MP में टिकाऊ सड़कें क्यों नहीं बन सकती? HC ने केंद्र और राज्य सरकार से पूछा सवाल
मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने राज्य की सड़कों पर बढ़ते गड्ढों पर सख्ती दिखाई है। कोर्ट ने केंद्र और राज्य सरकार को जवाब देने का निर्देश दिया है। सुनवाई के दौरान कोर्ट में सवाल उठा कि समुद्र के नीचे मेट्रो बन सकती है तो सड़कें टिकाऊ क्यों नहीं बनतीं। यह याचिका इंदौर के एक रिटायर्ड ट्रेन मैनेजर ने दायर की थी। अगली सुनवाई 5 अगस्त को तय की गई है।
जब कोर्ट ने पूछा तीखा सवाल
मंगलवार को जबलपुर स्थित मध्य प्रदेश हाईकोर्ट में एक जनहित याचिका पर सुनवाई हुई। इस दौरान कोर्ट में तीखा सवाल उठाया गया। पूछा गया कि जब न्यूक्लियर पावर प्लांट बन सकते हैं। जब समुद्र के नीचे मेट्रो चल सकती है। तो फिर टिकाऊ सड़कें क्यों नहीं बन पातीं।
यह सवाल सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता की ओर से रखा गया। इसने पूरी सुनवाई का रुख बदल दिया। कोर्ट ने इसे गंभीरता से लिया।
किसने की सुनवाई
यह मामला एक्टिंग चीफ जस्टिस विवेक रूसिया और जस्टिस प्रदीप मित्तल की डिवीजन बेंच में सुना गया। दोनों पक्षों ने जवाब दाखिल करने के लिए और समय मांगा। कोर्ट ने इसे स्वीकार करते हुए 5 अगस्त तक जवाब दाखिल करने को कहा। इससे पहले कोर्ट ने 10 नवंबर 2025 को भी नोटिस जारी किया था।
अब अगली सुनवाई में सड़क गुणवत्ता पर बहस होगी। गड्ढों से जुड़े हादसों पर भी चर्चा होगी। एजेंसियों की जवाबदेही तय करने पर भी सवाल उठेंगे।
याचिकाकर्ता कौन हैं
यह याचिका इंदौर निवासी राजेन्द्र सिंह ने दायर की है। वे एक रिटायर्ड ट्रेन मैनेजर हैं। उन्होंने राज्य की सड़कों पर हुए गड्ढों को लेकर यह पीआईएल (PIL – Public Interest Litigation) दायर की। उनका कहना है कि सड़कों के खराब रखरखाव से हादसे बढ़ रहे हैं। उन्होंने इसके पीछे प्रशासनिक लापरवाही को भी वजह बताया।
2023 की रिपोर्ट में क्या था
याचिका में सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय की 2023 की रिपोर्ट का हवाला दिया गया। इस रिपोर्ट के अनुसार 2020 से 2023 के बीच मध्य प्रदेश सड़क दुर्घटनाओं में देश में दूसरे स्थान पर पहुंच गया। यह आंकड़ा राज्य की सड़क सुरक्षा पर बड़ा सवाल खड़ा करता है।
गड्ढों से कितनी मौतें हुईं
याचिका में दावा किया गया कि 2023 में गड्ढों से जुड़े हादसों में 31.4 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई। इसी साल गड्ढों की वजह से 5,840 हादसे दर्ज हुए। इन हादसों में 2,161 लोगों की जान गई। ये आंकड़े राज्य में सड़क सुरक्षा की स्थिति को साफ दिखाते हैं।
पुणे की सड़क का उदाहरण
सुनवाई के दौरान पुणे की करीब 50 साल पुरानी एक सड़क का उदाहरण भी दिया गया। बताया गया कि वह सड़क आज भी टिकाऊ हालत में है। इसी आधार पर सवाल उठाया गया कि मध्य प्रदेश में ऐसी सड़कें क्यों नहीं बन पा रहीं।
आगे क्या होगा
अब सबकी नजर 5 अगस्त को होने वाली अगली सुनवाई पर टिकी है। उस दिन केंद्र और राज्य सरकार को अपना जवाब पेश करना होगा। कोर्ट इस पर आगे की सुनवाई तय करेगा। सड़क सुरक्षा से जुड़ी नीतियों पर भी असर पड़ सकता है।
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सड़कों पर गड्ढें