IAS प्रमोशन की तैयारी तेज, 13 पदों के लिए 39 SAS अफसरों के नाम UPSC को भेजे जाएंगे
समझें क्या है पूरा मामला...
- मध्य प्रदेश में गैर प्रशासनिक अफसरों को 10 साल से आईएएस बनने का मौका नहीं मिला।
- साल 2025 के लिए आईएएस संवर्ग में 13 पद खाली हैं।
- इन पदों के लिए सिर्फ 39 राज्य प्रशासनिक सेवा (SAS) अफसरों के नाम भेजे जाएंगे।
- मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने यह प्रस्ताव मंजूर कर दिया है।
- गुजरात, बिहार, झारखंड जैसे राज्य गैर प्रशासनिक अफसरों को लगातार मौका दे रहे हैं।
मध्य प्रदेश में सरकारी अफसरों के बीच एक पुराना मुद्दा फिर चर्चा में है। राज्य में गैर प्रशासनिक सेवा के अफसरों को भारतीय प्रशासनिक सेवा यानी आईएएस (Indian Administrative Service) में आने का मौका नहीं मिल रहा है। यह स्थिति पिछले 10 साल से बनी हुई है। अब 2025 के लिए 13 नए पद आईएएस संवर्ग में मिले हैं। लेकिन इन पदों पर भी सिर्फ राज्य प्रशासनिक सेवा (SAS) के अफसरों के नाम भेजे जाएंगे।
39 नाम, 13 पद
आईएएस के 13 खाली पदों के लिए कुल 39 अफसरों के नाम भेजे जाएंगे। नियम के मुताबिक, हर एक पद के लिए तीन नाम प्रस्तावित किए जाते हैं। इन नामों का चयन सिर्फ राज्य प्रशासनिक सेवा (SAS) के अफसरों में से किया जाएगा। उनके काम और सेवा रिकॉर्ड के आधार पर विभागीय पदोन्नति समिति चयन करेगी। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव (मोहन यादव सरकार) इस प्रस्ताव को पहले ही मंजूरी दे चुके हैं। अब यह प्रस्ताव एक-दो दिन में संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) को भेज दिया जाएगा।
10 साल से मौका नहीं
साल 2016 में आखिरी बार चार गैर प्रशासनिक सेवा के अफसरों को आईएएस बनने का मौका मिला था। इसके बाद पिछले 10 साल में किसी भी गैर प्रशासनिक अफसर को आईएएस संवर्ग में शामिल नहीं किया गया।
आमतौर पर बेहतर काम करने वाले अफसरों को प्रोत्साहन के तौर पर आईएएस बनने का मौका दिया जाता है। लेकिन मध्य प्रदेश में यह प्रक्रिया 2016 के बाद से बंद है। सामान्य प्रशासन विभाग (Madhya Pradesh General Administration Department) की ओर से जो प्रस्ताव भेजा जाता है, उसमें सिर्फ राज्य प्रशासनिक सेवा (SAS) के अफसरों के नाम ही शामिल किए जाते हैं।
दूसरे राज्यों में अलग हाल
मध्य प्रदेश के उलट कई राज्य गैर प्रशासनिक अफसरों को लगातार मौका दे रहे हैं। इनमें गुजरात, झारखंड, बिहार और बंगाल शामिल हैं। इन राज्यों में गैर प्रशासनिक सेवा के अफसर भी आईएएस संवर्ग में नियुक्त होते रहते हैं। राज्य सरकार के पास ऐसा करने का पूरा अधिकार है। लेकिन मध्य प्रदेश में इस मुद्दे पर ध्यान नहीं दिया जा रहा है। इसी वजह से गैर प्रशासनिक अफसरों में नाराजगी है।
2016 में मिला था मौका
साल 2016 में आखिरी बार चार गैर प्रशासनिक सेवा के अफसरों को आईएएस बनने का मौका मिला था। इसके बाद पिछले 10 साल में किसी भी गैर प्रशासनिक अफसर को आईएएस संवर्ग में शामिल नहीं किया गया। आमतौर पर बेहतर काम करने वाले अफसरों को प्रोत्साहन के तौर पर आईएएस बनने का मौका दिया जाता है। लेकिन मध्य प्रदेश में यह प्रक्रिया 2016 के बाद से बंद है। सामान्य प्रशासन विभाग की ओर से जो प्रस्ताव भेजा जाता है, उसमें सिर्फ राज्य प्रशासनिक सेवा (SAS) के अफसरों के नाम ही शामिल किए जाते हैं।
चयन प्रक्रिया कैसी होगी
आईएएस संवर्ग (IAS cadre) में नियुक्ति के लिए जल्द ही चयन बैठक होगी। इस बैठक में संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) के अध्यक्ष या सदस्य शामिल होंगे। इसके अलावा प्रदेश के मुख्य सचिव और एक अपर मुख्य सचिव भी मौजूद रहेंगे। केंद्रीय कार्मिक, लोक शिकायत और पेंशन मंत्रालय (DoPT) के दो अधिकारी भी बैठक में शामिल होंगे। यही समिति अफसरों के सेवा रिकॉर्ड और काम के आधार पर 39 नामों में से अंतिम चयन करेगी।
कमलनाथ सरकार का प्रस्ताव
यह मुद्दा पहली बार सामने नहीं आया है। कमलनाथ सरकार के समय भी इस पर सहमति बनी थी। तत्कालीन सामान्य प्रशासन मंत्री डॉ. गोविंद सिंह ने इस दिशा में पहल की थी, लेकिन बाद में यह मामला आगे नहीं बढ़ पाया और ठंडे बस्ते में चला गया। उस समय भी आईएएस संवर्ग में शामिल करने के लिए सिर्फ राज्य प्रशासनिक सेवा के अफसरों के नाम ही प्रस्तावित किए गए थे।
छत्तीसगढ़ जैसी मांग
राज्य प्रशासनिक सेवा संघ ने अब सरकार के सामने नई मांग रखी है। संघ चाहता है कि जो अफसर आईएएस बनने से रह गए हैं, उन्हें छत्तीसगढ़ की तर्ज पर सुविधा दी जाए। छत्तीसगढ़ ने अप्रैल 2026 से अपने नियमों में बदलाव किया है। वहां पात्र अफसरों को उच्चतम वेतनमान देने का प्रावधान किया गया है।
मध्य प्रदेश राजपत्रित अधिकारी संघ भी लंबे समय से ऐसी ही मांग कर रहा है। अब देखना होगा कि सरकार इस मामले में क्या फैसला लेती है।
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