मेधावी योजना में MBBS भी शामिल, गांव में 5 साल डॉक्टरी सेवा पर पूरा लोन होगा माफ
समझें क्या है पूरा मामला...
- मध्य प्रदेश सरकार ने मेधावी विद्यार्थी योजना में बड़ा बदलाव किया है।
- अब एमबीबीएस की पढ़ाई भी इस योजना में शामिल कर ली गई है।
- तकनीकी शिक्षा विभाग ने इसके लिए संशोधित आदेश जारी किया है।
- पात्र विद्यार्थियों को शासकीय मेडिकल कॉलेजों की फीस के बराबर राशि मिलेगी।
- बाकी राशि ब्याजमुक्त ऋण के रूप में दी जाएगी, जिसे ग्रामीण सेवा देकर माफ कराया जा सकेगा।
योजना में क्या बदला
मध्य प्रदेश शासन के तकनीकी शिक्षा, कौशल विकास विभाग एवं रोजगार विभाग ने मुख्यमंत्री मेधावी विद्यार्थी योजनाको लेकर नया आदेश जारी किया है। इस आदेश में साफ किया गया है कि अब एमबीबीएस पाठ्यक्रम को भी योजना के दायरे में लाया गया है। पहले यह सुविधा सीमित पाठ्यक्रमों तक ही थी।
यह नई व्यवस्था इसी शैक्षणिक सत्र से लागू होगी। यानी इस साल एडमिशन लेने वाले छात्र-छात्राओं को इसका सीधा फायदा मिल सकेगा।
फीस प्रतिपूर्ति की व्यवस्था
सरकार अब पात्र विद्यार्थियों को एमबीबीएस की फीस में राहत देगी। मध्य प्रदेश के शासकीय चिकित्सा महाविद्यालयों की जो अधिकतम फीस तय है, उतनी राशि सरकार सीधे प्रतिपूर्ति करेगी। यह राशि विद्यार्थी को खुद जमा नहीं करनी होगी।
वहीं अगर फीस इससे ज्यादा है तो बाकी राशि के लिए विद्यार्थी को ब्याजमुक्त ऋण दिया जाएगा। यह ऋण पढ़ाई पूरी होने के बाद चुकाना होगा।
ऋण माफी के नियम
इस ऋण को माफ कराने के लिए एक शर्त रखी गई है। पढ़ाई पूरी करने के बाद विद्यार्थी को मध्य प्रदेश के तय ग्रामीण क्षेत्रों में सेवा देनी होगी।
अगर विद्यार्थी ढाई साल तक ग्रामीण क्षेत्र में सेवा देता है, तो आधा यानी 50 प्रतिशत ऋण माफ हो जाएगा। पूरे पांच साल सेवा देने पर बचा हुआ पूरा ऋण भी माफ कर दिया जाएगा।
इस तरह सरकार का मकसद है कि ग्रामीण क्षेत्रों में डॉक्टरों की कमी को भी दूर किया जा सके।
पात्रता की मुख्य शर्तें
एमबीबीएस में इस योजना का लाभ लेने के लिए नीट परीक्षा में ऑल इंडिया रैंक डेढ़ लाख के भीतर होनी चाहिए। इससे ज्यादा रैंक वाले छात्र इस विशेष सुविधा के दायरे में नहीं आएंगे।
इसके अलावा सामान्य पात्रता की शर्तें भी लागू रहेंगी। विद्यार्थी का मूल निवासी मध्य प्रदेश का होना जरूरी है। साथ ही माता-पिता की सालाना आय 8 लाख रुपये से कम होनी चाहिए।
12वीं कक्षा के अंकों को लेकर भी शर्त तय है। एमपी बोर्ड से पढ़ाई करने वालों को कम से कम 70 प्रतिशत अंक चाहिए। वहीं सीबीएसई या आईसीएसई बोर्ड के छात्रों के लिए यह सीमा 85 प्रतिशत रखी गई है।
इन कोर्स को भी मिलेगा फायदा
सिर्फ एमबीबीएस ही नहीं, इस योजना में कई और पाठ्यक्रम भी शामिल हैं। इंजीनियरिंग, विधि, स्नातक, इंटीग्रेटेड स्नातकोत्तर और पॉलिटेक्निक डिप्लोमा जैसे कोर्स भी इसमें आते हैं।
यानी अलग-अलग क्षेत्रों में पढ़ाई करने वाले विद्यार्थी भी इस योजना का लाभ ले सकते हैं।
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