एमपी में IAS-IPS-IFS का टोटा, इधर 221 अफसर रिटायरमेंट की कतार में

Sanjay Dhiman | Jul 14, 2026, 18:05 IST
Photograph: (the sootr)
मध्यप्रदेश में अगले पांच साल में 221 आईएएस, आईपीएस और आईएफएस अफसर रिटायर हो जाएंगे। प्रशासनिक अधिकारियों का कोटा सालों से नहीं बढ़ा, जिससे प्रशासनिक संकट गहरा सकता है।

मध्यप्रदेश में अफसरों की कमी अब गंभीर होती जा रही है। खासकर बड़े पदों पर यह संकट साफ दिखने लगा है। आने वाले पांच सालों में हालात और बिगड़ सकते हैं। वजह है बड़ी संख्या में अफसरों का रिटायरमेंट।



प्रदेश की आबादी लगातार बढ़ रही है। इसके साथ शिक्षा और स्वास्थ्य जैसी जरूरतें भी बढ़ी हैं। सरकार ने इन जरूरतों को पूरा करने के लिए कई नए विभाग और उपक्रम बनाए हैं। जिलों की संख्या भी बढ़ाई जा रही है, जिन्हें नया प्रशासनिक ढांचा चाहिए।



इन सबके प्रबंधन के लिए ज्यादा आईएएस (IAS – Indian Administrative Service), आईपीएस (IPS – Indian Police Service) और आईएफएस (IFS – Indian Forest Service) अफसरों की जरूरत है। लेकिन हकीकत इसके उलट है। अगले पांच साल में 221 अफसर रिटायर हो जाएंगे। इनमें 95आईपीएस, 86 आईएएस और 40 आईएफएस अफसर शामिल हैं।



459 का कोटा, सिर्फ 364 काम पर

अकेले आइएएस कोटे की बात करें तो मध्यप्रदेश कैडर में 459 अफसर होने चाहिए। लेकिन फिलहाल सिर्फ 393 अफसर कार्यरत हैं। इनमें से भी 29 अफसर केंद्र सरकार में अलग-अलग पदों पर सेवाएं दे रहे हैं।



इस तरह असल में मध्यप्रदेश में सिर्फ 364 आईएएस अफसर काम कर रहे हैं। इनमें से कुछ अफसर प्रशिक्षण पर भी जाते रहते हैं। यानी जरूरत से करीब 100 से ज्यादा आईएएस अफसर कम हैं। आईपीएस और आईएफएस में भी कमोबेश यही हालात हैं।



सेवानिवृत्त आईएफएस अफसर एके बरोनिया का कहना है कि अखिल भारतीय सेवाओं में राज्यों के कोटे की समय-समय पर समीक्षा होनी चाहिए। उनका कहना है कि हर राज्य की आबादी और जरूरत के हिसाब से कोटा तय होना चाहिए।



कैसे तय होता है कोटा

आईएएस, आईपीएस और आईएफएस का चयन अखिल भारतीय सेवाओं के तहत होता है। इसकी जिम्मेदारी केंद्रीय कार्मिक विभाग की होती है। जानकारों के मुताबिक लंबे समय से मध्यप्रदेश का आईएएस कोटा नहीं बढ़ाया गया है। यह स्थिति तब है जब राज्यों में पहले से ही अफसरों की भारी कमी है।



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साइबर क्राइम के लिए ज्यादा IPS जरूरी

मध्यप्रदेश ने नक्सल समस्या पर काफी हद तक काबू पा लिया है। लेकिन नई चुनौतियां सामने आ गई हैं। साइबर अपराध और ड्रग्स का अवैध कारोबार अब बड़ी समस्या बन गए हैं। जिलों की संख्या बढ़ने से भी नई तैनातियों की जरूरत होगी।



वन तस्करी रोकना बड़ी चुनौती

वन क्षेत्रों से जुड़ी चुनौतियां भी पहले से बढ़ी हैं। वन्यजीवों की अंतरराज्यीय और अंतरराष्ट्रीय तस्करी के मामले सामने आ रहे हैं। वन भूमि पर अवैध कब्जे और अतिक्रमण हटाना भी बड़ी चुनौती है। ऐसे में ज्यादा आईएफएस अफसरों की तैनाती जरूरी हो गई है।



आगे क्या हो सकता है

अगले 5 सालों में रिटायर होने वाले अफसर:



  • 2026:10 आईएएस,13 आईपीएस,6 आईएफएस
  • 2027:24 आईएएस,13 आईपीएस,12 आईएफएस
  • 2028:15 आईएएस,25 आईपीएस,10 आईएफएस
  • 2029:20 आईएएस,19 आईपीएस,6 आईएफएस
  • 2030:17 आईएएस,25 आईपीएस,6 आईएफएस

अगर कोटा नहीं बढ़ाया गया तो प्रशासनिक कामकाज पर सीधा असर पड़ सकता है। इसका खामियाजा अंततः आम जनता को ही भुगतना पड़ेगा। शिक्षा, स्वास्थ्य और कानून व्यवस्था जैसी सेवाओं पर दबाव बढ़ सकता है। ऐसे में केंद्र सरकार से जल्द कोटा बढ़ाने की मांग तेज हो सकती है।



FAQ

  1. मध्यप्रदेश में कितने अफसर अगले पांच साल में रिटायर होंगे?
    अगले पांच साल में कुल 221 अफसर रिटायर होंगे। इनमें 95 आईपीएस, 86 आईएएस और 40 आईएफएस शामिल हैं।
  2. मध्यप्रदेश में आईएएस अफसरों की कितनी कमी है?
    मध्यप्रदेश कैडर में 459 आईएएस का कोटा है, जबकि सिर्फ 364 अफसर वास्तव में सेवाएं दे रहे हैं। यानी करीब 100 से ज्यादा अफसरों की कमी है।
  3. आईएएस, आईपीएस और आईएफएस का कोटा कौन तय करता है?
    इन अफसरों का चयन अखिल भारतीय सेवाओं के तहत होता है। इसकी जिम्मेदारी केंद्रीय कार्मिक विभाग की होती है।

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