नेपाल ही नहीं, भारत में भी है पशुपतिनाथ धाम, जानें आठ मुख वाले शिव का रहस्य

Kaushiki | Aug 04, 2026, 16:05 IST
MP Pashupatinath Temple
मंदसौर का पशुपतिनाथ मंदिर दुनिया भर में बेहद खास माना जाता है। यहां स्थित अष्टमुखी शिवलिंग पर आठ अलग-अलग भाव उकेरे गए हैं। बारिश के समय शिवना नदी खुद गर्भगृह तक पहुंचकर शिवलिंग का जलाभिषेक करती है।

MP Pashupatinath Temple: सावन का पवित्र महीना शुरू होते ही देशभर के शिव मंदिरों में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ पड़ती है। हर कोई भगवान भोलेनाथ के दर्शन कर उनका आशीर्वाद पाना चाहता है। अगर आप इस सावन किसी अनोखे और चमत्कारिक शिव धाम के दर्शन करना चाहते हैं, तो मध्य प्रदेश का मंदसौर शहर आपका मन मोह लेगा।



मंदसौर में स्थित भगवान पशुपतिनाथ का मंदिर पूरी दुनिया में अपनी अलग पहचान रखता है। नेपाल के काठमांडू के बाद एमपी का मंदसौर ही एकमात्र ऐसा स्थान है, जहां पशुपतिनाथ का ऐसा दिव्य रूप विराजमान है। लेकिन मंदसौर की सबसे बड़ी खासियत यहां की अनोखी प्रतिमा है।



यहां स्थापित शिवलिंग कोई साधारण प्रतिमा नहीं है। यह दुनिया का एकमात्र ऐसा शिवलिंग है, जिसमें आठ मुख यानी आठ चेहरे बने हुए हैं। इस प्रतिमा को देखकर हर श्रद्धालु मंत्रमुग्ध हो जाता है। इसके साथ ही इस मंदिर से जुड़ा एक बहुत बड़ा प्राकृतिक चमत्कार भी है।



मानसून के दौरान जब शिवना नदी में जलस्तर बढ़ता है, तो नदी का जल खुद-ब-खुद मंदिर के गर्भगृह तक पहुंच जाता है। नदी का पानी भगवान शिव का जलाभिषेक करता है। आइए मंदसौर के पशुपतिनाथ मंदिर के इतिहास को विस्तार से जानें।



जानिए क्या है का 1500 साल पुराने अष्टमुखी पशुपतिनाथ मंदिर का इतिहास


अष्टमुखी शिवलिंग की अनोखी खासियत

मान्यता के मुताबिक, मंदसौर का यह मंदिर अपनी अनूठी मूर्तिकला के लिए जाना जाता है। यहां का शिवलिंग आठ मुखों वाला है जो बहुत दुर्लभ है। दुनिया में कहीं भी ऐसा विशाल अष्टमुखी शिवलिंग देखने को नहीं मिलता।



इस शिवलिंग की ऊंचाई लगभग साढ़े सात फीट से अधिक है। प्रतिमा का वजन कई टन बताया जाता है जो बेहद विशाल है। शिवलिंग को दो भागों में विभाजित करके देखा जा सकता है। ऊपरी भाग में चार मुख और निचले भाग में चार मुख हैं। यह प्रतिमा स्थापत्य कला का एक बेजोड़ और अद्भुत नमूना है।



mandsaur-pashupatinath-temple


प्रतिमा पर उकेरे गए आठ अलग भाव

शिवलिंग के आठों चेहरों पर इंसान के अलग-अलग भाव बने हैं। इन भावों में रौद्र, शांत, चिंतन और भक्ति शामिल हैं। एक मुख में भगवान शिव का बाल रूप दिखाई देता है। दूसरे मुख में उनका युवा रूप बहुत ही सुंदर दिखता है।



तीसरे मुख में उनके क्रोधित यानी रौद्र रूप के दर्शन होते हैं। चौथे मुख में वे बिल्कुल शांत और ध्यान में लीन दिखते हैं। हर चेहरे का अपना एक अलग आध्यात्मिक संदेश और महत्व है। इन आठ मुखों को भगवान शिव के आठ रूपों का प्रतीक माना जाता है।



जानिए क्या है का 1500 साल पुराने अष्टमुखी पशुपतिनाथ मंदिर का इतिहास


शिवना नदी का अनोखा प्राकृतिक चमत्कार

यह प्रसिद्ध मंदिर शिवना नदी के तट पर बना हुआ है। बारिश के दिनों में यहां एक अद्भुत नजारा देखने को मिलता है। जब शिवना नदी उफान पर होती है तो उसका जल बढ़ता है। नदी का पानी तैरता हुआ सीधे मंदिर के गर्भगृह में घुस जाता है।



जल की धारा सीधे अष्टमुखी शिवलिंग को स्पर्श करती है। स्थानीय लोग इसे नदी द्वारा किया गया जलाभिषेक मानते हैं। इस घटना को देखने के लिए हजारों श्रद्धालु यहां पहुंचते हैं। विज्ञान भी इस प्राकृतिक तालमेल को देखकर अचंभित रह जाता है।



शिवलिंग की खोज से जुड़ी गाथा

इस दिव्य शिवलिंग का इतिहास बेहद दिलचस्प और प्राचीन है। कहा जाता है कि यह प्रतिमा शिवना नदी के गर्भ में छिपी थी। मान्यता के मुताबिक, वर्षों पहले उदा नाम के एक धोबी नदी के किनारे कपड़े धोया करता था। वह जिस बड़े पत्थर पर कपड़े पटकता था, वह यह शिवलिंग ही था।



एक दिन भगवान शिव ने एक स्थानीय नागरिक को स्वप्न दिया। सपने में उन्होंने अपने इस दिव्य रूप के बारे में बताया। इसके बाद नदी से इस विशाल शिवलिंग को बाहर निकाला गया। बाद में पूरे विधि-विधान से मंदिर की स्थापना की गई।



सावन में उमड़ता है आस्था का समंदर

सावन के महीने में यहां का माहौल पूरी तरह शिवमय हो जाता है। देश के कोने-कोने से लाखों भक्त दर्शन करने मंदसौर आते हैं। सावन के हर सोमवार को यहां विशेष पूजा और आरती होती है। भक्त भगवान पशुपतिनाथ पर जल और बेलपत्र अर्पित करते हैं।



माना जाता है कि पशुपतिनाथ मंदिर मंदसौर में आने वाले हर भक्त की मनोकामना पूरी होती है। मंदिर परिसर में सुरक्षा और व्यवस्था के कड़े इंतजाम रहते हैं। सावन में यहां एक बड़ा धार्मिक मेला भी आयोजित किया जाता है।



Pashupatinath temple: नेपाल के विश्व प्रसिद्ध पशुपतिनाथ मंदिर के गर्भगृह से 10 किलो सोना गायब - pas


नेपाल पशुपतिनाथ मंदिर के बारें में

नेपाल की राजधानी काठमांडू में बागमती नदी के किनारे स्थित पशुपतिनाथ मंदिर हिंदू धर्म के सबसे पवित्र और प्राचीन शिव धामों में से एक है। यह मंदिर भगवान शिव के पशुपति (पशुओं व जीवों के स्वामी) रूप को समर्पित है और यूनेस्को की विश्व धरोहर सूची में शामिल है।



इस मंदिर का मुख्य आकर्षण यहां स्थापित पंचमुखी शिवलिंग है। इसके चार मुख चारों दिशाओं की ओर और पांचवां मुख ऊपर (आकाश) की ओर माना जाता है। पैगोडा शैली में बने इस भव्य मंदिर की छत सोने से ढकी है, और इसके कपाट केवल हिंदू धर्म के अनुयायियों के लिए ही खोले जाते हैं।



मान्यता है कि पशुपतिनाथ के दर्शन से पशु योनि से मुक्ति मिलती है। सावन के महीने और महाशिवरात्रि के पर्व पर यहां दुनिया भर से लाखों श्रद्धालु महादेव का आशीर्वाद लेने आते हैं।



डिस्क्लेमर: इस आर्टिकल में दी गई जानकारी पूरी तरह से सही या सटीक होने का हम कोई दावा नहीं करते हैं। ज्यादा और सही डिटेल्स के लिए, हमेशा उस फील्ड के एक्सपर्ट की सलाह जरूर लें।



FAQ

  1. मंदसौर के पशुपतिनाथ मंदिर की सबसे बड़ी खासियत क्या है?
    इस मंदिर की सबसे बड़ी खासियत यहाँ स्थापित अष्टमुखी (8 मुख वाला) शिवलिंग है। प्रत्येक मुख पर भगवान शिव के अलग-अलग भाव जैसे रौद्र, शांत, बाल और युवा रूप को बहुत ही सुंदरता से उकेरा गया है।
  2. मंदसौर में शिवना नदी का जलाभिषेक वाला रहस्य क्या है?
    पशुपतिनाथ मंदिर शिवना नदी के किनारे स्थित है। मानसून के मौसम में जब नदी का जलस्तर बढ़ता है, तो पानी अपने आप मंदिर के गर्भगृह तक पहुँचकर अष्टमुखी शिवलिंग का जलाभिषेक करता है।
  3. मंदसौर पशुपतिनाथ मंदिर जाने का सबसे अच्छा समय कौन सा है?
    यहां जाने का सबसे अच्छा समय सावन का महीना और महाशिवरात्रि का पर्व है। इस दौरान मंदिर में विशेष पूजा-अर्चना होती है और प्राकृतिक जलाभिषेक का अद्भुत दृश्य भी देखने को मिलता है।

ये खबरें भी पढ़ें....



पशुपतिनाथ लोक का हुआ शंखनाद, देखें विश्व के इकलौते अष्टमुखी महादेव का अद्भुत लोक



भारत ही नहीं, दुनिया के इन देशों में भी हैं प्राचीन शिव मंदिर, जानें इनका इतिहास



अगस्त में कब है शिवरात्रि, तीज और रक्षाबंधन, जानें अगस्त 2026 के व्रत त्योहार



सावन विशेष: त्रिशूल, डमरू और भस्म, जानिए शिवजी के इन प्रतीकों का अनोखा राज



Tags:
  • नेपाल पशुपतिनाथ मंदिर
  • मंदसौर
  • शिव मंदिर
  • पशुपतिनाथ मंदिर
  • सावन
  • पशुपतिनाथ मंदिर मंदसौर