एक प्लॉट की कई बुकिंग और ज्यादा कीमत वसूली, होम बायर्स की शिकायत पर सालों नहीं होती सुनवाई
समझें पूरा मामला...
- हाउसिंग सोसाइटियां कर रही होमबायर्स से धोखाधड़ी।
- एक भूखंड पर कई लोगों से बुकिंग लेकर डकारे जा रहे लाखों रुपए।
- भोपाल- इंदौर की निजी हाउसिंग सोसाइटियों के कई मामले आ चुके सामने।
- सरकार से सस्ती लीज लेकर मनमाने दामों में भूखंड बेचकर हो रही कमाई।
- जिन नियम और शर्तों पर ली गई लीज उन्हें तोड़कर किया जा रहा आवंटन।
मध्य प्रदेश में गृह निर्माण सहकारी सोसायटियों का जाल होम बायर्स के लिए फंदा बन गया है। सरकार से लीज पर सस्ती दरों में मिली जमीन के आवंटन में नियमों को ताक पर रखकर एक ही भूखंड और आवास पर कई-कई बुकिंग की जा रही हैं।
जमीनी विवाद की पेचीदगी के सहारे लाखों रुपए वसूले जा रहे हैं। इंदौर की करण गृह निर्माण सहकारी संस्था और भोपाल की कावेरी गृह निर्माण सोसायटी में भूखंड और फ्लैट बुकिंग के नाम पर हुई धांधली इसके ताजे उदाहरण हैं।
इनमें ईओडब्ल्यू केस दर्ज कर जांच कर रहा है वहीं इन सोसाइटियों पर नियंत्रण रखने के लिए अधिकृत सहकारिता विभाग और फर्म एवं सोसायटी पंजीयक जैसी संस्थाएं चुप्पी साधे हुए हैं।
सहकारिता विभाग की बेरुखी बढ़ा रही धांधली
फर्म एवं सोसाइटी पंजीयक द्वारा रजिस्टर होने के बाद हाउसिंग सोसाइटियां सहकारिता विभाग की निगरानी में काम करती हैं। पहले सदस्य बनाकर सोसाइटियां सरकार से सस्ती दर पर लीज हासिल करती हैं और फिर आवंटन के नाम पर वसूली का खेल शुरू कर देती हैं।
सदस्यों की आड़ में बाहरी लोगों को भूखंड- आवास बेचे जाते हैं। ऑडिट में धांधली के सहारे वसूली और नियमों की हेराफेरी पर पर्दा डाला जाता है। सहकारिता विभाग और रजिस्ट्रार भी पड़ताल नहीं करते।
फर्जीवाड़े से घिरी आधी हाउसिंग सोसाइटी
गृह निर्माण सहकारी संस्थाओं का फर्जीवाड़ा एक अरसे से जारी है। राजधानी भोपाल में ही करीब साढ़े 500 गृह निर्माण सहकारी संस्थाएं हैं, लेकिन इनमें से सही तरीके से आधी ही काम कर रही हैं।
डेढ़ साल पहले सहकारिता विभाग की गाइडलाइन की अनदेखी की शिकायतों पर लंबी जांच हो चुकी हैं। इसमें ज्यादातर सोसाइटियों में चुनाव के बिना सालों से पदाधिकारियों के जमे रहने, सदस्यों की अनदेखी कर बाहरी लोगों को आवंटन जैसी धांधली पकड़ी गई थी। जिसके बाद कई सोसाइटियों को भंग कर प्रशासक बैठाए गए थे।
अध्यक्ष ने बेंच दी करोड़ों की जमीन
मई 2026 में EOW ने इंदौर की करण गृह निर्माण सहकारी संस्था के पूर्व अध्यक्ष के खिलाफ FIR दर्ज की थी। सोसाइटी के पूर्व अध्यक्ष द्वारा सरकार से लीज पर मिली 3.37 करोड़ की जमीन को 50 लाख में बाहरी व्यक्ति को बेंचा था। इसकी शिकायत सदस्यों द्वारा की गई थी।
सोसाइटी के पदाधिकारी द्वारा किए गए फर्जीवाड़े की जांच अब ईओडब्ल्यू कर रहा है। हालांकि, इस मामले में सहकारिता विभाग और रजिस्ट्रार अब तक चुप्पी साधे बैठे हैं। यह मामला बतात है कि
कोर्ट के आदेश से दर्ज करा सके केस
अगस्त 2025 में कावेरी गृह निर्माण सहकारी संस्था के पूर्व अध्यक्ष के खिलाफ कोर्ट के आदेश पर अपराध दर्ज किया गया था। पूर्व अध्यक्ष ने सोसाइटी में फ्लैट खरीदने के नाम पर आवेदकों से लाखों की बुकिंग ली और सालों तक कब्जा नहीं दिया।
अपनी मेहनत की कमाई को हड़पने की शिकायत लेकर लोगों ने पुलिस, सहकारिता विभाग और फर्म एवं सोसाइटी पंजीयक से भी शिकायत की। जब कहीं उनकी सुनवाई नहीं हुई तो उन्हें कोर्ट की शरण लेनी पड़ी। लंबी कानूनी लड़ाई के बाद सोसाइटी के पूर्व अध्यक्ष पर केस तो दर्ज हो गया, लेकिन उनके लाखों रुपए अब भी उलझे हुए हैं।
कार्रवाई में अफसरों का सुस्त रवैया
हाउसिंग सोसाइटियों के गड़बड़झाले का खेल नया नहीं है। सोसाइटियों के पदाधिकारी सरकारी जमीन की हेराफेरी से लाखों वसूलते हैं और सहकारिता विभाग के अधिकारी इस पर पर्दा डालते हैं।
भोपाल में सोसाइटियों की गड़बड़ी को सहकारिता विभाग के अधिकारियों द्वारा छिपाने का मामला जिला प्रशासन के सामने आ चुका है। जिला प्रशासन की पड़ताल में सहकारिता विभाग की रिपोर्ट और वास्तविक स्थिति में अंतर मिलने पर कार्रवाई प्रस्तावित की जा चुकी है।
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