NCRB के चौंकाने वाले आंकड़े: नवजातों को छोड़ने में MP देश में नंबर वन, देखें रिपोर्ट
मध्य प्रदेश में हर साल नवजात शिशुओं की एक ऐसी चीख गूंजती है जो सुनाई नहीं देती।यहां हर साल कई नवजात बच्चों को छोड़ दिया जाता है। कई बच्चों को दुनिया में आने से पहले ही मार देते हैं। कुछ मासूम कूड़े के ढेर और झाड़ियों में मिलते हैं। एनसीआरबी (NCRB) की 2024 की रिपोर्ट बहुत डराने वाली है।
मध्यप्रदेश बच्चों को छोड़ने के मामले में देश में नंबर वन है। भ्रूण हत्याके मामलों में भी प्रदेश पहले नंबर पर है। यह शर्मनाक सिलसिला पिछले छह सालों से लगातार जारी है।
प्रदेश में मासूमों की सुरक्षा पर बड़े सवाल खड़े हो रहे हैं। प्रशासन और समाज को इस पर गहराई से सोचना होगा। आइए जानते हैं आखिर बेटी बचाओ अभियान वाले मध्यप्रदेश में ऐसे हालात क्यों बने हैं?
NCRB रिपोर्ट में मध्य प्रदेश के चौंकाने वाले आंकड़े
एनसीआरबी रिपोर्ट 2024 (NCRB Report 2024) के मुताबिक, मध्य प्रदेश में साल 2024 में 146 बच्चों को छोड़ने के के मामले दर्ज किए गए। यह आंकड़ा पूरे देश के कुल 686 मामलों का 21 प्रतिशत से अधिक है। यानी देश में हर पांच में से एक छोड़ा हुआ नवजात मध्य प्रदेश का है।
इन नवजातों को जहां पाया गया, वो जगहें रूह कंपाने वाली हैं। जैसे झाड़ियां, कूड़े के ढेर, सड़क के किनारे, सुनसान खेत और अस्पतालों के बाहर। गुजरात 117 मामलों के साथ दूसरे और महाराष्ट्र 110 मामलों के साथ तीसरे नंबर पर है।
भ्रूण हत्या में भी MP अव्वल
सिर्फ बच्चों को छोड़ना ही नहीं, भ्रूण हत्या (Foeticide) में भी मध्य प्रदेश सबसे आगे है। 2024 में MP में 27 भ्रूण हत्या के मामले सामने आए। ये मामले देश के कुल 133 मामलों का 20 प्रतिशत से ज्यादा है। छत्तीसगढ़ और महाराष्ट्र दोनों ने 19-19 मामले दर्ज किए। जबकि राजस्थान में 14 मामले आए हैं।
छह साल से MP पहले नंबर पर
यह कोई एक साल की विफलता नहीं है। मध्य प्रदेश शिशु परित्याग (Madhya Pradesh Infant Abandonment) के मामले में लगातार छह सालों से देश में नंबर 1 बना हुआ है। आंकड़े गवाह हैं।
6 साल का रिकॉर्ड
| वर्ष | मामले |
|---|---|
| 2019 | 187 |
| 2020 | 186 |
| 2021 | 159 |
| 2022 | 174 |
| 2023 | 140 |
| 2024 | 146 |
स्रोत: NCRB वार्षिक रिपोर्ट
इन छह सालों में आंकड़े कभी घटे, कभी बढ़े — लेकिन MP कभी पहला नंबर से नहीं हटा। बाल अधिकार कार्यकर्ता बताते हैं कि ये आंकड़े असल तस्वीर का केवल एक हिस्सा हैं। दूरदराज के ग्रामीण इलाकों में कई मामले तो कलंक, डर और पुलिस तक पहुंच न होने की वजह से दर्ज ही नहीं होते हैं। ।
क्या है इसकी वजह
बेटे की चाह और बेटियों पर जुल्म
बेटी बचाओ मध्य प्रदेश (Save Girl Child MP) जैसे अभियान चलाए जाते हैं, लेकिन जमीनी हकीकत बताती है कि बेटियों को लेकर समाज की सोच अभी भी नहीं बदली। दहेज की मांग, बेटी को बोझ मानने की परंपरा और संपत्ति में लड़कियों को हिस्सा न देने की सोच ये सब मिलकर एक जहरीला माहौल बनाते हैं। जिसमें बेटियां जन्म लेने से पहले ही निशाने पर होती हैं।
गरीबी और सामाजिक कलंक
एक और बड़ा कारण गरीबी है। जब परिवार के पास खाने के लाले हों, तो एक और बच्चे का बोझ असहनीय लगता है। अविवाहित या अनचाहे गर्भ पर समाज का कलंक इतना गहरा है कि महिलाएं किसी से मदद मांगने की हिम्मत नहीं जुटा पातीं। ऐसे में वे सबसे दर्दनाक रास्ता अपनाती हैं।
काउंसलिंग और सपोर्ट सिस्टम की कमी
एक्सपर्ट बताते हैं कि MP में जोखिम में जी रही महिलाओं के लिए काउंसलिंग सेवाएं लगभग न के बराबर हैं। सरकारी अस्पतालों में संवेदनशील सहायता की कमी है। गर्भवती महिलाओं तक PCPNDT Act जैसे कानूनों की जागरूकता अभी भी नहीं पहुंची है।
क्या हो सकता है समाधान?
- PCPNDT Act का सख्त क्रियान्वयन
- गांव-गांव तक काउंसलिंग सेवाएं
- गोद लेने की प्रक्रिया को आसान बनाना
- बालिका जन्म पर परिवारों को सामाजिक-आर्थिक प्रोत्साहन
- पंचायत स्तर पर जागरूकता अभियान
बाल अधिकार संगठनों का कहना है कि जब तक जमीनी स्तर पर बदलाव नहीं होगा, तब तक NCRB के आंकड़े बदलने वाले नहीं। सरकार की योजनाएं कागजों पर हैं, जमीन पर उतारना बाकी है।
नवजात शिशु अपराध भारत
नवजात शिशु अपराध भारत (Newborn Crime India) के आंकड़ों में देखें तो मध्य प्रदेश अकेले 21% से ज्यादा मामलों का बोझ उठा रहा है।
देश के बाकी बड़े राज्य जैसे उत्तर प्रदेश, बिहार और राजनंबर इस मामले में MP से काफी पीछे हैं — जो यह सवाल उठाता है कि आखिर MP की विशेष परिस्थितियां क्या हैं जो इसे इतना अलग बनाती हैं।
FAQ
- MP शिशु परित्याग में नंबर 1 क्यों है?
मुख्य कारण बेटे की चाहत, सामाजिक लोक-लाज का डर और अत्यधिक गरीबी है। जमीनी स्तर पर काउंसलिंग और सरकारी योजनाओं का सही से न पहुंच पाना भी इस आंकड़े को बढ़ाता है। - PCPNDT एक्ट क्या है?
यह कानून लिंग परीक्षण (Sex Determination) और भ्रूण हत्या को रोकने के लिए है। इसका सख्ती से पालन होने पर भ्रूण हत्या पर रोक लगाई जा सकती है। - लावारिस बच्चा मिलने पर क्या करें?
बच्चे को उठाने या कहीं और ले जाने के बजाय तुरंत चाइल्ड हेल्पलाइन (1098) या पुलिस को सूचना दें।
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