हाईवे पर हादसे रोकने MPRDC बनाएगा गोवंश शेड, मुख्यमंत्री ने दिए निर्देश

Sanjay Dhiman | Jul 06, 2026, 22:05 IST
Photograph: (the sootr)
मध्य प्रदेश में गोवंश से होने वाले सड़क हादसे रोकने के लिए MPRDC हाईवे किनारे हर 5 किमी पर टीन शेड गोशाला और चबूतरे बनाएगा। मुख्यमंत्री मोहन यादव के निर्देश पर तैयार SOP जल्द लागू होगी। नेशनल हाईवे पर पहले से रेस्क्यू वाहन और रेडियम व्यवस्था चल रही है।

ऐसे समझें पूरा मामला

  • हाईवे पर गोवंश अब नहीं बनेंगे हादसे की वजह।
  • हर 5 किमी पर बनेगा गोवंश का सुरक्षित ठिकाना।
  • MPRDC लाया गोवंश बचाने का बड़ा प्लान।
  • सड़क किनारे चबूतरे, गोशाला और रेस्क्यू वाहन।
  • मुख्यमंत्री के निर्देश पर बदलेगी हाईवे की तस्वीर।

मध्य प्रदेश की सड़कों पर गोवंश के बैठने से लगातार हादसे हो रहे हैं। इसे रोकने के लिए राज्य सरकार जल्द नई SOP (एसओपी – Standard Operating Procedure) लागू करेगी। मध्य प्रदेश सड़क विकास निगम (MPRDC) ने यह योजना तैयार कर ली है। अब हाईवे किनारे हर 5 किलोमीटर पर गोवंश के लिए शेड और चबूतरे बनाए जाएंगे। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के निर्देश पर यह पूरी कवायद शुरू हुई है।



बारिश में क्यों बढ़ता है खतरा

बारिश के मौसम में खुले मैदानों की तुलना में सड़कें जल्दी सूख जाती हैं। इसी वजह से गोवंश अक्सर सड़कों पर आकर बैठ जाते हैं। तेज रफ्तार वाहन अंधेरे या कोहरे में उन्हें देख नहीं पाते। नतीजा यह होता है कि हर साल कई हादसे होते हैं, जिनमें गोवंश के साथ-साथ वाहन सवार लोगों की भी जान जाती है।



गोशाला और चबूतरों की योजना

MPRDC की नई SOP के तहत स्टेट हाईवे किनारे टीन शेड वाली गोशालाएं बनाई जाएंगी। यह जिम्मेदारी सड़क बनाने वाली कंपनी को दी जाएगी। बेसहारा गोवंश को इकट्ठा कर गोशाला तक लाना भी कंपनी का ही काम होगा। नए टेंडर की शर्तों में यह प्रावधान जोड़ा जाएगा। साथ ही सड़क किनारे चबूतरे भी बनेंगे, ताकि गोवंश सड़क की जगह वहां बैठ सकें।



हर पांच किलोमीटर के दायरे में एक बड़ा रेस्क्यू वाहन तैनात रहेगा। यह वाहन सड़क पर बैठे गोवंश को उठाकर सीधे नजदीकी गोशाला में छोड़ देगा। इससे स्थानीय प्रशासन के साथ मिलकर स्टेट हाईवे को गोवंश मुक्त बनाने की कोशिश होगी।



विधानसभा में उठा था मुद्दा

गोवंश से जुड़े हादसों को लेकर विधानसभा में पहले भी हंगामा हो चुका है। सत्ता पक्ष और विपक्ष दोनों ने यह मुद्दा सदन में उठाया था। मंत्री कैलाश विजयवर्गीय सहित कई वरिष्ठ मंत्रियों और विधायकों ने गोवंश संरक्षण को लेकर सुझाव दिए थे। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव खुद भी गोवंश प्रेमी माने जाते हैं और अक्सर गोशालाओं में सेवा करते नजर आते हैं। इन्हीं सुझावों पर अमल करते हुए MPRDC ने यह योजना शुरू की है।



नेशनल हाईवे पर स्थिति सबसे गंभीर

भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI – National Highways Authority of India) भोपाल के प्रोजेक्ट डायरेक्टर देवांश नवल के अनुसार, गोवंश से जुड़े हादसे नेशनल हाईवे पर सबसे ज्यादा होते हैं। इसे देखते हुए NHAI ने जिला प्रशासन के साथ मिलकर रेस्क्यू टीमें बनाई हैं। टोल नाकों पर मौजूद काऊ कैचिंग व्हीकल की मदद से गोवंश को सड़क से हटाकर पास की गोशालाओं में भेजा जाता है।



यह वाहन 60 किलोमीटर के दायरे में दिन में दो बार और रात में दो बार गश्त लगाता है। रायसेन, नर्मदापुरम और गुना जैसे जिलों में यह व्यवस्था पहले ही शुरू हो चुकी है। गोवंश की सुरक्षा के लिए उनकी गर्दन और सींगों पर रेडियम भी लगाया जाता है, ताकि रात में वाहन चालक दूर से ही उन्हें देख सकें और गति कम कर लें।



नई सड़कों पर प्रयोग के तौर पर शुरुआत

MPRDC के प्रबंध संचालक भरत यादव ने बताया कि नगरीय विकास एवं आवास विभाग की SOP पहले से लागू है। अब नई सड़कों के लिए अलग से SOP तैयार की जा रही है। शुरुआत में कुछ चुनी हुई सड़कों पर प्रयोग के तौर पर गोशालाएं बनाई जाएंगी। टेंडर शर्तों में यह प्रावधान जोड़ा जा रहा है। नतीजों के आधार पर आगे इसका विस्तार किया जाएगा।



अगर यह प्रयोग सफल रहता है, तो आने वाले समय में प्रदेश की ज्यादातर सड़कें गोवंश से जुड़े हादसों से मुक्त हो सकती हैं। इससे न सिर्फ गोवंश की जान बचेगी, बल्कि वाहन चालकों की सुरक्षा भी बढ़ेगी।



एक्सपर्ट कोट्स

  • देवांश नवल, प्रोजेक्ट डायरेक्टर, NHAI भोपाल — गोवंश से जुड़े हादसों की समस्या नेशनल हाईवे पर सबसे अधिक होने और रेस्क्यू व्यवस्था को लेकर उनका बयान स्रोत में दर्ज है।
  • भरत यादव, प्रबंध संचालक, MPRDC — नई सड़कों पर गोवंश प्रबंधन SOP और प्रयोग के तौर पर गोशाला निर्माण को लेकर उनका बयान स्रोत में दर्ज है।

FAQ

  1. MPRDC द्वारा हाईवे पर गोवंश के लिए क्या नई व्यवस्था की जा रही है?
    MPRDC प्रदेश के स्टेट हाईवे पर हर 5 किलोमीटर के दायरे में गोवंश के लिए टीन शेड वाले बाड़े और चबूतरे बनाने जा रही है, ताकि पशु सड़कों पर बैठने की बजाय वहां सुरक्षित बैठ सकें।
  2. हाईवे पर आवारा पशुओं को सड़कों से हटाने की जिम्मेदारी किसकी होगी?
    सड़क का निर्माण करने वाली संबंधित एजेंसी या कंपनी स्थानीय प्रशासन के साथ मिलकर इन पशुओं को रेस्क्यू वाहन के जरिए सुरक्षित टीन शेड तक पहुंचाने का काम करेगी।
  3. रात के समय हाईवे पर हादसों को रोकने के लिए प्रशासन क्या उपाय कर रहा है?
    रात के अंधेरे में वाहन चालकों को पशु दूर से दिखाई दे सकें, इसके लिए जिला प्रशासन टोल प्लाजा की मदद से गायों की गर्दन और सींगों पर चमकदार रेडियम पट्टी लगा रहा है।

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