एमपी में 12वीं के बाद विषय बदलकर यूजी करना आसान नहीं, अब देना होगा एलिजिबिलिटी टेस्ट
News In Short
- 12वीं के बाद विषय बदलने वाले छात्रों को अब पात्रता परीक्षा देनी होगी।
- शैक्षणिक सत्र 2026-27 और 2027-28 के लिए विक्रम विवि, उज्जैन परीक्षा कराएगा।
- यह निर्णय यूजीसी रेगुलेशन-2025 और विवि समन्वय समिति की सिफारिश पर लिया गया है।
- यूजी के मौजूदा अध्यादेश 14(1) में फिलहाल प्रवेश परीक्षा का प्रावधान नहीं है, जिसे संशोधित करना होगा।
News In Detail
मध्य प्रदेश के उच्च शिक्षा विभाग ने कॉलेज शिक्षा की राह में एक बड़ा बदलाव किया है। अब वे छात्र, जो स्कूल के बाद अपनी स्ट्रीम बदलना चाहते हैं, उनके लिए सफर इतना सीधा नहीं होगा।
शैक्षणिक सत्र 2026-27 से, यदि आप गणित से 12वीं करने के बाद आर्ट्स या कॉमर्स में स्नातक (Undergraduate) करना चाहते हैं, तो आपको एक विशेष एलिजिबिलिटी टेस्ट पास करना होगा।
विषय बदलने की आजादी के साथ एक शर्त
मध्य प्रदेश उच्च शिक्षा विभाग ने साफ कर दिया है कि नई शिक्षा नीति (NEP 2020) के तहत छात्रों को विषय चुनने की आजादी तो है। लेकिन उनकी योग्यता जांचने के लिए अब राज्य स्तरीय एकीकृत परीक्षा आयोजित की जाएगी।
बुधवार 11 मार्च को जारी सर्कुलर के अनुसार, सत्र 2026-27 और 2027-28 के लिए इस परीक्षा की जिम्मेदारी विक्रम विश्वविद्यालय, उज्जैन को सौंपी गई है। इस परीक्षा में सफल होने के बाद ही छात्र प्रदेश के किसी भी विवि या कॉलेज में एडमिशन ले सकेंगे।
क्यों पड़ी इस परीक्षा की जरूरत?
एक्सपर्ट डॉ. एचएस त्रिपाठी के मुताबिक, लगभग 25% छात्र 12वीं के बाद अपना विषय बदल लेते हैं। यूजीसी रेगुलेशन-2025 के आधार पर विश्वविद्यालय समन्वय समिति ने यह अनुशंसा (Recommendation) की है।
उदाहरण के तौर पर, यदि किसी छात्र ने 12वीं विज्ञान संकाय (Science) से की है। लेकिन वह अब अंडरग्रेजुएट आर्ट्स या अन्य किसी विषय से करना चाहता है, तो उसे यह पात्रता परीक्षा देनी होगी। हालांकि, जानकारों का कहना है कि इस व्यवस्था को लागू करने से पहले मौजूदा अध्यादेश (Ordinance) में संशोधन करना जरूरी होगा।
जनवरी की बैठक में बनी थी सहमति
इस व्यवस्था को लेकर 28 जनवरी 2026 को एक अहम बैठक हुई थी, जिसमें राज्य स्तरीय परीक्षा कराने पर मुहर लगी। तय हुआ है कि प्रदेश के 18 विश्वविद्यालयों में से कोई एक विवि चक्रानुक्रम (Rotation basis) से यह परीक्षा आयोजित करेगा। एक विश्वविद्यालय लगातार दो साल तक इसकी जिम्मेदारी संभालेगा।
पीजी में पहले से थी व्यवस्था, पर अब तक नहीं हुई परीक्षा
दिलचस्प बात यह है कि पोस्ट ग्रेजुएट में यह नियम पिछले सत्र से ही प्रभावी है। एक जनवरी 2026 को विभाग ने सभी विवि को निर्देश दिए थे कि वे पीजी के लिए मार्च में पात्रता परीक्षा आयोजित करें, ताकि 1 मई से प्रवेश प्रक्रिया शुरू हो सके। लेकिन अभी तक किसी भी विश्वविद्यालय ने इस संबंध में कोई ऑफिसियल नोटिफिकेशन जारी नहीं की है।
यूजी और पीजी के नियमों में अंतर
वर्तमान में यूजी के लिए अध्यादेश 14(1) और पीजी के लिए अध्यादेश 14(2) लागू हैं। पीजी के नियमों में तो विषय बदलकर पढ़ाई करने के लिए प्रवेश परीक्षा (CUET या विवि स्तर की परीक्षा) का प्रावधान है। लेकिन यूजी के अध्यादेश 14(1) में फिलहाल ऐसा कोई नियम दर्ज नहीं है। ऐसे में विभाग द्वारा परीक्षा की तैयारी करना चर्चा का विषय बना हुआ है।
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