जनगणना कर्मियों के ट्रांसफर पर HC सख्त: CS तक के आदेश दरकिनार करने पर सवाल, ट्रांसफर आदेश निरस्त
समझें क्या है पूरा मामला
- जनगणना ड्यूटी कर रहीं रीवा की पटवारी प्रीति वर्मा का ट्रांसफर हाईकोर्ट ने निरस्त किया।
- कोर्ट ने कहा कि जनगणना कार्य में लगे कर्मचारियों का ट्रांसफर सरकारी निर्देशों के विपरीत नहीं हो सकता।
- भारत सरकार के गृह सचिव ने 31 मार्च 2027 तक ऐसे कर्मचारियों के ट्रांसफर पर रोक के निर्देश दिए थे।
- मध्य प्रदेश शासन के गृह विभाग और सामान्य प्रशासन विभाग ने भी इसी आशय के आदेश जारी किए थे।
- जस्टिस विशाल धगत की एकलपीठ ने सुनवाई में सरकारी आदेशों की अनदेखी पर कड़ा रुख अपनाया।
जनगणना 2027 में ड्यूटी कर रहे कर्मचारियों के तबादलों पर मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने कड़ा रुख अपनाया है। गृह सचिव से लेकर मध्य प्रदेश के मुख्य सचिव तक ने स्पष्ट आदेश जारी किए थे उसके बाद भी या ट्रांसफर हुए। रीवा की पटवारी प्रीति वर्मा के ट्रांसफर को निरस्त करते हुए कोर्ट ने स्पष्ट किया कि जनगणना कार्य में लगे कर्मचारियों का स्थानांतरण सरकारी निर्देशों के विपरीत नहीं किया जा सकता।
जनगणना के बीच ट्रांसफर बना हाईकोर्ट की सख्ती का कारण
जनगणना 2027 की तैयारियों के बीच मध्य प्रदेश में जनगणना कार्य में लगे कर्मचारियों के लगातार किए जा रहे तबादले अब न्यायिक जांच के दायरे में आ गए हैं। रीवा की पटवारी प्रीति वर्मा के स्थानांतरण को चुनौती देने वाली याचिका पर सुनवाई करते हुए मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने स्पष्ट संकेत दिया कि जब केंद्र और राज्य सरकार स्वयं ऐसे कर्मचारियों के ट्रांसफर पर रोक लगाने के निर्देश दे चुके हैं।
तब उनके विपरीत आदेश जारी करना प्रशासनिक व्यवस्था पर गंभीर प्रश्न खड़े करता है। अदालत ने संबंधित ट्रांसफर आदेश को निरस्त करते हुए याचिकाकर्ता को राहत प्रदान की।
गृह सचिव से मुख्य सचिव तक जारी हुए थे स्पष्ट निर्देश
जनगणना का कार्य बिना किसी बाधा के पूरा हो, इसके लिए भारत सरकार के गृह सचिव गोविंद मोहन ने 11 मार्च 2026 को सभी राज्यों के मुख्य सचिवों को पत्र भेजकर स्पष्ट निर्देश दिए थे कि जनगणना 2027 के लिए नियुक्त अधिकारियों और कर्मचारियों का 31 मार्च 2027 तक स्थानांतरण नहीं किया जाए।
इसके बाद मध्य प्रदेश शासन के गृह (सामान्य) विभाग ने 9 अप्रैल 2026 को संबंधित विभागों को निर्देश जारी किए कि जिला और तहसील स्तर पर जनगणना कार्य में लगे कर्मचारियों का कार्य पूर्ण होने तक यथासंभव तबादला न किया जाए। इसी निर्देश को आगे बढ़ाते हुए सामान्य प्रशासन विभाग ने 17 अप्रैल 2026 को सभी विभागाध्यक्षों, संभागायुक्तों और कलेक्टरों को भी समान आदेश जारी कर दिए थे।
फिर भी हुए तबादले, कोर्ट ने जताई हैरानी
इन स्पष्ट सरकारी निर्देशों के बावजूद जनगणना ड्यूटी में लगे कर्मचारियों के तबादले लगातार किए जाते रहे। यही मामला रीवा की पटवारी प्रीति वर्मा के ट्रांसफर के रूप में हाईकोर्ट पहुंचा। याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता दिनेश सिंह चौहान ने पक्ष रखा और अदालत को केंद्र एवं राज्य सरकार द्वारा जारी आदेशों की जानकारी दी।
सुनवाई के दौरान जब न्यायालय के सामने यह तथ्य आया कि गृह सचिव से लेकर राज्य सरकार के उच्चतम स्तर तक ट्रांसफर रोकने के निर्देश पहले से प्रभावी हैं, तब न्यायालय ने इस स्थिति पर आश्चर्य व्यक्त किया और ट्रांसफर आदेश को निरस्त कर दिया।
जस्टिस विशाल धागत की अदालत ने दिया स्पष्ट संदेश
मामले की सुनवाई जस्टिस विशाल धागत की एकलपीठ में हुई। अधिवक्ता दिनेश सिंह चौहान के तथ्यों से संतुष्ट होते हुए अदालत ने स्पष्ट किया कि जो कर्मचारी जनगणना जैसे वैधानिक और राष्ट्रीय महत्व के कार्य में नियुक्त हैं, उनका स्थानांतरण सरकारी नीति और जारी निर्देशों के विपरीत नहीं किया जा सकता।
अदालत का यह आदेश भविष्य में ऐसे मामलों के लिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है, क्योंकि इससे यह संदेश गया है कि जनगणना जैसे संवेदनशील कार्यों में लगे कर्मचारियों को अनावश्यक प्रशासनिक हस्तक्षेप से बचाना शासन की जिम्मेदारी है।
ट्रांसफर नीति पर भी उठ रहे बड़े सवाल
इस पूरे घटनाक्रम ने प्रदेश में चल रही तबादला प्रक्रिया पर भी गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। हाल के दिनों में लगातार आरोप लगते रहे हैं कि तबादलों में भारी लेनदेन और मनमानी हो रही है। अब जब गृह मंत्रालय, राज्य शासन और सामान्य प्रशासन विभाग के स्पष्ट निर्देशों के बावजूद जनगणना कर्मियों के तबादले किए गए।
अंततः हाईकोर्ट को हस्तक्षेप करना पड़ा, तो यह मामला केवल एक कर्मचारी के ट्रांसफर तक सीमित नहीं रह गया है। प्रशासनिक जवाबदेही, सरकारी आदेशों के पालन और जनगणना जैसे राष्ट्रीय अभियान को लेकर अधिकारियों की सजगता पर भी नए सवाल खड़े हो गए हैं।
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