MP में गरीबों के मकान बनाएंगे प्राइवेट बिल्डर, रियूज्ड वाटर होगा अनिवार्य; भूमि विकास नियमों में भी बदलाव की तैयारी
सरकार का मकसद गरीब परिवारों को घर उपलब्ध कराना है। साथ ही पानी की बचत और गिरते भूजल स्तर को रोकने पर जोर रहेगा। शहरों के विकास के नियम भी आज की जरूरतों के हिसाब से बदले जाएंगे।
बिल्डर बनाएंगे गरीबों के मकान
नई हाउसिंग पॉलिसी में गरीब परिवारों के लिए मकान बनाने की जिम्मेदारी निजी बिल्डरों को भी दी जाएगी। इसके लिए सरकार बिल्डरों को जरूरी मंजूरी देने की प्रक्रिया आसान बनाएगी। इनमें कॉलोनाइजर लाइसेंस और बिल्डिंग परमिशन जैसी मंजूरियां शामिल हैं। पात्र गरीब परिवारों को मकान के लिए मिलने वाली दो लाख रुपए की सरकारी मदद भी इस व्यवस्था से जोड़ी जाएगी।
दरअसल, अभी सरकारी योजनाओं से गरीब परिवारों की जरूरत के मुताबिक मकान नहीं बन पा रहे हैं। इसलिए सरकार अब निजी बिल्डरों की मदद से ज्यादा मकान बनवाना चाहती है। इससे मकान बनाने के काम में तेजी आने की उम्मीद है। नीति आयोग की एक रिपोर्ट के मुताबिक मध्य प्रदेश में करीब 17 लाख गरीब परिवारों को मकान की जरूरत है।
उद्योगपति कर्मचारियों के लिए बना सकेंगे किराये के मकान
प्रस्तावित हाउसिंग पॉलिसी में औद्योगिक क्षेत्रों के लिए भी प्रावधान किए जा रहे हैं। इसके तहत बड़े उद्योगपति और औद्योगिक संस्थान अपने कर्मचारियों के लिए आवास बनाकर उन्हें किराये पर उपलब्ध करा सकेंगे। इससे श्रमिकों और कर्मचारियों को आवास की सुविधा मिलने के साथ ही किराये के मकानों की उपलब्धता बढ़ाने में मदद मिल सकती है।
मास्टर प्लान नहीं तो भी निर्माण की राह होगी आसान
मध्य प्रदेश के कई शहरों में अभी तक मास्टर प्लान लागू नहीं हुआ है। इससे इन शहरों में जमीन के इस्तेमाल और निर्माण की मंजूरी को लेकर परेशानी होती है। अब नगरीय विकास और आवास विभाग इन नियमों में बदलाव की तैयारी कर रहा है। भूमि विकास नियमों में साल 2012 के बाद अब बदलाव किया जाएगा।
नए नियमों में यह तय होगा कि किस जमीन पर मकान बनेंगे और कहां दुकानें या दफ्तर बनाए जा सकेंगे। कुछ जगहों पर मकान और दुकानें दोनों बनाने की अनुमति भी मिल सकेगी। इसके साथ ही फ्लोर एरिया रेशियो यानी FAR में भी बदलाव करने की तैयारी है। आसान भाषा में समझें तो FAR से तय होता है कि किसी जमीन पर कितना निर्माण किया जा सकता है।
सरकार का मकसद उन शहरों में निर्माण के काम को आसान बनाना है, जहां मास्टर प्लान लागू नहीं है। नए नियम लागू होने से मकान, दुकान और व्यावसायिक इमारतें बनाने की व्यवस्था में बदलाव हो सकता है। इससे शहरों के विकास में तेजी आने की उम्मीद है।
निर्माण कार्य और उद्योगों में रियूज्ड वाटर का उपयोग होगा अनिवार्य
मध्य प्रदेश में जमीन के नीचे पानी का स्तर लगातार गिर रहा है। कई शहरों में पानी की कमी भी बढ़ रही है। इसे देखते हुए सरकार अब रियूज्ड वाटर पॉलिसी लाने की तैयारी कर रही है। इसके तहत गंदे पानी को साफ करके दोबारा इस्तेमाल किया जाएगा। सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट यानी STP में साफ किए गए पानी का निर्माण कार्यों में इस्तेमाल जरूरी किया जा सकता है।
इसके अलावा खाने-पीने की चीजें और दवाइयां बनाने वाले उद्योगों को छोड़कर बाकी उद्योगों में भी इस पानी का इस्तेमाल अनिवार्य करने की तैयारी है। सरकार का मकसद निर्माण कार्यों और कारखानों में जमीन के नीचे के पानी और साफ ताजे पानी का इस्तेमाल कम करना है। इससे पानी की बचत होगी और भूजल पर बढ़ता दबाव भी कम हो सकेगा।
28 अक्टूबर को सामने आ सकता है तीनों नीतियों का खाका
भोपाल में 28 अक्टूबर को अर्बन कॉन्क्लेव होने वाला है। इसमें सरकार तीनों नई नीतियों को पेश कर सकती है। हाउसिंग पॉलिसी के जरिए निजी बिल्डरों की मदद से गरीबों के लिए मकान बनाए जाएंगे। भूमि विकास नियमों में बदलाव से शहरों में निर्माण के काम आसान हो सकते हैं। वहीं रियूज्ड वाटर पॉलिसी से पानी की बचत पर जोर दिया जाएगा।
हालांकि, अभी इन तीनों नीतियों को अंतिम रूप नहीं दिया गया है। इनमें क्या-क्या नियम होंगे और इन्हें कब से लागू किया जाएगा, इसकी जानकारी भी सामने नहीं आई है। इसके लिए सरकार की आधिकारिक घोषणा का इंतजार है।