मध्य प्रदेश में खसरा बेकाबू, बालाघाट में 26 बच्चों की मौत, 8 महीने में 1450 से ज्यादा मरीज

Aman Vaishnav | Aug 30, 2026, 14:10 IST
मध्य प्रदेश में खसरा बेकाबू
मध्य प्रदेश के बालाघाट में खसरा, मलेरिया और कुपोषण से 26 बच्चों की मौत हो चुकी है। इस साल शुरुआती 8 महीनों में ही खसरे के 1,450 से ज्यादा मरीज मिल चुके हैं। वहीं प्रदेश में खसरे के मामले 1450 के पार पहुंच गए हैं।

समझें क्या है पूरा मामला...

  • बालाघाट में खसरा, मलेरिया और कुपोषण के मिले-जुले असर से 26 बच्चों की मौत हो गई।
  • पिछले साल पूरे मध्य प्रदेश में खसरे के 1,800 मरीज मिले थे।
  • इस साल सिर्फ आठ महीने में ही यह आंकड़ा 1,450 पार कर गया है।
  • यही रफ्तार रही तो साल के अंत तक मरीजों की संख्या ढाई हजार तक पहुंच सकती है।
  • भिंड, शिवपुरी और ग्वालियर में भी मरीजों की संख्या तेजी से बढ़ रही है।

बालाघाट के गांवों में बीते कुछ महीनों से बुखार और शरीर पर लाल चकत्तों की शिकायतें बढ़ी थीं। धीरे-धीरे यह बीमारी गंभीर रूप लेती गई। जानकारी के अनुसार अब तक जिले में 26 बच्चों की जान जा चुकी है। स्वास्थ्य विभाग की टीमें अलर्ट पर हैं।



कहां कितने मरीज मिले

जुलाई से अगस्त के बीच बालाघाट में 40 से ज्यादा संक्रमित मरीज मिले हैं। वहीं सबसे ज्यादा मामले भिंड जिले से सामने आए हैं। यहां अब तक 125 मरीज मिल चुके हैं। शिवपुरी और ग्वालियर में भी करीब 90-90 मरीज दर्ज किए गए हैं।



खसरे के ज्यादातर मामले गर्मी के मौसम में सामने आते हैं। सितंबर से संक्रमण की दूसरी लहर शुरू होती है। हालांकि इसकी तीव्रता गर्मी जितनी नहीं होती। लोगों को जागरूक करने के लिए हर साल 16 मार्च को खसरा दिवस मनाया जाता है।



तेजी से क्यों बढ़ रहा संक्रमण

पूर्व राज्य टीकाकरण अधिकारी डॉक्टर संतोष शुक्ला के मुताबिक खसरे का संक्रमण हर चौथे साल बढ़ता है। यह पैटर्न सालों से देखा जा रहा है। उनका कहना है कि यह ठीक वैसा ही है जैसे आम की बौर हर चौथे साल ज्यादा आती है।



दोनों घटनाओं का आपस में कोई सीधा संबंध नहीं है लेकिन दोनों का समय लगभग एक साथ ही आता रहा है। साल 2022 में भी खसरे के मामले बढ़े थे। अब 2026 में एक बार फिर मामलों में तेजी देखी जा रही है।



कितना खतरनाक है खसरा

शिशु रोग विशेषज्ञों के मुताबिक एक खसरा रोगी से 20 अन्य लोग संक्रमित हो सकते हैं। इसे रोकने का सबसे कारगर तरीका है बीमारी की तुरंत पहचान करना।



पहला मामला सामने आते ही सीएमएचओ को सूचना दी जानी चाहिए। इसके 24 घंटे के भीतर संक्रमण रोकने की ठोस रणनीति बन जानी चाहिए।



खसरे में सर्दी-जुकाम और तेज बुखार के साथ शरीर पर लाल चकत्ते निकलते हैं। समय पर इलाज न मिलने पर 30 प्रतिशत तक मरीजों की जान जाने का खतरा रहता है। खसरे के कारण बच्चों में कुपोषण सहित कई और जटिलताएं भी पैदा हो सकती हैं।



बचाव के लिए क्या करें

डॉक्टर पंकज शुक्ला, शिशु रोग विशेषज्ञ और पूर्व डायरेक्टर, एनएचएम (NHM – National Health Mission) कहते हैं कि खसरे से बचने का सबसे कारगर उपाय टीकाकरण है। उनके मुताबिक फील्ड सर्वे कराकर यह पता लगाया जाना चाहिए कि किन बच्चों को अब तक टीका नहीं लगा है। इसके बाद उसी हिसाब से विशेष टीकाकरण अभियान चलाया जाना चाहिए।



स्वास्थ्य विभाग की टीमें अब प्रभावित जिलों में सर्वे तेज कर रही हैं। स्थानीय प्रशासन ने अभिभावकों से भी अपील की है कि बच्चों में लक्षण दिखते ही तुरंत नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र जाएं। समय पर इलाज ही जान बचाने का सबसे बड़ा जरिया है।



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