एमपी में 7400 से ज्यादा मेधावी छात्रों को मिली स्कूटी, CM मोहन ने भी की सवारी
भोपाल में आज 19 सितंबर को मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की मौजूदगी में मुख्यमंत्री स्कूटी योजना का कार्यक्रम हुआ। इस दौरान सीएम के साथ मंत्री राव उदय प्रताप सिंह और मंत्री कृष्णा गौर मौजूद रहे।
कार्यक्रम में प्रदेश के 7 हजार 400 से ज्यादा मेधावी विद्यार्थियों को ई-स्कूटी और मोटराइज्ड वाहन की सौगात दी गई। मुख्यमंत्री ने पात्र विद्यार्थियों के बैंक खातों में वाहन खरीदने के लिए राशि ट्रांसफर की।
वहीं मंच पर 10 से 12 विद्यार्थियों को सांकेतिक तौर पर स्कूटी की चाबी भी दी गई। इसके बाद बाकी पात्र विद्यार्थियों के खातों में भी राशि पहुंचाई गई।
वहीं सीएम मोहन यादव भी एक छात्रा के साथ स्कूटी पर पीछे बैठकर कुछ दूर चले।
इस बार बदले हैं स्कूटी योजना के नियम
योजना का लाभ केवल स्कूल टॉपर छात्रों को मिलता है। छात्र को अपने स्कूल में प्रथम स्थान लाना जरूरी है। साथ ही 12वीं में 70 प्रतिशत अंक भी जरूरी हैं। यह शर्त इस साल पहली बार जोड़ी गई है। पहले सिर्फ स्कूल टॉप करना काफी था।
छात्र को सरकारी हायर सेकंडरी स्कूल का नियमित विद्यार्थी होना चाहिए। परीक्षा पहले ही प्रयास में पास करनी जरूरी है। सभी संकायों के छात्र इसमें शामिल हो सकते हैं। जुलाई 2026 के आदेश में योजना को 2030-31 तक बढ़ाया गया। इसके लिए सरकार ने 495 करोड़ रुपए मंजूर किए हैं।
कितनी मिलती है राशि
पेट्रोल वाहन चुनने पर छात्र को 90 हजार रुपए तक मिलते हैं। ई-स्कूटी के लिए यह राशि 1 लाख 20 हजार रुपए तक जाती है। इस राशि में वाहन की कीमत शामिल रहती है। रजिस्ट्रेशन, इंश्योरेंस और दो हेलमेट का खर्च भी इसी में आता है। जरूरी एसेसरीज का खर्च भी सरकार उठाती है।
पहले कोटेशन, फिर पैसा
छात्र को पहले शोरूम जाकर वाहन पसंद करना होता है। इसके बाद डीलर से कोटेशन लिया जाता है। यह कोटेशन स्कूल के प्राचार्य को देना होता है। प्राचार्य इसे जिला शिक्षा अधिकारी को भेजते हैं। इसके बाद राशि जारी करने की प्रक्रिया शुरू होती है।
नियम साफ है, राशि आने के बाद ही वाहन खरीदा जा सकता है। पहले वाहन खरीदने पर कार्रवाई हो सकती है। ऐसे में छात्र, पालक और DEO तीनों जिम्मेदार माने जाते हैं। इसलिए अधिकारियों को सख्त निगरानी के निर्देश हैं। मोटर बाइक जैसे वाहन इस योजना में शामिल नहीं हैं।
पैसा सीधे खाते में
स्वीकृत राशि सीधे छात्र के बैंक खाते में जाती है। अगर छात्र का खाता नहीं है तो राशि पालक को मिलती है। खाते से आधार नंबर जोड़ा जाना जरूरी है। पासबुक में खाता नंबर और IFSC कोड साफ दिखना चाहिए।
रजिस्ट्रेशन और इंश्योरेंस की राशि सीधे डीलर के खाते में जाती है। इससे छात्रों को अलग से भागदौड़ नहीं करनी पड़ती। पूरी प्रक्रिया विभागीय पोर्टल पर भी दर्ज होती है।
तीन साल नहीं बेच सकेंगे
वहीं मिली हुई स्कूटी छात्र तुरंत बेच नहीं सकते। तीन साल तक इसे किसी और को ट्रांसफर करना भी मना है। इसके लिए रजिस्ट्रेशन के समय खास प्रक्रिया अपनाई जाती है। तीन साल तक सरकार के नाम हाइपोथिकेशन दर्ज रहता है। यानी वाहन की RC में सरकार का हित भी दर्ज रहता है।
निगरानी करेगी समिति
पूरी प्रक्रिया पर नजर रखने के लिए एक समिति बनाई गई है। इसकी अध्यक्षता जिला कलेक्टर करते हैं। समिति में परिवहन अधिकारी और कोषालय अधिकारी भी शामिल रहते हैं। DEO इस समिति के सदस्य सचिव होते हैं। समिति वाहन चयन से वितरण तक हर चरण देखती है।
अब तक 23 हजार को लाभ
मुख्यमंत्री स्कूटी योजना नई नहीं है। अब तक प्रदेश के 23 हजार से ज्यादा छात्र इसका लाभ ले चुके हैं। इस पर सरकार अब तक करीब 246 करोड़ रुपए खर्च कर चुकी है। फ्री स्कूटी योजनाका मकसद मेधावी छात्रों को आगे पढ़ाई के लिए प्रोत्साहित करना है।
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