार पाठक के नाम भी सूची में हैं। कोर्ट ने जानना चाहा कि आयुषी मिश्रा को स्टाइपेंड क्यों नहीं मिल रहा। आदेश में किसी के खिलाफ दोष साबित होने की बात नहीं कही गई है।
आगे क्या होगा इस मामले में?
आदेश की प्रति राज्य बार काउंसिल और दोनों बार एसोसिएशनों को भेजी जाएगी। इन संस्थाओं को निर्देशों के पालन के लिए जरूरी कार्रवाई करनी होगी। क्या जूनियर वकीलों की जेब तक यह राहत पहुंचेगी? आदेश से ऐसा नहीं निकलता कि तय राशि का भुगतान शुरू हो गया है।
फिलहाल जोर नियम बनाने और भुगतान की जांच पर है। रिट याचिका की सुनवाई फिलहाल टल गई है। रजिस्ट्री (कोर्ट का दफ्तर) को इसे अंतिम सुनवाई के लिए सूचीबद्ध करना है। अब सबकी नजर राज्य बार काउंसिल की कार्रवाई पर रहेगी।