कम बारिश से किसान परेशान, सूख रहे खेत, जीतू पटवारी ने सीएम को पत्र लिख रखी 6 मांग
समझें क्या है पूरा मामला...
- मध्यप्रदेश में मानसून लंबे समय से ब्रेक पर है।
- प्रदेश में अब तक 15 प्रतिशत कम बारिश हुई है।
- 28 जिलों में सामान्य से काफी कम पानी गिरा है।
- कई जगह बोनी रुकी, फसलें सूखने लगी हैं।
- कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी ने सीएम को चिट्ठी लिखी है।
मध्य प्रदेश में इस बार मानसून ने किसानों की चिंता बढ़ा दी है। लंबे समय से बारिश का ब्रेक चल रहा है। इसका सीधा असर खेती पर पड़ रहा है। इसी को लेकर प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी ने मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव को चिट्ठी लिखी है। उन्होंने किसानों के लिए 6 बड़ी मांगें रखी हैं।
मानसून ब्रेक से संकट
जीतू पटवारी ने पत्र में कहा कि प्रदेश में अब तक सामान्य से करीब 15 प्रतिशत कम बारिश दर्ज हुई है। कुल 55 जिलों में से 28 जिलों में हालत ज्यादा खराब है। यहां सामान्य से 16 से 78 प्रतिशत तक कम बारिश हुई है। इससे खरीफ की बोनी पर सीधा असर पड़ा है। कई इलाकों में बोनी अभी तक शुरू ही नहीं हो पाई है।
किन जिलों में हालत खराब
जीतू पटवारी के मुताबिक अलीराजपुर, रीवा, मऊगंज और सीधी में स्थिति गंभीर है। सिंगरौली, मंडला, शहडोल और सागर में भी हालात बिगड़ रहे हैं। रायसेन, शिवपुरी और जबलपुर में भी किसान परेशान हैं। कई जगहों पर बोई गई फसलें अब सूखने लगी हैं। कुछ जिलों में तो बोनी अब तक पूरी तरह अटकी हुई है।
फसलों को कितना नुकसान
मीडिया रिपोर्ट्स के हवाले से जीतू पटवारी ने कुछ आंकड़े भी साझा किए हैं। रीवा संभाग में धान की सिर्फ 41 प्रतिशत बोनी हो सकी है। नर्मदापुरम में करीब 38 प्रतिशत खेत अब भी खाली पड़े हैं। यहां धान की बोनी सिर्फ 62 प्रतिशत तक हुई है। रायसेन में हालात और चिंताजनक हैं। यहां दो लाख 80 हजार हेक्टेयर के लक्ष्य के मुकाबले सिर्फ 65 हजार हेक्टेयर में धान रोपा जा सका है।
मुरैना जिले में तो 11 जुलाई के बाद बारिश ही नहीं हुई। इससे बाजरा और अन्य खरीफ फसलों को 30 से 40 प्रतिशत तक नुकसान की आशंका जताई गई है। जबलपुर, सतना, मैहर और अलीराजपुर में भी धान, मक्का, कपास और सोयाबीन की फसलें संकट में हैं। किसान बारिश का इंतजार कर रहे हैं।
जीतू पटवारी की 6 बड़ी मांगें
पत्र में पटवारी ने सरकार से 6 अहम मांगें रखी हैं। पहली मांग है सभी प्रभावित जिलों में विशेष गिरदावरी सर्वे कराई जाए। इससे असली फसल नुकसान का सही आकलन हो सकेगा। दूसरी मांग पुनर्बोनी को लेकर है। जिन इलाकों में बोनी खराब हुई है, वहां किसानों को आर्थिक सहायता और मुफ्त बीज दिए जाएं।
तीसरी मांग डीजल, बिजली और सिंचाई से जुड़ी है। पटवारी ने विशेष राहत पैकेज घोषित करने को कहा है। इससे किसान वैकल्पिक सिंचाई की व्यवस्था कर सकेंगे। चौथी मांग प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना से जुड़ी है। इसके तहत जल्द सर्वे कराकर किसानों को तुरंत मुआवजा देने की बात कही गई है।
पांचवीं मांग आपातकालीन जल प्रबंधन को लेकर है। जिन इलाकों में पानी की भारी कमी है, वहां तुरंत जल प्रबंधन योजना लागू करने की मांग की गई है। छठी और आखिरी मांग निगरानी व्यवस्था से जुड़ी है। पटवारी चाहते हैं कि कृषि, राजस्व और मौसम विभाग की साझा जिला स्तरीय समितियां बनाई जाएं। ये समितियां रोज हालात की समीक्षा करेंगी।
आगे क्या होगा
जीतू पटवारी ने कहा कि अब कागजी नीतियों से काम नहीं चलेगा। उनके मुताबिक अभी संवेदनशील और तेज फैसलों की जरूरत है। उन्होंने मुख्यमंत्री से सीधे खेतों तक पहुंचने की अपील की है। पटवारी का कहना है कि किसानों को भरोसा चाहिए कि सरकार उनके साथ खड़ी है। अब देखना होगा कि सरकार इन मांगों पर क्या कदम उठाती है।
यह खबर क्यों जरूरी है
यह खबर किसानों की आजीविका और खाद्य सुरक्षा से जुड़ी है, जो संविधान में हर नागरिक के जीवन जीने के अधिकार का हिस्सा है। कम बारिश से फसल बर्बाद होने पर किसानों को समय पर राहत मिलना जरूरी है। यह सरकार की जवाबदेही और नीतिगत पारदर्शिता से भी जुड़ा मुद्दा है। जब विपक्ष कोई मांग सरकार के सामने रखता है, तो जनता को उससे अवगत होना लोकतांत्रिक प्रक्रिया का जरूरी हिस्सा है। यह खबर किसानों को उनके अधिकार समझने में मदद करती है। साथ ही यह प्रशासन को समय पर कदम उठाने के लिए प्रेरित करती है।
FAQ
- मध्य प्रदेश में अब तक कितनी कम बारिश हुई है?
प्रदेश में अब तक सामान्य से करीब 15 प्रतिशत कम बारिश दर्ज हुई है। 55 में से 28 जिलों में हालात ज्यादा खराब हैं। इन जिलों में सामान्य से 16 से 78 प्रतिशत तक कम बारिश हुई है। - जीतू पटवारी ने सीएम से किसानों के लिए क्या मांगें की हैं?
पटवारी ने 6 बड़ी मांगें रखी हैं। इनमें विशेष गिरदावरी सर्वे, पुनर्बोनी के लिए सहायता और मुफ्त बीज शामिल हैं। साथ ही डीजल-बिजली राहत पैकेज, फसल बीमा योजना में तेज सर्वे, आपातकालीन जल प्रबंधन और जिला स्तरीय निगरानी समितियां बनाने की भी मांग है। - मध्यप्रदेश के कौन से जिले कम बारिश से सबसे ज्यादा प्रभावित हैं?
अलीराजपुर, रीवा, मऊगंज, सीधी, सिंगरौली, मंडला, शहडोल, सागर, रायसेन, शिवपुरी और जबलपुर में हालात सबसे ज्यादा खराब हैं। यहां बोनी रुकी है और कई फसलें सूखने लगी हैं।
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