एमपी में साइबर क्राइम: गूगल पर डॉक्टर का नंबर सर्च करना पड़ा भारी, क्लिक करते ही खाते से पैसे गायब

Aman Vaishnav | Apr 20, 2026, 11:51 IST
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मध्य प्रदेश के जबलपुर में एक हैरान करने वाला मामला सामने आया है। यहां डॉक्टर का नंबर सर्च करते समय एक युवक ठगी का शिकार हो गया। जैसे ही युवक ने नंबर पर क्लिक किया उसका बैंक अकाउंट साफ हो गया।

News In Short

  • जबलपुर के सुशील कुमार सोनी गूगल सर्च से ठगी का शिकार हो गया।
  • सुशील मिर्गी के डॉक्टर का नंबर ढूंढते वक्त ठगों के जाल में फंसे।
  • ठगों ने डॉक्टर की जानकारी देने के नाम पर रशीद के लिए 10 रुपए मांगे थे।
  • लिंक पर क्लिक करते ही तीन बैंक खातों से पैसे गायब हो गए।
  • पीड़ित की शिकायत पर साइबर पुलिस ने आरोपियों की तलाश शुरू कर दी है।

News In Detail

मध्य प्रदेश में साइबर पुलिस की कोशिशों के बावजूद ठगी के मामले लगातार बढ़ते जा रहे हैं। शातिर ठग नए-नए तरीके अपनाकर लोगों को ठगने में लगे हुए हैं। एक ऐसा ही अजीब और हैरान करने वाला मामला जबलपुर से सामने आया है।



यहां एक शख्स गूगल पर डॉक्टर का नंबर ढूंढ रहा था लेकिन उसे क्या पता था कि ये नंबर सर्च करन उसे भारी पड़ जाएगा। जैसे ही उसने गूगल पर मिले नंबर पर क्लिक किया उसका बैंक अकाउंट खाली हो गया।



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बैंक खाते से डेढ़ लाख रुपए साफ

जानकारी के अनुसार युवक गूगल पर डॉक्टर का नंबर सर्च कर रहा था। गूगल में मिले नंबरों पर जैसे ही उसने क्लिक किया, उसके फोन से जुड़े तीन बैंक खातों से डेढ़ लाख रुपए उड़ गए। जैसे ही युवक को ठगी का पता चला, उसने पुलिस में रिपोर्ट दर्ज करवाई है। इसके बाद साइबर टीम ने ठगों की तलाश शुरू कर दी है।



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मिर्गी के इलाज के लिए ढूंढ रहे थे नंबर

शिकायत के अनुसार शहर के सुशील कुमार सोनी मिर्गी के इलाज के लिए किसी अच्छे डॉक्टर का नंबर ढूंढ रहे थे। इस दौरान उन्हें डॉक्टर की बजाय गूगल पर साइबर ठगों का नंबर मिल गया। बताया जा रहा है कि डॉक्टर की जानकारी लेने के लिए ठगों ने उनसे 10 रुपए का शुल्क जमा करने को कहा था। इसी दौरान ठगी हुई।



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एमपी में साइबर क्राइम के मामले

साल 2024 और 2025 में साइबर क्राइम के मामलों में भारी वृद्धि हुई है, लेकिन हल होने वाले मामलों की संख्या में कमी देखी गई है। सरकारी आंकड़े बताते हैं कि 2024 में कुल 974 साइबर क्राइम के मामले दर्ज हुए थे। इनमें से 443 मामलों का ही समाधान हुआ है।



वहीं 2025 में यह संख्या बढ़कर 1106 हो गई, लेकिन सिर्फ 425 मामलों को ही हल किया जा सका है। इसका मतलब यह है कि 2025 में मामले बढ़े, लेकिन समाधान की दर घट गई।



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जबलपुर और भोपाल में ऑनलाइन धोखाधड़ी ज्यादा

राज्य के साइबर पुलिस मुख्यालय से पेश आंकड़ों के मुताबिक, जबलपुर और भोपाल में ऑनलाइन बैंकिंग धोखाधड़ी के मामले सबसे ज्यादा रहे हैं। जबलपुर में 2024 में 112 मामले दर्ज हुए थे। जबकि 2025 में यह संख्या घटकर 101 रह गई।



वहीं भोपाल में 2024 में 80 मामले दर्ज हुए थे, जो 2025 में घटकर 63 हो गए। बावजूद इसके इन दोनों शहरों में ऑनलाइन धोखाधड़ी के मामलों में कमी आई है, लेकिन राज्यभर में साइबर क्राइम के मामले बढ़े हैं।



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साइबर क्राइम को नियंत्रित करने के लिए कदम

राज्य सरकार ने साइबर क्राइम और ऑनलाइन बैंकिंग धोखाधड़ी पर नियंत्रण पाने के लिए कई कदम उठाए हैं। सरकार ने विधानसभा में बताया था कि मध्य प्रदेश राज्य साइबर पुलिस मुख्यालय ने अब तक 338 प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किए हैं।



इनमें 33 हजार 31 पुलिसकर्मियों और कर्मचारियों को प्रशिक्षित किया गया। इसके अलावा, कई राष्ट्रीय और राज्य स्तरीय प्रशिक्षण संस्थानों के माध्यम से नियमित रूप से पुलिस और अन्य कर्मचारियों को साइबर सुरक्षा की जानकारी दी जा रही है।



साइबर जागरूकता अभियान का महत्व

साइबर अपराध को रोकने और लोगों को जागरूक करने के लिए राज्य सरकार ने 28 हजार 157 साइबर जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए हैं। इनमें 2 करोड़ 18 लाख 36 हजार 78 नागरिकों को साइबर अपराधों से बचने के उपायों के बारे में जानकारी दी गई है।



इसके अलावा, राज्य सरकार सोशल मीडिया के माध्यम से भी साइबर जागरूकता अभियान चला रही है। साथ ही रेलवे स्टेशनों, बस स्टैंड्स, मेलों और सार्वजनिक स्थानों पर पोस्टर्स, बैनर और वीडियो के माध्यम से लोगों को जागरूक किया जा रहा है।



FAQ

  1. गूगल पर मिले नंबरों पर भरोसा कैसे करें?
    गूगल पर मिले हर नंबर को असली न मानें। हमेशा आधिकारिक वेबसाइट पर जाकर ही नंबर चेक करें। किसी भी अनजान नंबर पर पेमेंट बिल्कुल न करें। संदिग्ध नंबरों की रिपोर्ट गूगल मैप्स पर जरूर करें।
  2. साइबर ठगी होने पर सबसे पहले क्या करें?
    ठगी होते ही तुरंत हेल्पलाइन नंबर 1930 पर कॉल करें। अपने बैंक को सूचित कर खाते को ब्लॉक कराएं। नजदीकी साइबर पुलिस स्टेशन में जाकर एफआईआर दर्ज कराएं। समय पर सूचना देने से पैसा वापस मिल सकता है।
  3. डिजिटल पेमेंट करते समय क्या सावधानी बरतें?
    अपना पिन या ओटीपी किसी के साथ साझा न करें। पेमेंट के लिए भेजे गए क्यूआर कोड को स्कैन न करें। केवल भरोसेमंद ऐप्स और वेबसाइट्स का ही इस्तेमाल करें। फोन में आने वाले संदिग्ध मैसेज को तुरंत डिलीट करें।

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