दिल्ली जा रहे सीजेपी के 15 कार्यकर्ता इटारसी में डिटेन, अभिजीत दीपके बोले-इमरजेंसी घोषित क्यों नहीं कर देते
समझें क्या है पूरा मामला
- पुलिस ने इटारसी रेलवे स्टेशन पर 15 कार्यकर्ताओं को ट्रेन से उतारा।
- इनमें 3 युवतियां और 12 युवक शामिल हैं।
- वे 10 अक्टूबर को जंतर-मंतर पर प्रदर्शन में जा रहे थे।
- कार्यकर्ताओं ने पुलिस पर बदसलूकी और डराने-धमकाने का आरोप लगाया।
- पुलिस की ओर से आधिकारिक बयान अब तक नहीं आया है।
ट्रेन से उतारे गए कार्यकर्ता कहां ठहरे?
इटारसी में पुलिस कार्रवाई के बाद कार्यकर्ताओं को द पार्क रिसोर्ट में ठहराया गया। रिपोर्ट के मुताबिक, रिसोर्ट में करीब 16 कार्यकर्ता हैं। शुक्रवार सुबह शासकीय डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी अस्पताल की टीम ने उनका मेडिकल परीक्षण किया।
नाश्ते में कार्यकर्ताओं को पोहा-जलेबी दिया गया। इस दौरान उन्होंने 'मेरा रंग दे बसंती चोला' गीत भी गाया।
पुलिस ने वापसी की क्या तैयारी की है?
पुलिस के अलग-अलग बयानों के मुताबिक, शुक्रवार शाम कार्यकर्ताओं को वापस भेजने की तैयारी है। उनके ट्रेन टिकट बनवाए जाएंगे। इसके बाद उन्हें ट्रेन से रवाना किया जाएगा।
हालांकि, उन्हें किस आदेश के तहत रोका गया था, यह साफ नहीं है। प्रशासन ने उनकी वापसी को लेकर भी कोई आधिकारिक जानकारी नहीं दी है। यह भी पता नहीं चला है कि वे ट्रेन में कहां से सवार हुए थे। फिलहाल, पूरे मामले की तस्वीर साफ नहीं है।
कार्यकर्ताओं ने पुलिस पर क्या आरोप लगाए?
सीजेपी की एक युवती कार्यकर्ता ने आरोप लगाया कि ट्रेन में पुलिस ने उनके साथ बदसलूकी की और उनके कपड़े खींचे। उन्होंने कहा कि वहां कोई महिला पुलिसकर्मी मौजूद नहीं थी। उनके मुताबिक, पुलिस उनके अधिकार छीन रही है।
कार्यकर्ताओं ने यह भी आरोप लगाया कि पुलिस उन्हें डराने-धमकाने लगी। उन्हें यह भी नहीं बताया गया कि पुलिस उन्हें कहां ले जा रही है। इन आरोपों पर पुलिस का जवाब अभी नहीं आया है।
कार्यकर्ता दिल्ली क्यों जा रहे थे?
कार्यकर्ताओं के मुताबिक, वे मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार का इस्तीफा मांगने जा रहे थे। वे चुनाव से जुड़े मुद्दे उठाना चाहते थे। साथ ही, SIR रद्द करने की मांग भी करना चाहते थे।
प्रदर्शनकारियों ने बताया कि वे महाराष्ट्र से दिल्ली जा रहे थे। 10 अक्टूबर को जंतर-मंतर पर प्रदर्शन होना है। उन्होंने कहा कि वे विद्यार्थी हैं और देश के हालात पर बोलना अपनी जिम्मेदारी समझते हैं।
उनका कहना है कि भ्रष्टाचार, अपराध और दुष्कर्म जैसे मुद्दों पर सवाल उठाना जरूरी है।
नेताओं ने क्या बयान दिए?
सीजेपी के संस्थापकअभिजीत दीपके ने सवाल किया। उन्होंने पूछा कि इमरजेंसी घोषित क्यों नहीं कर देते। सीजेपी प्रवक्ता आशुतोष रांका ने भी सवाल उठाया। उनका बयान था, 'क्या मोदी आधिकारिक तौर पर इमरजेंसी लागू करने से पहले कोई नेट प्रैक्टिस कर रहे हैं।'
ये दोनों बयान सीजेपी की ओर से आए हैं। दीपके और रांका की बातों पर पुलिस ने कुछ नहीं कहा है।
एआईएसएफ छात्रों का क्या कहना है?
ऑल इंडिया स्टूडेंट्स फेडरेशन (AISF) के राष्ट्रीय अध्यक्ष विराज दिवांग ने भी बयान दिया। उन्होंने बताया कि पुणे से दिल्ली जा रहे छात्रों को मध्य प्रदेश पुलिस ने इटारसी में हिरासत में लिया। उनके मुताबिक, यह कार्रवाई कुछ ही देर पहले हुई।
संगठन पता लगा रहा है कि छात्रों को कहां ले जाया जा रहा है। साथ ही, उन्हें हिरासत में लेने की वजह भी जानने की कोशिश की जा रही है। पुलिस छात्रों को बस में बैठाकर अपने साथ ले गई।
स्टेशन पर नारेबाजी, एएसपी ने क्या कहा?
पुलिसकर्मियों के खिलाफ कार्यकर्ताओं ने स्टेशन पर ही नारेबाजी शुरू कर दी। उन्होंने 'ज्ञानेश कुमार इस्तीफा दो' और 'मोदी मुर्दाबाद' के नारे लगाए। कार्यकर्ताओं ने कहा, 'हम तुम्हारी तानाशाही से नहीं डरेंगे।'
सीजेपी कार्यकर्ताओं को हिरासत में लेने के दौरान महिला कार्यकर्ताओं की पुलिस से बहस हुई। इनमें कुछ युवतियां भी थीं। मीडिया ने एएसपी अभिषेक राजन से बात करने की कोशिश की, लेकिन उन्होंने जवाब नहीं दिया।
FAQ
- पुलिस ने इटारसी रेलवे स्टेशन पर कार्यकर्ताओं को क्यों उतारा?
पुलिस ने इटारसी रेलवे स्टेशन पर 15 कार्यकर्ताओं को प्रशिक्षित किया क्योंकि वे 10 अक्टूबर को जंतर-मंतर पर प्रदर्शन करने जा रहे थे। - ट्रेन से उतारे गए कार्यकर्ताओं की स्थिति क्या है?
ट्रेन से उतारे गए कार्यकर्ताओं को इटारसी में द पार्क रिसोर्ट में ठहराया गया है, जहां उनका मेडिकल परीक्षण किया गया और उन्हें नाश्ते में पोहा-जलेबी दिया गया। - कार्यकर्ताओं ने पुलिस पर क्या आरोप लगाए हैं?
कार्यकर्ताओं ने आरोप लगाया कि पुलिस ने उनके साथ बदसलूकी की, उनके कपड़े खींचे, और उन्हें बिना बताए कहीं ले जाने की कोशिश की।