MP में डिप्टी जेलर ने दिया इस्तीफा, जेल अधीक्षक पर गाली-गलौज का लगाया आरोप
News In Short
- टीकमगढ़ जेल में अधीक्षक और डिप्टी जेलर के बीच जमकर विवाद हुआ।
- डिप्टी जेलर शुक्ला ने अधीक्षक पर गाली देकर बेइज्जत करने का आरोप लगाया है।
- गुस्से में शुक्ला ने जेल डीजी को इस्तीफा भेज दिया था।
- जेल मुख्यालय के दखल के बाद इस्तीफा वापस ले लिया गया है।
- पूरे मामले की जांच डीआइजी को सौंपी गई है।
News In Detail
कैसे शुरू हुआ झगड़ा?
मध्यप्रदेश जेल विभाग में बड़ा बवाल खड़ा हो गया। टीकमगढ़ जेल के अधीक्षक यजुवेंद्र बाघमारे और डिप्टी जेलर अश्विनी शुक्ला के बीच ऐसी तकरार हुई कि मामला इस्तीफे तक जा पहुंचा।
दरअसल शुरुआत एक कैदी की शिकायत से हुई। टीकमगढ़ जेल में बंद एक कैदी को सागर जेल भेजा गया था। वहां से उसे जमानत मिल गई। जमानत के बाद उसने टीकमगढ़ जेल में हुए कथित बुरे बर्ताव की शिकायत अधिकारियों से की।
जांच के लिए आया अफसर, चेंबर में भड़का विवाद
शिकायत पर वरिष्ठ अधिकारियों ने सागर जेल के अधीक्षक मानवेंद्र सिंह परिहार को जांच सौंपी। परिहार ने जांच के लिए डिप्टी जेलर मनोज मिश्रा को टीकमगढ़ भेजा।
जब मिश्रा टीकमगढ़ जेल पहुंचे तो वहां अधीक्षक बाघमारे मौजूद नहीं थे। मिश्रा डिप्टी जेलर शुक्ला के साथ चेंबर में बैठ गए और जांच का काम शुरू किया। इसी बीच अधीक्षक बाघमारे वहां आ पहुंचे। उन्होंने अपनी गैरमौजूदगी में चेंबर में बैठने पर कड़ी आपत्ति जताई।
बस यहीं से बात बिगड़ी। दोनों अधिकारियों के बीच जुबानी जंग हो गई। डिप्टी जेलर शुक्ला का आरोप है कि अधीक्षक बाघमारे ने गाली-गलौज की और उन्हें सबके सामने बेइज्जत किया।
इस्तीफे से हड़कंप
आहत और गुस्से में शुक्ला ने बिना देर किए जेल डीजी वरुण कपूर को अपना इस्तीफा भेज दिया। इस्तीफे में उन्होंने अधीक्षक बाघमारे पर कई गंभीर आरोप लगाए। इससे पूरे जेल विभाग में हलचल मच गई।
जेल डीजी वरुण कपूर ने इस मामले में खुद दखल दिया। उन्होंने बताया कि शुक्ला ने आवेश में आकर इस्तीफा दिया था। जेल मुख्यालय से चर्चा के बाद शुक्ला ने अपना त्यागपत्र वापस ले लिया।
जांच के आदेश, अब आगे क्या?
मामला शांत तो हो गया, लेकिन यहीं नहीं रुका। जेल मुख्यालय ने पूरे मामले की जांच डीआइजी को सौंप दी है। डीजी कपूर ने कहा कि जांच रिपोर्ट आने के बाद नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।
फिलहाल यह साफ नहीं है कि अधीक्षक बाघमारे पर गाली-गलौज के आरोपों की जांच में क्या निकलेगा। वहीं, यह मामला इस बात की याद दिलाता है कि सरकारी विभागों में अहम का टकराव कभी-कभी कितना बड़ा रूप ले लेता है।
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