लाड़ली बहना योजना पर अब तक 65,395 करोड़ खर्च, हाईकोर्ट ने सरकार से मांगा हिसाब

Ratan Kumar Mishra | Sept 16, 2026, 23:15 IST
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लाड़ली बहना योजना पर खर्च को लेकर हाईकोर्ट में सवाल उठा है। सितंबर की 40वीं किस्त के बाद नियमित सहायता 65,395.99 करोड़ रुपये हो गई। कोर्ट ने सरकार से योजना के खर्च और हितग्राहियों का पूरा डेटा मांगा है।

5 प्वाइंट में समझें क्या है पूरा मामला

  • लाड़ली बहना योजना में अब तक बड़ी रकम महिलाओं के खातों में पहुंची है।
  • सितंबर 2026 की 40वीं किस्त के बाद रकम 65,395.99 करोड़ रुपए हुई।
  • अगस्त 2026 तक नियमित सहायता 63,560.90 करोड़ रुपए थी।
  • योजना के खर्च और लाभार्थियों के आंकड़ों पर हाईकोर्ट में सवाल उठा है।
  • कोर्ट ने सरकार से योजना का पूरा वित्तीय और हितग्राही डेटा मांगा है।

लाड़ली बहना योजना पर अब खर्च का हिसाब चर्चा में है। मध्य प्रदेश हाईकोर्ट की ग्वालियर बेंच ने सरकार से जवाब मांगा है। यह मामला योजना की उपयोगिता और खर्च से जुड़ा है। कोर्ट ने मुख्य सचिव समेत तीन विभागों से जवाब मांगा है। याचिका ग्वालियर निवासी सुधा दुबे ने दायर की है। सरकार को चार सप्ताह में अपना जवाब देना है।



हाईकोर्ट ने कौन-कौन से आंकड़े मांगे है

कोर्ट ने योजना के लाभार्थियों का पूरा डेटा मांगा है। सरकार को कुल लाभार्थियों की जानकारी देनी होगी। अब तक कितनी रकम दी गई, यह भी बताना होगा। लाभार्थियों की मौजूदा स्थिति भी बतानी होगी। इससे योजना पर खर्च की पूरी तस्वीर सामने आएगी।



अब तक लाड़ली बहना पर कितनी रकम पहुंची

सितंबर 2026 की 40वीं किस्त 13 सितंबर को जारी हुई। इस किस्त में 1,25,10,150 महिलाओं को राशि मिली। कुल 1,835.09 करोड़ रुपए सीधे खातों में पहुंचे। इसके बाद नियमित सहायता की कुल रकम 65,395.99 करोड़ हुई। यह आंकड़ा जून 2023 से सितंबर 2026 तक का है।



अगस्त तक कितनी रकम पहुंची थी

अगस्त 2026 तक 39 नियमित किस्तें जारी हो चुकी थीं। इन किस्तों में 63,560.90 करोड़ रुपए पहुंचाए गए थे। इसके बाद सितंबर में 1,835.09 करोड़ रुपए और दिए गए। इस तरह नियमित भुगतान 65,395.99 करोड़ रुपए पहुंच गया।



वित्तीय वर्ष के हिसाब से कितना खर्च हुआ

वित्तीय वर्ष 2023-24 में 14,726.05 करोड़ रुपए खर्च हुए। वर्ष 2024-25 में खर्च 19,051.39 करोड़ रुपए रहा। वर्ष 2025-26 में 20,318.53 करोड़ रुपए खर्च हुए। इन तीन वर्षों का कुल खर्च 54,095.97 करोड़ रुपए है। ये आंकड़े योजना के सालाना खर्च से जुड़े हैं।



2026-27 में अब तक क्या स्थिति है

वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए बड़ा बजट रखा गया है। इस साल योजना के लिए 23,882.81 करोड़ रुपए रखे गए हैं। सितंबर 2026 तक करीब 11,300 करोड़ खर्च होने का अनुमान है।



सरकार ने कब बढ़ाई मासिक सहायता

योजना की शुरुआत जून 2023 में हुई थी। उस समय महिलाओं को हर महीने 1,000 रुपए मिलते थे। सितंबर 2023 से यह रकम 1,250 रुपए हुई। नवंबर 2025 से रकम बढ़ाकर 1,500 रुपए की गई। मौजूदा नियमों में पात्र महिला को 1,500 रुपए मिलते हैं।



सरकारी पोर्टल पर 1,25,22,542 पात्र आवेदक दर्ज हैं। यह आंकड़ा योजना के आधिकारिक पोर्टल पर उपलब्ध है। सितंबर की किस्त में 1,25,10,150 महिलाओं को राशि मिली। दोनों आंकड़ों में मामूली अंतर दिखाई देता है।



याचिका में किस मुद्दे पर सवाल उठाया गया

याचिकाकर्ता सुधा दुबे ने योजना की उपयोगिता पर सवाल उठाया है। याचिकाकर्ता ने महिलाओं के सशक्तिकरण पर सवाल उठाए हैं। याचिका में राज्य के वित्तीय बोझ का भी मुद्दा है। इन दावों पर सरकार का जवाब अभी आना बाकी है।



अब सरकार के जवाब पर नजर

हाईकोर्ट ने मुख्य सचिव से जवाब मांगा है। वित्त विभाग और महिला एवं बाल विकास विभाग भी शामिल हैं। तीनों विभागों को चार सप्ताह का समय मिला है। सरकार को खर्च और लाभार्थियों का पूरा विवरण देना होगा। इसके बाद मामले में अगली सुनवाई होगी। अभी सबसे बड़ा सवाल कुल खर्च का है। उपलब्ध आंकड़ों से नियमित भुगतान की तस्वीर साफ है। सितंबर 2026 तक यह रकम 65,395.99 करोड़ रुपए है।



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