एमपी के इंटर्न डॉक्टरों का स्टाइपेंड बढ़ा, आदेश जारी, अब मिलेंगे 21500 रुपए
समझें क्या है पूरा मामला
- इंटर्न डॉक्टरों को हर महीने 21,500 रुपए मिलेंगे।
- मासिक स्टाइपेंड में 7,163 रुपए की वृद्धि हुई।
- वित्त विभाग ने स्टाइपेंड प्रस्ताव को मंजूरी दी।
- तीन दिवसीय आंदोलन के बाद सहमति बनी।
- पुलिस कार्रवाई की जांच भी कराई जा रही है।
मध्यप्रदेश के एमबीबीएस इंटर्न डॉक्टरों को बड़ी राहत मिली है। सरकार ने बढ़े हुए स्टाइपेंड का आदेश जारी कर दिया। अब इंटर्न डॉक्टरों को हर महीने 21,500 रुपए मिलेंगे। पहले उन्हें 14,337 रुपए प्रतिमाह दिए जाते थे। नई व्यवस्था से स्टाइपेंड में 7,163 रुपए की वृद्धि हुई है। सरकार और डॉक्टरों के बीच दस दिन पहले सहमति बनी थी। वित्त विभाग की मंजूरी के बाद आदेश जारी हुआ।
स्टाइपेंड का आदेश जारी
इंटर्न डॉक्टरों की मांग स्वीकार करते हुए सरकार ने बढ़े हुए स्टाइपेंड का आदेश जारी किया है। वित्त विभाग ने संबंधित प्रस्ताव पर अपनी मंजूरी दी। अब डॉक्टरों को 21,500 रुपए मासिक स्टाइपेंड मिलेगा। पहले उन्हें हर महीने 14,337 रुपए दिए जाते थे। इस तरह मासिक राशि में 7,163 रुपए बढ़े हैं।
एमपी इंटर्न डॉक्टर स्टाइपेंड (MP Intern Doctor Stipend) में करीब 50 प्रतिशत वृद्धि हुई। इस फैसले से सरकारी मेडिकल कॉलेजों के इंटर्न लाभान्वित होंगे। प्रदेशभर के सैकड़ों मेडिकल विद्यार्थियों को आर्थिक राहत मिलेगी।
14 हजार 337 से हुए 21हजार 500
एमबीबीएस इंटर्न को पहले 14,337 रुपए प्रतिमाह मिलते थे। इंटर्न डॉक्टर इस राशि को काफी कम बताते थे। वे दूसरे राज्यों के स्टाइपेंड से इसकी तुलना कर रहे थे। नई व्यवस्था में प्रत्येक इंटर्न को 21,500 रुपए मिलेंगे। इसका मतलब हर महीने 7,163 रुपए अतिरिक्त मिलेंगे। सालभर में यह वृद्धि करीब 85 हजार 956 रुपए बनेगी।
एमबीबीएस इंटर्न स्टाइपेंड वृद्धि (MBBS Intern Stipend Hike) से आर्थिक दबाव घटेगा। इंटर्न डॉक्टर अस्पतालों में लंबे समय तक सेवा देते हैं। उनके पास मरीजों की देखभाल की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी रहती है।
तीन दिन चला था आंदोलन
इंटर्न डॉक्टर स्टाइपेंड आंदोलन (Intern Doctors Stipend Protest) तीन दिन चला था। डॉक्टरों ने भोपाल में अपनी मांग को लेकर प्रदर्शन किया। उन्होंने मासिक स्टाइपेंड 30 हजार रुपए करने की मांग रखी।
प्रदर्शनकारी डॉक्टर कमला पार्क क्षेत्र में धरने पर बैठे थे। उन्होंने दूसरे राज्यों के भुगतान का भी उदाहरण दिया। उनका कहना था कि मध्यप्रदेश में राशि बेहद कम है। डॉक्टरों का आंदोलन तीसरे दिन भी जारी रहा था। इसके बाद सरकार और प्रतिनिधियों के बीच बातचीत हुई। बैठक में स्टाइपेंड बढ़ाने पर सहमति बन गई।
मुख्यमंत्री से हुआ था संवाद
आंदोलन के दौरान मामला मुख्यमंत्री मोहन यादव तक पहुंचा था। मुख्यमंत्री ने डॉक्टरों से उनकी मांगों पर संवाद किया। उन्होंने उचित समाधान निकालने का आश्वासन दिया था। उपमुख्यमंत्री तथा स्वास्थ्य मंत्री राजेंद्र शुक्ल ने भी बैठक की। बैठक में इंटर्न डॉक्टरों के प्रतिनिधि शामिल हुए थे। जूनियर डॉक्टर एसोसिएशन के प्रतिनिधि भी मौजूद थे।
मेडिकल टीचर्स एसोसिएशन ने भी बातचीत में हिस्सा लिया। बैठक के बाद स्टाइपेंड की नई राशि तय हुई। सरकार ने 21,500 रुपए पर अपनी सहमति दी। अब वित्त विभाग की मंजूरी भी मिल गई है। सरकारी आदेश से भुगतान का रास्ता साफ हुआ है। संबंधित विभाग मेडिकल कॉलेजों को आगे निर्देश जारी करेगा।
पुलिस कार्रवाई पर विवाद
आंदोलन के दौरान पुलिस कार्रवाई पर विवाद हुआ था। प्रदर्शनकारी डॉक्टरों पर वाटर कैनन का इस्तेमाल हुआ। कुछ डॉक्टरों ने लाठीचार्ज के आरोप भी लगाए थे। सोशल मीडिया पर घटना के कई वीडियो सामने आए थे। वीडियो में सफेद कोट पहने डॉक्टर दिखाई दिए। उन पर तेज पानी की बौछार छोड़ी गई थी।
डॉक्टरों को मिला समर्थन
प्रदर्शनकारी इंटर्न डॉक्टरों को वरिष्ठ चिकित्सकों का समर्थन मिला। जूनियर डॉक्टर एसोसिएशन भी आंदोलन के साथ आया। इससे प्रदर्शन का प्रभाव पूरे प्रदेश में बढ़ गया। गांधी मेडिकल कॉलेज के सीनियर रेजिडेंट्स ने विरोध जताया। उन्होंने ओपीडी सेवाओं का बहिष्कार करने का निर्णय लिया। मरीजों की जरूरत देखते हुए आपातकालीन सेवाएं जारी रहीं।
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