मध्यप्रदेश में बदलेगा 58 साल पुराना जेल मैन्युअल, कैदियों को मिल सकती हैं नई सुविधाएं, सजा के साथ सुधार पर जोर
मध्यप्रदेश जेल सुधार में क्या खास?
मध्यप्रदेश जेल सुधार के तहत बंदियों के सुधार और पुनर्वास पर जोर है। पुनर्वास का मतलब रिहाई के बाद समाज में दोबारा जुड़ने की तैयारी है। यानी MP Jail Reforms में सजा के साथ सुधार को भी प्राथमिकता दी गई है।
अभी सरकार की मंजूरी मिलना बाकी है। हाल ही में मंत्रालय में एक बैठक हुई थी। इसमें मुख्य सचिव और जेल विभाग के वरिष्ठ अधिकारी शामिल हुए थे। बैठक में नए प्रावधानों पर चर्चा हुई। ये बदलाव मध्यप्रदेश जेल मैन्युअल (Madhya Pradesh Jail Manual) के ड्राफ्ट में शामिल हैं।
पुरुष कैदी बच्चों को कैसे रख सकेंगे?
महिला कैदियों की तरह अब पुरुष कैदी भी अपने बच्चों को साथ रख सकेंगे। बच्चे की उम्र छह साल तक होनी चाहिए। यह सुविधा हर पुरुष कैदी को नहीं मिलेगी। शर्त है कि परिवार में बच्चे की देखभाल करने वाला कोई दूसरा व्यक्ति न हो।
अभी प्रदेश की जेलों में छह साल से कम उम्र के 114 बच्चे हैं। ये सभी अपनी मां के साथ रहते हैं। सवाल है कि परिवार में कोई दूसरा सहारा न हो तो बच्चा किसके पास रहेगा?
पैरोल और फरलो में क्या मिलेगा?
नए मैन्युअल में पैरोल और फरलो (Parole and Furlough) दोनों की व्यवस्था है। पैरोल का मतलब तय शर्तों पर कुछ दिनों की अस्थायी रिहाई है।
प्रस्ताव के मुताबिक सजायाफ्ता बंदियों को एक-तिहाई सजा पूरी करने पर 14 दिन की रिहाई मिल सकेगी। इसके लिए बंदी का व्यवहार अच्छा होना जरूरी होगा। यह रिहाई पारिवारिक काम और बीमारी जैसे कारणों से मिल सकेगी।
फरलो की व्यवस्था भी शामिल की गई है। पात्र बंदियों को सजा की तय अवधि पूरी करने के बाद कुछ दिनों का अवकाश मिल सकेगा। इस दौरान वे अपने परिवार से मिल सकेंगे।
आपातकालीन पैरोल कितने घंटे की होगी?
आपातकालीन पैरोल का प्रावधान भी जोड़ा गया है। इसकी अवधि 48 घंटे होगी। इस दौरान बंदी के साथ सुरक्षाकर्मी तैनात रहेंगे। यानी बंदी को अस्थायी रिहाई मिलेगी, लेकिन सुरक्षा निगरानी जारी रहेगी।
आदतन अपराधी और विचाराधीन बंदी
यह नियम पांच साल या उससे ज्यादा सजा वाले अपराधों पर लागू होगा। ऐसे मामलों में दो से ज्यादा बार जेल आने वाले बंदी आदतन अपराधी माने जाएंगे। विचाराधीन बंदियों को इस श्रेणी से अलग रखा जाएगा। विचाराधीन बंदी वे होते हैं, जिनके मामलों में अदालत का अंतिम फैसला नहीं आया है।
विचाराधीन बंदियों की मदद के लिए अंडरट्रायल रिव्यू कमेटी को प्रभावी बनाया जाएगा। इस कमेटी में जिला एवं सत्र न्यायाधीश, कलेक्टर, एसपी और विधि विशेषज्ञ शामिल होंगे। एसपी का मतलब पुलिस अधीक्षक (Superintendent of Police) होता है। कमेटी के जरिए विचाराधीन बंदियों को कानूनी सहायता दी जाएगी।
थर्ड जेंडर बंदी और खुली जेल
थर्ड जेंडर बंदियों के लिए अलग व्यवस्था की जाएगी। उनके लिए मेडिकल जांच की सुविधा भी होगी। फिलहाल जेलों में ऐसी कोई स्पष्ट व्यवस्था नहीं है। नए मैन्युअल में खुली जेलों का प्रावधान भी शामिल किया गया है। अभी प्रदेश में आठ खुली जेलें हैं। इस व्यवस्था का फायदा महिला बंदियों को भी मिल सकेगा।
रिहाई के बाद रोजगार की तैयारी
सजा पूरी करने वाले बंदियों को आफ्टर केयर सर्विस दी जाएगी। इसके तहत उन्हें उनकी रुचि के हिसाब से हुनर सिखाया जाएगा। स्किल ट्रेनिंग से उन्हें रिहाई के बाद रोजगार पाने में मदद मिलेगी। इससे वे समाज की मुख्यधारा से भी जुड़ सकेंगे। मानसिक रूप से अस्वस्थ बंदियों को दूसरी जेलों में भेजने की व्यवस्था भी होगी। इसके तहत उन्हें भोपाल, ग्वालियर समेत अन्य शहरों की जेलों में शिफ्ट किया जा सकेगा।
जेलों की मौजूदा तस्वीर क्या है?
मध्यप्रदेश में 11 केंद्रीय, 41 जिला और 73 उपजेलें हैं। इनमें कुल 44,260 बंदी हैं। प्रदेश में आठ खुली जेलें भी हैं। प्रदेश की जेलों में 18,379 सजायाफ्ता पुरुष बंदी हैं। वहीं, सजायाफ्ता महिला बंदियों की संख्या 775 है। विचाराधीन पुरुष बंदियों की संख्या 23,946 है। वहीं, विचाराधीन महिला बंदियों की संख्या 902 है। यानी जेलों में आधे से ज्यादा बंदी विचाराधीन हैं। अब सभी की नजर सरकार की मंजूरी पर टिकी है।
FAQ
- मध्यप्रदेश में नया जेल मैन्युअल कब लागू होगा?
नया जेल मैन्युअल सरकार की मंजूरी मिलते ही इस साल के अंत तक लागू किया जा सकता है। - क्या सभी पुरुष कैदी बच्चों को साथ रख सकेंगे?
नहीं, यह सुविधा केवल उन्हीं पुरुष कैदियों को मिलेगी जिनके बच्चे की उम्र छह साल तक है और परिवार में उसकी देखभाल के लिए कोई दूसरा नहीं है। - आपातकालीन पैरोल कितने घंटे की होगी?
आपातकालीन पैरोल की अवधि 48 घंटे होगी, जिसके दौरान बंदी के साथ सुरक्षाकर्मी तैनात रहेंगे।