कटनी बनेगा एमपी का नया खनिज हब, 150 हेक्टेयर सोना-चांदी ब्लॉक ऑक्शन के लिए तैयार
कटनी के स्लीमनाबाद क्षेत्र में 150 हेक्टेयर का बेसमेटल ब्लॉक ई-ऑक्शन के लिए तैयार है। यह ब्लॉक इमलिया-धूरी इलाके में स्थित है। प्री-ऑक्शन कमेटी की मंजूरी मिल चुकी है। अब शासन स्तर पर नीलामी प्रक्रिया शुरू हो गई है। इस ब्लॉक में कॉपर, जिंक, लेड और सिल्वर जैसे खनिज मिलेंगे।
कटनी जिले के स्लीमनाबाद क्षेत्र का इमलिया-धूरी इलाका अब चर्चा में है। यहां का 150 हेक्टेयर बेसमेटल ब्लॉक ई-ऑक्शन के लिए तैयार कर दिया गया है। प्री-ऑक्शन कमेटी पहले ही मंजूरी दे चुकी है।
अब शासन स्तर पर इसकी नीलामी प्रक्रिया शुरू हो चुकी है। यह पूरा इलाका इमलिया से धूरी तक फैला हुआ है। वैज्ञानिक सर्वे के आधार पर इसे खनन के लिए आरक्षित किया गया है।
कटनी खनिज संपदा का केंद्र
कटनी जिले को लंबे समय से मध्य प्रदेश की खनिज टोकरी कहा जाता है। यहां चूना पत्थर, डोलोमाइट, बॉक्साइट और संगमरमर जैसे खनिज पहले से निकाले जा रहे हैं। फायर क्ले, लेटराइट, क्वार्ट्ज और आयरन का खनन भी यहां जारी है।
इसी वजह से यहां सीमेंट, लाइम और डोलोमाइट आधारित कई उद्योग चलते हैं। इन उद्योगों से राज्य को हर साल बड़ा राजस्व मिलता है।
सोने की संभावना पहले से
इमलिया क्षेत्र पहले भी सोने को लेकर चर्चा में रहा है। भारतीय भू-वैज्ञानिक सर्वेक्षण (GSI – Geological Survey of India) की शुरुआती जांच में यहां सोने के संकेत मिले थे। साथ ही चांदी और अन्य रणनीतिक धातुओं की मौजूदगी भी सामने आई थी।
अब इसी क्षेत्र को बेसमेटल ब्लॉक के रूप में नीलामी के लिए तैयार किया गया है। इससे मध्य प्रदेश में पहली बार एक ही जिले में सोना और बेसमेटल खनन साथ हो सकेगा।
बेसमेटल की वैश्विक मांग
कॉपर, जिंक, लेड और सिल्वर आज आधुनिक उद्योग की रीढ़ माने जाते हैं। कॉपर का इस्तेमाल बिजली उत्पादन, ट्रांसफार्मर और इलेक्ट्रिक वाहनों में होता है। यह चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर, डेटा सेंटर और रक्षा उपकरणों में भी काम आता है।
जिंक का उपयोग स्टील उद्योग और रेलवे ढांचों में होता है। बड़े प्रोजेक्ट्स में जंग-रोधी कोटिंग के लिए भी इसका इस्तेमाल होता है। लेड मुख्यतः बैटरी उद्योग में काम आता है, जो ऑटोमोबाइल और पावर बैकअप का अहम हिस्सा है।
सिल्वर का इस्तेमाल सोलर पैनल, मेडिकल उपकरण और हाई-टेक इलेक्ट्रॉनिक्स में तेजी से बढ़ रहा है। केंद्र सरकार इन रणनीतिक धातुओं के घरेलू उत्पादन को बढ़ावा दे रही है। इससे आयात पर निर्भरता कम करने में मदद मिलेगी। इस ब्लॉक की नीलामी को आत्मनिर्भर भारत की दिशा में अहम कदम माना जा रहा है।
महाकौशल में खनन विस्तार
भू-वैज्ञानिकों के अनुसार मध्य प्रदेश का महाकौशल क्षेत्र बहुधात्विक खनिजों से भरपूर रहा है। जबलपुर और कटनी में हाल के वर्षों में अन्वेषण कार्य तेज हुआ है। इसी वजह से यह क्षेत्र देश के प्रमुख खनिज निवेश केंद्रों में शामिल हो सकता है।
रोजगार व आर्थिक फायदा
खनन विशेषज्ञों का मानना है कि यह ब्लॉक शुरू होने से जिले की अर्थव्यवस्था को सीधा फायदा होगा। इससे निजी और सरकारी निवेश दोनों बढ़ेंगे।
खनन के साथ लॉजिस्टिक्स, ट्रांसपोर्ट और भारी मशीनरी क्षेत्र में भी तेजी आएगी। निर्माण, वर्कशॉप, वेयरहाउस, पेट्रोल पंप और सुरक्षा सेवाओं को भी फायदा मिलेगा।
स्थानीय युवाओं के लिए रोजगार के हजारों अवसर बन सकते हैं। जिला खनिज निधि (DMF – District Mineral Foundation) और कॉरपोरेट सोशल रिस्पॉन्सिबिलिटी (CSR – Corporate Social Responsibility) से गांवों में सड़क, पानी और बिजली जैसी सुविधाएं भी बढ़ेंगी।
प्रशासन की जानकारी
खनिज विभाग के उपसंचालक रत्नेश दीक्षित ने इस बारे में जानकारी दी। उन्होंने बताया कि स्लीमनाबाद क्षेत्र का यह बेसमेटल ब्लॉक पूरी तरह नीलामी के लिए तैयार है। शासन स्तर पर ई-ऑक्शन की प्रक्रिया प्रारंभ कर दी गई है।
FAQ
- कटनी का बेसमेटल ब्लॉक कहां स्थित है?
यह ब्लॉक कटनी जिले के स्लीमनाबाद क्षेत्र के इमलिया-धूरी इलाके में स्थित है। इसका क्षेत्रफल 150 हेक्टेयर है। यह ई-ऑक्शन के लिए तैयार है। - इस ब्लॉक में कौन-कौन से खनिज मिलेंगे?
इस ब्लॉक में कॉपर, जिंक, लेड और सिल्वर जैसे बेसमेटल खनिज मिलेंगे। पहले यहां सोने के संकेत भी मिल चुके हैं। इसी वजह से यह क्षेत्र खास माना जा रहा है। - स्थानीय लोगों को क्या फायदा होगा?
इससे स्थानीय युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसर बनेंगे। लॉजिस्टिक्स, ट्रांसपोर्ट और निर्माण जैसे क्षेत्रों में भी काम बढ़ेगा। DMF और CSR से गांवों में बुनियादी सुविधाएं भी बेहतर होंगी।
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