एमपी के निजी मेडिकल कॉलेजों में लौट सकता है मैनेजमेंट कोटा
समझें क्या है पूरा मामला
- मध्य प्रदेश में मेडिकल कॉलेजों के प्रवेश नियम बदलने की तैयारी है।
- निजी मेडिकल कॉलेजों मेंमैनेजमेंट कोटा दोबारा लागू किया जा सकता है।
- आठ साल बाद 30 प्रतिशत सीटें इस कोटे में रखी जा सकती हैं।
- मध्यप्रदेश सरकार मेडिकल एजुकेशन एडमिशन रूल्स में बदलाव करने जा रही है।
- अब नए मेडिकल प्रवेश नियम 2026 तैयार किए जा रहे हैं।
क्या बदलने जा रहा है
मध्यप्रदेश के निजी मेडिकल कॉलेजों में मैनेजमेंट कोटा (Management Quota Admission) लौटाने की तैयारी चल रही है। प्रस्तावित नियमों में 30 प्रतिशत सीटें इस कोटे में रखी जा सकती हैं। हालांकि नियमों को अभी अंतिम मंजूरी नहीं मिली है। फीस, सीटों के अनुपात और लागू होने की तारीख पर अंतिम फैसला बाकी है।
सूत्रों के मुताबिक भविष्य में मैनेजमेंट कोटा 35 प्रतिशत तक बढ़ाया जा सकता है। हालांकि इस संबंध में अभी अंतिम फैसला नहीं हुआ है।नियमों का मसौदा पहले राज्य मंत्रिमंडल के सामने रखा जाएगा। आवश्यक मंजूरी के बाद इसे आगे की प्रक्रिया में भेजा जाएगा।
क्यों लिया जा रहा फैसला
सरकार के इस प्रस्ताव के पीछे आर्थिक कारण भी बताए जा रहे हैं। मेधावी छात्रों और आरक्षित वर्ग के विद्यार्थियों की फीस पर बड़ा खर्च होता है।एससी, एसटी और ओबीसी विद्यार्थियों की फीस सहायता पर सालाना करीब 1,500 करोड़ रुपए खर्च होने का दावा है। यह राशि छात्रवृत्ति और फीस प्रतिपूर्ति के रूप में दी जाती है।
मैनेजमेंट और एनआरआई कोटे (NRI Quota) की सीटों पर सरकार को फीस नहीं देनी होगी। इससे करीब 1,000 करोड़ रुपए बचने का अनुमान लगाया जा रहा है।हालांकि इन आंकड़ों की आधिकारिक पुष्टि अभी सामने नहीं आई है।
निजी मेडिकल कॉलेजों में कई सीटें काउंसिलिंग के बाद भी खाली रह जाती हैं। सरकार का मानना है कि नए नियमों से खाली सीटों की संख्या घट सकती है।
तमिलनाडु-राजस्थान मॉडल
मध्यप्रदेश का चिकित्सा शिक्षा विभाग तमिलनाडु और राजस्थान के मॉडल का अध्ययन (Tamil Nadu-Rajasthan Model) कर रहा है। दोनों राज्यों में निजी मेडिकल कॉलेजों की कुछ सीटें मैनेजमेंट कोटे में रखी जाती हैं।प्रस्तावित व्यवस्था में प्रवेश नीट मेरिट और राज्य स्तरीय काउंसिलिंग से ही होगा। नीट उत्तीर्ण किए बिना मेडिकल कॉलेज में प्रवेश नहीं मिल सकेगा।
मध्यप्रदेश में भी इसी प्रक्रिया के आधार पर व्यवस्था बनाने की तैयारी है।
फीस में कितना अंतर होगा
मैनेजमेंट कोटे की फीस सामान्य कोटे की फीस से अधिक रहने की संभावना है। तमिलनाडु और राजस्थान में ऐसी सीटों की फीस काफी ज्यादा है।कॉपी में उपलब्ध जानकारी के अनुसार तमिलनाडु में सालाना फीस 40 से 56 लाख रुपए तक है। राजस्थान में यह फीस करीब 28 से 30 लाख रुपए सालाना बताई गई है।
मध्यप्रदेश में मैनेजमेंट कोटे की फीस सामान्य सीटों से तीन गुना तक हो सकती है। हालांकि अंतिम फीस अभी तय नहीं हुई है।फीस का निर्धारण प्रवेश एवं शुल्क विनियामक समिति करेगी। अन्य संबंधित नियामक संस्थाओं की भी इसमें भूमिका हो सकती है।
इस फैसले का सीधा असर मैनेजमेंट कोटे से प्रवेश लेने वाले छात्रों पर पड़ेगा। इससे अधिक फीस देने में सक्षम विद्यार्थियों को अतिरिक्त अवसर मिल सकता है।
आगे की प्रक्रिया क्या है
संशोधित प्रवेश नियमों का मसौदा अभी तैयार किया जा रहा है। इसे लागू करने से पहले आवश्यक सरकारी मंजूरी लेनी होगी।मसौदे को पहले मंत्रिमंडल के सामने रखा जा सकता है। इसके बाद नियमानुसार आगे की प्रक्रिया पूरी की जाएगी।सभी औपचारिक मंजूरियां मिलने के बाद ही नए नियम लागू होंगे।
इस मामले में अधिकारियों ने फिलहाल टिप्पणी करने से इनकार किया है। डीएमई अरुणा कुमार और अतिरिक्त मुख्य सचिव अशोक बर्णवाल ने कोई बयान नहीं दिया है।ऐसे में प्रस्ताव से संबंधित जानकारी अभी सूत्रों पर आधारित है।
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