दिल्ली होटल हादसे से एमपी को सबक लेने की जरूरत, जंग खा रहे इमारतों के फायर सिस्टम
समझें क्या है पूरा मामला...
- दिल्ली होटल हादसे के बाद एमपी में भी इमारतों की सुरक्षा पर सवाल उठ रहे हैं।
- भोपाल नगर निगम के अलावा किसी के पास आग बुझाने के लिए हाइड्रोलिक प्लेटफॉर्म नहीं है।
- मध्य प्रदेश की इन ऊंची इमारतों में लगे फायर सिस्टम जंग खा चुके हैं।
- इंदौर के फायर ब्रिगेड के पास एक भी हाइड्रोलिक प्लेटफॉर्म नहीं है।
- मध्य प्रदेश में आग लगने की घटनाओं में 35 लोग अपनी जान गंवा चुके हैं।
दिल्ली में हुए होटल हादसे ने पूरे देश को हिलाकर रख दिया है। इस हादसे के बाद अब मध्य प्रदेश में भी खलबली मची हुई है।
राज्य की एक हजार से ज्यादा हाईराइज यानी 7 मंजिला से ऊंची इमारतों की सुरक्षा सवालों के घेरे में आ गई है।
चौंकाने वाली बात यह है कि भोपाल नगर निगम के अलावा राज्य के किसी भी नगरीय निकाय के पास 18 मंजिल की ऊंची इमारतों की आग बुझाने के लिए हाइड्रोलिक प्लेटफॉर्म तक नहीं है।
इन बहुमंजिला इमारतों में जो फायर सिस्टम लगाए गए थे, वे सिर्फ दिखावे के साबित हो रहे हैं। सालों से उनका कोई मेंटेनेंस नहीं हुआ है। न ही कभी कोई मॉकड्रिल की गई है। इसकी वजह से ये सारे सिस्टम अब जंग खा चुके हैं।
इंदौर जैसे शहर में भी कोई इंतजाम नहीं
हद तो तब हो जाती है जब हम इंदौर जैसे महानगर की तरफ देखते हैं। इंदौर बहुत तेजी से हाईराइज इमारतों का शहर बनता जा रहा है।
वहीं यहां के फायर ब्रिगेड के पास एक भी हाइड्रोलिक प्लेटफॉर्म नहीं है। सिर्फ भोपाल नगर निगम ही पूरे राज्य में ऐसा है जिसके पास 171 फीट ऊंचा हाइड्रोलिक प्लेटफॉर्म मौजूद है। बाकी शहरों की हालत बेहद चिंताजनक है।
एमपी में पिछले 6 सालों में लगीं बड़ी आग की घटनाएं
मध्य प्रदेश में आग सुरक्षा मानकों की अनदेखी कितनी भारी पड़ रही है। इसका अंदाजा आप पिछले 6 सालों में हुए इन बड़े हादसों से लगा सकते हैं। इनमें 35 लोगों को अपनी जान गंवानी पड़ी।
| तारीख और साल | शहर और जगह | आग और नुकसान | मौत |
| 18 मार्च 2026 | इंदौर (बृजेश्वरी एनेक्स) | आवासीय भवन में ईवी चार्जिंग के दौरान आग लगी। | 8 मौतें |
| 21 दिसंबर 2024 | देवास (नयापुरा) | एक आवासीय भवन में अचानक आग भड़क गई। | 4 मौतें |
| 1 अगस्त 2022 | जबलपुर (न्यू लाइफ अस्पताल) | अस्पताल में भीषण आग लगी, हाईकोर्ट ने सुरक्षा मानकों पर सवाल उठाए। | 8 मौतें |
| 7 मई 2022 | इंदौर (स्वर्णबाग कॉलोनी) | पार्किंग में खड़ी कार से आग भड़की और फैल गई। | 7 मौतें |
| 18 मई 2020 | ग्वालियर | पेंट की दुकान से आग शुरू हुई और ऊपर बने रिहायशी हिस्से तक पहुंच गई। | 7 मौतें |
सुरक्षा मानकों की अनदेखी पड़ रही भारी
इन आंकड़ों को देखकर साफ पता चलता है कि शहरों में सुरक्षा को लेकर कितनी बड़ी लापरवाही बरती जा रही है। जबलपुर के न्यू लाइफ अस्पताल में जब आग लगी थी, तो खुद हाई कोर्ट ने सुरक्षा मानकों को लेकर कड़े सवाल उठाए थे।
इसके बावजूद जमीनी स्तर पर कोई बड़ा बदलाव देखने को नहीं मिल रहा है। जब तक प्रशासन और इमारतों के मालिक समय पर फायर सिस्टम की जांच नहीं करेंगे, तब तक ऐसे हादसों का खतरा बना रहेगा।
भोपाल के होटलों और रेस्टोरेंट के हाल
भोपाल के होटलों और रेस्टोरेंट की फायर सुरक्षा पर कई सवाल खड़े हो गए हैं। शहर में करीब दो हजार होटल हैं। इनमें से लगभग 1300 में रेस्टोरेंट और किचन चलते हैं।
जानकारी के अनुसार जब इनकी जांच की गई तो हैरान कर देने वाली बात सामने आई। जांच में 15 होटल‑रेस्त्रां देखे गए तो वहां सिर्फ 1 से 3 फायर एक्सटिंग्विशर मिले।
नियम के अनुसार हर 30 मीटर पर एक एक्सटिंग्विशर होना चाहिए। कई जगह दूसरा निकास भी नहीं मिला और कई रेस्टोरेंट‑किचन बेसमेंट में चल रहे थे।
सबसे बड़ी दिक्कत यह है कि फायर एनओसी के नियम होने के बावजूद नगर निगम सीधे कार्रवाई नहीं कर सकता है।
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