अब शराब टेंडर में भाग ले सकेगी सोम डिस्टलरी, हाईकोर्ट से फौरी राहत; लाइसेंस पर अब भी संकट
News in Short
- टेंडर में भाग ले सकेगी सोम डिस्टलरी, 31 मार्च को लाइसेंस हो रहा है एक्सपायर
- एनआईटी के क्लॉज 3(i)(b) को चुनौती दी गई थी
- कोर्ट ने सरकार से मांगा जवाब, नोटिस जारी
- अन्य पात्रता शर्तें पूरी करने पर कोर्ट ने दी अंतरिम राहत
- मामला अब अगली सुनवाई तक खुला, अंतिम फैसला बाकी
Intro
हाईकोर्ट से लगातार झटके झेल रही सोम डिस्टिलरीज को आखिरकार अंतरिम राहत मिल गई है। कोर्ट ने आदेश दिया है कि केवल एक विशेष क्लॉज के आधार पर कंपनी को टेंडर से बाहर नहीं किया जा सकता।
हालांकि फर्जीवाड़े के आरोपों के बीच यह राहत कितनी टिकाऊ होगी, इस पर अब भी सवाल बने हुए हैं। क्योंकि कुछ ही दिनों में सोम का लाइसेंस खत्म होने वाला है और इन आरोपों के चलते इसके रिन्यूअल पर शंका बनी हुई है।
News in detail
लगातार कानूनी झटकों से जूझ रही सोम डिस्टिलरीज को मध्य प्रदेश हाईकोर्ट से फिलहाल आंशिक राहत मिली है। जस्टिस विवेक रूसिया और जस्टिस प्रदीप मित्तल की डिविजनल बेंच ने अंतरिम आदेश देते हुए कहा कि केवल एनआईटी के एक विवादित क्लॉज के आधार पर कंपनी को टेंडर प्रक्रिया से बाहर नहीं किया जा सकता। यह राहत ऐसे समय आई है जब कंपनी पहले ही अपने 8 लाइसेंस निलंबन को लेकर कोर्ट में हार झेल चुकी है।
टेंडर क्लॉज को लेकर कोर्ट में उठे सवाल
दरअसल, सोम डिस्टिलरीज ने 26 फरवरी 2026 को जारी निविदा (NIT) की धारा 3(i)(b) को चुनौती दी थी। कंपनी का आरोप है कि यह क्लॉज विशेष रूप से उसे टेंडर प्रक्रिया से बाहर करने के लिए जोड़ा गया है। कोर्ट ने भी प्रथम दृष्टया इस दलील को गंभीरता से लिया और माना कि याचिकाकर्ता अन्य सभी पात्रता शर्तों को पूरा करता है।
कोर्ट ने सरकार से मांगा जवाब
सुनवाई के दौरान कोर्ट ने पाया कि याचिका में उठाए गए कुछ बिंदु गंभीर हैं, खासकर पैराग्राफ 5.11 और ग्राउंड (C) में दिए गए तर्क। इस पर न्यायालय ने राज्य सरकार को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है। अतिरिक्त महाधिवक्ता ने नोटिस स्वीकार कर लिया है और मामले में विस्तृत जवाब दाखिल किया जाएगा।
बड़े वकीलों की मौजूदगी में हुई तीखी बहस
इस मामले की सुनवाई में देश के वरिष्ठ वकील भी शामिल रहे। सोम डिस्टिलरीज की ओर से पूर्व अटॉर्नी जनरल मुकुल रोहतगी ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए पक्ष रखा, जबकि राज्य सरकार की ओर से अतिरिक्त महाधिवक्ता हरप्रीत सिंह रूपराह और उप महाधिवक्ता स्वप्निल गांगुली उपस्थित रहे। इंटरवेनर की ओर से भी वरिष्ठ अधिवक्ताओं ने कड़ा विरोध दर्ज कराया।
हालांकि इस मामले की पूरी सुनवाई के बाद कोर्ट ने फैसला सुरक्षित रख लिया था। मामले में हर्ड एंड रिजर्व स्टेटस भी अपडेट हो गया था। शाम 6:18 पर यह आदेश अपलोड हुआ।
राहत मिली, लेकिन संकट टला नहीं
हालांकि कोर्ट ने फिलहाल कंपनी को टेंडर से बाहर करने पर रोक लगा दी है, लेकिन यह केवल अंतरिम राहत है। फर्जी परमिट कांड और लाइसेंस निलंबन जैसे गंभीर आरोप अब भी कंपनी के सिर पर हैं। सोम डिस्टलरी और ब्रेवरीज का लाइसेंस 31 मार्च 2026 को खत्म होने वाला है। और उसके ऊपर लगे आरोपों के चलते अब इस लाइसेंस का रिन्यू होना आसान नहीं है। ऐसे में यह साफ है कि सोम डिस्टिलरीज की कानूनी लड़ाई अभी खत्म नहीं हुई है और अंतिम फैसला आने तक स्थिति पूरी तरह स्पष्ट नहीं होगी।
टेंडर की दौड़ में बना रहेगा सस्पेंस
इस आदेश के बाद अब सोम डिस्टिलरीज टेंडर प्रक्रिया में शामिल हो सकेगी, लेकिन आगे क्या होगा यह कोर्ट के अंतिम फैसले पर निर्भर करेगा। फिलहाल इतना जरूर है कि लगातार झटकों के बीच मिली यह राहत कंपनी के लिए बड़ी राहत तो है, लेकिन इसके भविष्य पर अब भी अनिश्चितता के बादल छाए हुए हैं
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