जल गंगा संवर्धन अभियान से बदलेगी एमपी की सूरत, गंगा दशहरा पर सीएम ने जनता से की खास अपील
समझें क्या है पूरा मामला
- गंगा दशहरा के मौके पर मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने बड़ा संदेश दिया।
- सीएम ने पानी को बचाने और नदियों को पूजने की बात पर जोर दिया।
- राज्य में पानी की सुरक्षा के लिए एक बड़ा अभियान चलाया जा रहा है।
- इस जल अभियान के तहत पुरानी बावड़ियों और तालाबों को सुधारा जाएगा।
- सरकार इस पूरे काम पर करीब 2500 करोड़ रुपए खर्च कर रही है।
गंगा दशहरा के पावन मौके पर मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने जनता से बात की। उन्होंने प्रदेश के सभी लोगों के नाम एक खास संदेश जारी किया है। सीएम ने कहा कि हमारी संस्कृति में नदियों को देवी का रूप मानते हैं। इसलिए पानी को बचाना देश के निर्माण के लिए बहुत जरूरी काम है। उन्होंने आगे कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देश आगे बढ़ रहा है। अब मध्य प्रदेश भी पानी की सुरक्षा में बड़ी छलांग लगा रहा है।
पानी को लेकर पीएम मोदी का क्या विजन है?
मुख्यमंत्री ने गंगा दशहरा को पानी के प्रति आभार जताने का पर्व बताया। उन्होंने अपने नए ब्लॉग में पानी को लेकर कई जरूरी बातें लिखी हैं। सीएम के अनुसार पीएम मोदी ने पानी बचाने को एक जन आंदोलन बनाया है। उन्होंने जल है तो कल है के नारे को सच किया है।
केंद्र सरकार के नमामि गंगे और अमृत सरोवर योजना से बहुत फायदा हुआ है। इन योजनाओं ने देश में पानी की सुरक्षा को एक नई दिशा दी है।
देश में अमृत सरोवरों की क्या स्थिति है?
जल संरक्षण के प्रयासों के कारण देश में पानी की स्थिति सुधर रही है। पूरे देश में अब तक 70 हजार से ज्यादा अमृत सरोवर बने हैं। इन नए तालाबों से बारिश का पानी रोकने में बड़ी मदद मिल रही है। इससे जमीन के नीचे का जलस्तर भी तेजी से ऊपर आ रहा है। इस पूरे काम में मध्य प्रदेश सबसे आगे रहने वाले राज्यों में शामिल है। राज्य सरकार पानी को सहेजने के लिए हर संभव प्रयास कर रही है।
जल गंगा संवर्धन अभियान क्या है?
सीएम डॉ. मोहन यादव ने अपने राज्य के एक विशेष अभियान की जानकारी दी। मध्य प्रदेश में जल गंगा संवर्धन अभियान बहुत जोर-शोर से चल रहा है। साल 2025 में मिली बड़ी कामयाबी के बाद इसे दोबारा शुरू किया गया है।
साल 2026 में यह अभियान 19 मार्च से शुरू हुआ है। यह पूरा अभियान आने वाली 30 जून तक पूरी तरह सक्रिय रहेगा। इसके तहत राज्य की नदियों और तालाबों को नया जीवन दिया जाएगा।
इस अभियान पर कितना पैसा खर्च होगा?
इस अभियान के तहत पुराने कुओं और ऐतिहासिक बावड़ियों को सुधारा जाएगा। सरकार इस पूरी बड़ी योजना पर करीब 2500 करोड़ रुपए खर्च करेगी। इस भारी बजट से पानी की पुरानी संरचनाओं को ठीक किया जाएगा।
योजना में 10 हजार से ज्यादा चेकडैम का संधारण शामिल किया गया है। इसके साथ ही खराब पड़े स्टॉपडैम को भी पूरी तरह ठीक किया जाएगा। इससे गांवों में पानी को रोकना बहुत आसान हो जाएगा।
मुख्यमंत्री के अनुसार मध्य प्रदेश मुख्य रूप से एक कृषि प्रधान राज्य है। यहां की तरक्की सीधे तौर पर पानी की उपलब्धता से जुड़ी हुई है। किसानों की भलाई के लिए सरकार रिज-टू-वैली मॉडल पर काम कर रही है।
साथ ही खेतों में सिंचाई की आधुनिक तकनीकों को अपनाया जा रहा है। इन सब नए प्रयासों से हमारे किसानों की आय में बढ़ोतरी होगी। पानी मिलने से खेतों में फसल की पैदावार भी पहले से बेहतर होगी।
पुरानी बावड़ियां कैसे बदलेंगी राज्य की सूरत?
राज्य की प्राचीन बावड़ियां और पुराने तालाब हमारी असली सांस्कृतिक धरोहर हैं। इनका सही विकास करना सरकार की प्राथमिकताओं में शामिल है। इन पुरानी जगहों के जीर्णोद्धार से जल संकट पूरी तरह दूर हो जाएगा।
पानी की कमी खत्म होने से लोगों को बड़ी राहत मिलेगी। इसके साथ ही इन ऐतिहासिक जगहों से पर्यटन के नए अवसर मिलेंगे। लोग इन सुंदर और प्राचीन जल स्रोतों को देखने दूर से आएंगे।
जनता से सीएम ने क्या अपील की है?
अपने ब्लॉग के अंत में मुख्यमंत्री ने लोगों से एक अपील की। उन्होंने कहा कि इसे केवल सरकारी काम बिल्कुल मत समझिए। यह हम सब का एक साझा और बहुत बड़ा संकल्प होना चाहिए।
सरकार इसके लिए पानी चौपाल जैसे नए कार्यक्रम भी आयोजित कर रही है। इन कार्यक्रमों के जरिए समाज के हर वर्ग को साथ जोड़ा जाएगा। विशेषकर महिलाओं और युवाओं को इस अभियान में आगे आना चाहिए।
सीएम ने संदेश दिया कि हमें आज ही कदम उठाना होगा। यदि हम आज पानी को बचाएंगे, तभी हमारा कल सुरक्षित हो पाएगा। हमारे आज के प्रयास से ही आने वाली पीढ़ियां खुशहाल रह सकेंगी।
वे समृद्ध जल संसाधनों का पूरा लाभ आसानी से ले सकेंगी। उन्होंने हर नागरिक से एक सुंदर और जल-सम्पन्न मध्य प्रदेश बनाने को कहा। सभी लोग इस बड़े आंदोलन में अपना जरूरी योगदान जरूर दें।
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