उच्च शिक्षा में खत्म होगी लेटलतीफी: डिग्री और टीसी 7 दिन में, 10 दिन में सुधरेगी मार्कशीट की गड़बड़ी

Aman Vaishnav | Sept 19, 2026, 11:35 IST
छात्रों के काम की डेडलाइन तय
मध्यप्रदेश सरकार ने लोक सेवाओं के प्रदान की गारंटी अधिनियम, 2010 के तहत छात्रों से जुड़ी सेवाओं की समय सीमा तय कर दी है। अब कॉलेज और यूनिवर्सिटी में पढ़ने वाले विद्यार्थियों के सभी काम तय दिनों के भीतर पूरे किए जाएंगे।

मध्य प्रदेश के छात्रों के लिए राहत भरी खबर है। राज्य सरकार ने कॉलेज और यूनिवर्सिटी से जुड़े कामों की समय सीमा तय कर दी है। अब छात्रवृत्ति, डिग्री और प्रमाण पत्र जैसे काम तय दिनों में पूरे होंगे।



नया नियम क्या कहता है

यह फैसला लोक सेवाओं के प्रदान की गारंटी अधिनियम 2010 के तहत लिया गया है। इस अधिनियम के तहत छात्रों से जुड़ी सेवाओं में संशोधन किया गया है। इसके साथ ही अधिसूचना भी जारी कर दी गई है।



अब तक इन कामों के लिए कोई तय समय सीमा नहीं थी। इस वजह से छात्रों को महीनों इंतजार करना पड़ता था। कई बार दस्तावेजों के लिए बार-बार कॉलेज के चक्कर काटने पड़ते थे।



किस काम की कितनी समय सीमा

छात्रवृत्ति आवेदनों का निराकरण अब कॉलेज प्राचार्य स्तर पर 30 दिन के भीतर होगा। डिजी लॉकर पर डिग्री अपलोड करने का काम सहायक कुलसचिव को 15 कार्य दिवस में करना होगा।



पुनर्मूल्यांकन के बाद मार्कशीट यूनिवर्सिटी से कॉलेज को 20 कार्य दिवस में भेजनी होगी। माइग्रेशन, पात्रता, नामांकन और प्रोविजनल डिग्री जैसे काम सिर्फ 7 कार्य दिवस में पूरे करने होंगे।



टीसी और चरित्र प्रमाण पत्र प्राचार्य या विभागाध्यक्ष को 7 कार्य दिवस में जारी करना होगा। अंकसूची में नाम या जन्मतिथि सुधार जैसे काम 10 दिन में होंगे। दस्तावेज सत्यापन की समय सीमा 15 कार्य दिवस रखी गई है।



छात्रों को क्या फायदा होगा

इस नए नियम से छात्रों का काफी समय बचेगा। उन्हें दस्तावेजों के लिए बार-बार कॉलेज नहीं जाना पड़ेगा। छात्रवृत्ति जैसी जरूरी सुविधा भी समय पर मिल सकेगी।



कई छात्र सिर्फ इसलिए पीछे रह जाते हैं क्योंकि उनके दस्तावेज समय पर तैयार नहीं होते। नई व्यवस्था से यह समस्या काफी हद तक कम होगी।



अधिकारियों की जवाबदेही तय

अब हर सेवा के लिए जिम्मेदार अधिकारी और समय सीमा तय कर दी गई है। यदि तय समय में काम नहीं होता तो जिम्मेदारी तय की जा सकेगी।



इससे कामकाज में पारदर्शिता आएगी। लापरवाही करने वाले अधिकारियों पर सवाल उठाना भी आसान होगा।



क्यों जरूरी था यह फैसला

उच्च शिक्षण संस्थानों में देरी की शिकायतें लंबे समय से आ रही थीं। छात्रवृत्ति और डिग्री जैसे कामों में देरी छात्रों के भविष्य पर असर डालती है।



इस समय सीमा के लागू होने से कॉलेज और यूनिवर्सिटी की जवाबदेही बढ़ेगी। साथ ही, लेटलतीफी पर भी लगाम लगेगी।



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