आबकारी नीति से सरकार को झटका, ठेकों की आधी कीमत ही मिली, बड़े जिलों में इंदौर ही आगे
INDORE. मध्य प्रदेश सरकार बीते सालों से लगातार 20 फीसदी अधिक राजस्व लक्ष्य बढ़ाकर नई शराब नीति ला रही है। यानी शराब ठेकों की कीमत पांच साल में दोगुनी की जा चुकी है।
इस बार 2026-27 के लिए लक्ष्य 19 हजार 952 करोड़ रुपए है, लेकिन 55 जिलों मे हुए ठेकों में अभी तक 10 हजार 480 करोड़ यानी 52.53 फीसदी ठेके ही उठे हैं। सरकार को अब मार्च के बाकी बचे 11 दिन में करीब नौ हजार करोड़ के ठेके बेचने बाकी है। नहीं तो तगड़ा झटका लगेगा।
कलेक्टर विवाद वाला शाजापुर सबसे पीछे
शाजापुर में कलेक्टर (आईएएस ऋजु बाफना) और आबकारी विभाग के बीच हुए विवाद से जमकर नुकसान हुआ है। यहां केवल 20 फीसदी ठेका ही उठा है। जिले की 222 करोड़ रुपए की दुकानों में केवल 43 करोड़ की ही दुकान अभी तक गई है। इसके बाद दमोह, रतलाम कटनी, राजगढ़, अलीराजपुर, नीमच, झाबुआ, छिंदवाड़ा, भिंड़, श्योपुर जिले हैं। इन जिलों में 30 फीसदी से कम ठेका गया है।
इंदौर, भोपाल, जबलपुर, ग्वालियर के ये हाल
- प्रदेश के चार बड़े शहरों की बात करें तो सबसे बेहतर हालत इंदौर की है। यहां 2 हजार 102 करोड़ का लक्ष्य है। इसमें 86 फीसदी यानी 1821 करोड़ रुपए आ चुके हैं।
- भोपाल में 1431 करोड़ के ठेके में से 31 फीसदी यानी 349 करोड़ के ठेके बिके हैं।
- ग्वालियर में 677 करोड़ के ठेके में से 538 करोड़ के यानी 80 फीसदी से अधिक बिक चुके हैं।
- जबलपुर में 1104 करोड़ के ठेके में से 314 करोड़ यानी करीब 30 फीसदी ही गया है।
धार, झाबुआ, अलीराजपुर में यह है हाल
- वहीं सबसे ज्यादा चर्चित बॉर्डर वाले जिले जो गुजरात लाइन के कारण अधिक उठते हैं। इसमें धार, झाबुआ, अलीराजपुर है। इनकी हालत भी इस बार खराब है।
- अलीराजपुर में सबसे ज्यादा हालत खराब है। यहां 141 करोड़ के ठेके में से केवल 32 करोड़ के 23 फीसदी ही ठेका बिका है।
- झाबुआ में 345 करोड़ के ठेके में से केवल 25 फीसदी 85 करोड़ की दुकान ही बिकी है।
- धार जिले में 570 करोड़ की दुकान में से 77 फीसदी बिक गई है। यहां स्थिति बेहतर है और अभी तक सरकार को 437 करोड़ मिल चुका है।
इंदौर में 15 ग्रुप की 38 दुकान बाकी
इंदौर में इस बार कुल लक्ष्य 59 ग्रुप की 173 शराब दुकान से 2 हजार 102 करोड़ पाने का है। इसमें से 44 ग्रुप की 135 दुकान अभी तक बिक चुकी है। इससे सरकार को 1821 करोड़ रुपए मिल चुका है।
इसका बड़ा कारण है कि मुख्य कमर्शियल की जगह तय लक्ष्य से भी अधिक कीमत पर शराब ठेकेदारों ने आपसी प्रतिस्पर्धा में उठा ली है। ऐसे में बाकी बची 15 ग्रुप की 38 दुकान से यदि तय लक्ष्य 444 करोड़ मिल गए तो, आबकारी विभाग इंदौर लक्ष्य से भी आगे निकल जाएगा।
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