आदिवासियों की जमीन हड़पने के मामले में HC सख्त, SIT को लगाई फटकार
समझें क्या है पूरा मामला
- हाईकोर्ट ने SIT की रिपोर्ट को छलावा कहा।
- मामला आदिवासी शोषण से जुड़ा है।
- जांच श्योपुर गुना अशोकनगर में चल रही है।
- कोर्ट ने जमीन पर जाकर जांच के आदेश दिए।
- नई रिपोर्ट 6 जुलाई तक पेश करनी होगी।
SIT जिम्मेदारी से भागने वाला
मध्य प्रदेश हाईकोर्ट की ग्वालियर खंडपीठ ने एसआईटी की कार्यप्रणाली पर बेहद सख्त टिप्पणी की। कोर्ट के जस्टिस जीएस अहलूवालिया और जस्टिस पुष्पेंद्र यादव की कोर्ट ने कहा कि जांच टीम की रिपोर्ट महज एक छलावा है। ऐसा लगता है कि अफसर अपनी जिम्मेदारी से भागना चाहते हैं। कोर्ट ने साफ कहा कि यह कोर्ट आदिवासियों के संभावित शोषण को लेकर बार-बार चिंता जता रहा है, लेकिन राज्य के अधिकारी अपने एसी कमरों से बाहर निकलने को तैयार नहीं हैं।
SIT ने कागज पर निपटाया मामला!
कोर्ट ने पाया कि एसआईटी ने प्रभावित गांवों में जाकर कोई फिजिकल सर्वे नहीं किया। जांचकर्ताओं ने यह देखने की भी जहमत नहीं उठाई कि आदिवासियों की जमीन की रजिस्ट्री और पावर ऑफ अटॉर्नी (Power of Attorney) किसने करवाई। यह भी नहीं जांचा गया कि जमीन पर असली कब्जा किसका है। फसल बेचने के बाद पैसे आदिवासी किसानों के खातों तक पहुंचे या नहीं, यह जानने की भी कोशिश नहीं की गई।
क्या है इस मामले की जड़?
यह पूरा मामला एक बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका से शुरू हुआ था। बाद में यह जनहित याचिका में तब्दील हो गया। कोर्ट ने एक बड़े नेक्सस को पकड़ा। इसमें भोले-भाले आदिवासियों को पहले अपनी जमीनें ताकतवर लोगों को बेचने पर मजबूर किया जाता है।
फिर उन्हें उन्हीं की जमीन पर बंधुआ मजदूर बना दिया जाता है। साल 2024 में श्योपुर कलेक्टर ने पत्र लिखकर इस समस्या की तरफ ध्यान दिलाया था। लेकिन राजस्व अधिकारियों ने आदिवासियों की जमीन बचाने वाली धारा 170-बी को लागू करने में कोई दिलचस्पी नहीं दिखाई।
अब गांव-गांव जाएगी जांच टीम
हाईकोर्ट की सख्ती के बाद अतिरिक्त महाधिवक्ता विवेक खेड़कर ने कोर्ट को भरोसा दिलाया कि अब कागजी खानापूर्ति बंद होगी। एसआईटी की टीम सीधे प्रभावित गांवों में जाएगी। आदिवासी परिवारों से सीधी बातचीत होगी और हर मामले की बारीकी से जांच की जाएगी। इस मामले की अगली सुनवाई 6 जुलाई को होगी। तब तक एक नई और तथ्यात्मक रिपोर्ट पेश करनी होगी।
शिवपुरी का सीवरेज प्रोजेक्ट भी कठघरे में
इसी सुनवाई में कोर्ट ने शिवपुरी (Shivpuri) के 111 करोड़ रुपए के सीवरेज प्रोजेक्ट को लेकर भी अफसरों को फटकार लगाई। यह प्रोजेक्ट अब तक शुरू नहीं हो सका है और झीलों में गंदा पानी गिर रहा है। कोर्ट ने इस मामले में भी सख्त रुख अपनाया।
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