खाद घोटाला; मार्कफेड ने फर्टिलाइजर कंपनियों से ऊंची कीमत पर की खाद खरीदी

Sanjay Sharma | Jul 02, 2026, 22:55 IST
Photograph: (THESOOTR)
BHOPAL. मध्य प्रदेश में मार्कफेड द्वारा ज्यादा कीमत पर खाद खरीदने का मामला सामने आया है। मार्केटिंग फेडरेशन ने राजस्थान की कंपनियों से 200 से 250 रुपए ऊंची कीमत पर NPK उर्वरक खरीदी का अंदेशा किसानों ने जताया है।

ऐसे समझें क्या है पूरा मामला...

  • मार्कफेड ने NPK 2450 रुपए में खरीदा, बाजार में 2200।
  • पड़ोसी राज्यों से 200-250 रुपए ज्यादा कीमत दी गई।
  • DAP न मिलने से किसान NPK लेने को मजबूर।
  • केदार सिरोही ने टेंडर में गड़बड़ी का अंदेशा जताया।
  • CM को पत्र लिखकर अधिकारियों पर कार्रवाई की मांग।

बीज और खाद के संकट से घिरे किसान बाजार में ऊंची कीमत चुकाने में लुट रहे हैं। ज्यादा कीमत चुकाने के बावजूद उन्हें खाद और बीज समय पर नहीं मिल पा रहे हैं।



यह लूट केवल बाजार तक ही सीमित नहीं है, सहकारी संस्थाएं भी किसानों से ज्यादा कीमत वसूलने में पीछे नहीं हैं। मध्य प्रदेश स्टेट कोऑपरेटिव मार्केटिंग फेडरेशन द्वारा बाजार से अधिक कीमत पर एनपीके जैसे उर्वरक खरीदने का मामला सामने आया है। जबकि फर्टिलाइजर कंपनियों के यही उर्वरक पड़ोसी राज्यों में 200 से 250 रुपए कम कीमत में उपलब्ध हैं।



किसान नेता केदार सिरोही ने मार्कफेड द्वारा उर्वरक खरीदी के टेंडर में गड़बड़ी का अंदेशा जताया है। ज्यादा कीमत पर उर्वरक खरीदी की जांच के लिए मुख्यमंत्री डॉ.मोहन यादव को पत्र भी लिखा है।



डीएपी की कमी से बढ़ी एनपीके की मांग

खरीफ सीजन की फसलों के लिए खाद का संकट किसानों को परेशान कर रहा है। कई दिनों तक भटकने के बाद भी ज्यादातर किसानों को डीएपी उपलब्ध ही नहीं हो सका।



मजबूरी में उन्हें एनपीके जैसे वैकल्पिक उर्वरक के साथ बुआई करनी पड़ी। वहीं अब भी किसान सहकारी समितियों से लेकर बाजार की दुकानों तक खाद के लिए चक्कर लगा रहे हैं।



डीएपी उपलब्ध न होने से वैकल्पिक उपर्वरकों की कालाबाजारी हो रही है और कीमतें भी उछल गई हैं। बाजार में खाद खरीदी में लुट रहे किसानों को सहकारी समितियों से भी राहत नहीं मिल रही है। वजह है मार्कफेड द्वारा फर्टिलाइजर कंपनियों से ऊंची कीमत पर की गई खरीदी।



ऊंची दर पर टेंडर जारी करने का अंदेशा

मध्य प्रदेश स्टेट कोऑपरेटिव मार्केटिंग फेडरेशन यानी मार्कफेड द्वारा खाद की खरीदी की जाती है। इसके लिए मार्कफेड द्वारा टेंडर जारी किए जाते हैं।



टेंडर की तय दर के आधार पर खरीदा गया यही खाद सहकारी समितियों को उपलब्ध कराया जाता है। मार्कफेड द्वारा ऊंची कीमत पर उर्वरक खरीदने का अंदेशा जताया है। उनका कहना है डीएपी की कमी के चलते एनपीके की मांग ज्यादा है।



मार्कफेड ने राजस्थान की दो कंपनियों से एनपीके उर्वरक खरीदी का करार किया है। इसके लिए टेंडर में उर्वरक की दर काफी ऊंची रखी गई है। यह दर मध्य प्रदेश के पड़ोसी राज्यों से 200 से 250 रुपए ज्यादा है।



कंपनियों को फायदा पहुंचाने की शिकायत

किसान नेता केदार सिरोही के अनुसार मार्कफेड द्वारा चंबल और ओस्टवाल फर्टिलाइजर से NPK उर्वरक खरीदा है। इन कंपनियों से खरीदे गए NPK 12:32:16 और 10:26:26 की खरीद और विक्रय दर दूसरे राज्यों के मुकाबले में काफी ज्यादा है।



इनकी प्रति बैग 2450 रुपए कीमत (MRP) पर खरीदे गए हैं। जबकि बाजार में समान गुणवत्ता वाले उर्वरक 2150 से 2200 रुपए की दर पर बेचे जा रहे हैं।



इस अधिक कीमत का भार उन किसानों पर पड़ रहा है जो पहले ही मंहगा बीज खरीदकर लूट का शिकार हो चुके हैं। उन्होंने सोशल मीडिया पर भी इसको लेकर पोस्ट किया है। जिसके बाद किसान संगठन भी खाद खरीदी में गड़बड़ी का अंदेशा जताकर जांच की मांग कर रहे हैं।



सीएम चिट्ठी लिखकर जांच की मांग

मार्कफेड की अधिक कीमत पर की गई खरीदी के पीछे भारी कमीशनखोरी का अंदेशा किसान नेता ने जताया है। उनका कहना है मार्कफेड के अधिकारियों द्वारा बाजार से भी अधिक दर पर खरीदी कर कंपनियों को फायदा पहुंचाया गया है। इसका सीधा असर किसानों पर पड़ रहा है।



केदार सिरोही ने सीएम डॉ.मोहन यादव को पत्र लिखकर इसकी शिकायत की है। उन्होंने खाद खरीदी के टेंडर की जांच की मांग की है। उनका कहना है सरकार को पुष्टि करनी चाहिए कि क्या मार्कफेड द्वारा 2450 रुपए प्रति बैग की दर से खरीदी की गई है या नहीं। यदि ऐसा किया गया है तो अन्य राज्यों से अधिक दर पर खाद खरीदी की वजह क्या रही।



क्या अधिकारियों ने टेंडर की प्रक्रिया के दौरान वित्तीय नियमों का पालन किया या नहीं। इस खरीदी से सरकार पर तो आर्थिक भार नहीं आया है। उन्होंने पत्र के माध्यम से खाद खरीदी में अनियमितता की जांच में जिम्मेदार पाए जाने वाले अधिकारियों पर कड़ी कार्रवाई की मांग भी की है।


ही है।



FAQ

  1. मार्कफेड की खाद खरीदी से किसान कैसे प्रभावित हुए?
    मार्कफेड ने NPK उर्वरक (NPK Fertilizer) 2450 रुपए में खरीदा। बाजार में यही 2150-2200 रुपए का है। पड़ोसी राज्यों से 250 रुपए महंगा है। इससे सहकारी समितियों में भी कीमत बढ़ी। किसान पहले ही बीज-खाद संकट से जूझ रहे। अब उन पर अतिरिक्त आर्थिक भार पड़ा।
  2. किसान नेता केदार सिरोही ने CM को पत्र में क्या मांग की है?
    केदार सिरोही ने CM डॉ मोहन यादव को पत्र लिखा। मार्कफेड टेंडर में गड़बड़ी का आरोप लगाया। 2450 रुपए की खरीदी की पुष्टि मांगी। अन्य राज्यों से महंगा खरीदने का कारण पूछा। वित्तीय नियमों के पालन की जांच मांगी। दोषी अधिकारियों पर कड़ी कार्रवाई की मांग की है।
  3. DAP संकट के बीच NPK उर्वरक की कीमत क्यों बढ़ी है?
    DAP न मिलने से किसान NPK लेने को मजबूर हैं। मांग बढ़ने से कालाबाजारी शुरू हो गई। मार्कफेड ने भी 2450 रुपए में महंगा खरीदा। बाजार दर 2200 रुपए है। टेंडर में गड़बड़ी से कीमत और बढ़ी। इससे किसान बीज-खाद संकट में और लुट रहे हैं।

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