MP Metro ToLet: एक साल में ही हश्र देखिए, अफसर अपनी नाकामी को पहल बता रहे, इसे नाम दिया... सेलिब्रेशन ऑन व्हील्स

Sanjay Dhiman | May 06, 2026, 16:49 IST
Photograph: (the sootr)
मध्यप्रदेश में मेट्रो प्रोजेक्ट की शुरुआत तो बड़े सपने के साथ हुई थी, लेकिन अब ये मेट्रो अफसरशाही की लापरवाही और खर्चों का प्रतीक बन गई है। मेट्रो में कम यात्री मिलने के बाद इसे सेलिब्रेशन ऑन व्हील्स के रूप में किराए पर देना शुरू कर दिया गया है।

मध्यप्रदेश में मेट्रो रेल प्रोजेक्ट जिस उम्मीद और सपने के साथ शुरू किया गया था, आज वही प्रोजेक्ट अफसरशाही की लापरवाही व जल्दबाजी का जीता-जागता उदाहरण बन गया है। करीब 22,000 करोड़ रुपए की लागत से इंदौर और भोपाल में खड़ी की गई मेट्रो अब विकास का प्रतीक कम और सरकारी नाकामी का तमाशा ज्यादा नजर आने लगी है।



हैरानी की बात यह है कि जिस मेट्रो को आम जनता की सुविधा, ट्रैफिक कम करने और शहरों को आधुनिक बनाने के लिए लाया गया था, उसमें यात्री ही नहीं मिल रहे। करोड़ों रुपए खर्च करने के बाद भी यदि ट्रेन खाली दौड़ रही है तो सवाल उठना लाजिमी है कि क्या इस प्रोजेक्ट की प्लानिंग सिर्फ कागजों पर हुई थी? क्या जमीन पर हकीकत को समझने की जरूरत ही महसूस नहीं की गई?



अब स्थिति इतनी अजीब हो गई है कि अफसरों ने नाकामी को छुपाने मेट्रो को सेलिब्रेशन ऑन व्हील बना दिया है। यानी जिस ट्रेन में लोगों को रोज सफर करना चाहिए था, उसे बर्थडे पार्टी, किटी पार्टी और फिल्म शूटिंग के लिए किराए पर दिया जा रहा है। पैसे दो और मेट्रो में जश्न मनाओ...यह नया मॉडल तैयार कर दिया गया है।



एक नजर में इंदौर-भोपाल मेट्रो प्रोजेक्ट

इंदौर मेट्रो प्रोजेक्ट

  • 12,000 करोड़ लागत
  • शुभारंभ: 31 मई 2025
  • इंदौर में 6.3 किलोमीटर के दायरे में मेट्रो ट्रेन का संचालन हो रहा है। गांधीनगर, सुपर कॉरिडोर स्टेशन- 5, 6, 4 और 3 में मेट्रो चल रही है।
  • 08 लाख के आसपास खर्च होते हैं एक दिन मेट्रो चलाने में

भोपाल मेट्रो प्रोजेक्ट

  • 10,000 करोड़ लागत
  • शुभारंभ: 20 दिसंबर 2025
  • मेट्रो 6 किमी में दौड़ रही है। सुभाष नगर, केवी, डीबी मॉल, एमपी नगर, कमलापति, डीआरएम ऑफिस, अलकापुरी और एम्स 8 स्टेशन हैं।
  • 15 से 20 हजार ही इनकम हो रही है अभी मेट्रो ट्रेन से कुल
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मेट्रो ट्रेन होगी अब 'पार्टी' का नया अड्डा!

इंदौर और भोपाल की मेट्रो पर 22 हजार करोड़ से ज्यादा खर्च हुआ है, लेकिन यात्रियों की संख्या काफी कम है। इसी वजह से अब मेट्रो को किराए पर देने का फैसला लिया गया है। अब मेट्रो में लोग प्री-वेडिंग शूट, बर्थडे पार्टी, किटी पार्टी और अन्य छोटे-बड़े आयोजन कर सकेंगे। इसके लिए प्रति घंटे 5 हजार से 7 हजार रुपए तक किराया देना होगा। बुकिंग 15 दिन पहले करानी होगी। नियमों का पालन करना होगा।



सेलिब्रेशन के दौरान कुछ सख्त नियम भी लागू रहेंगे। मेट्रो में शराब, बीड़ी-सिगरेट और पटाखे ले जाना पूरी तरह से प्रतिबंधित रहेगा। स्टेशन पर प्रवेश से पहले सभी लोगों की जांच की जाएगी।



5 मई से शुरू हुई योजना

यह सुविधा 5 मई से शुरू कर दी गई है। मध्य प्रदेश मेट्रो रेल कॉर्पोरेशन लिमिटेड (MPMRCL) ने इस योजना को सेलिब्रेशन ऑन व्हील्स नाम दिया है। इसके तहत स्टेशन पर खड़ी मेट्रो कोच के लिए 5 हजार रुपए प्रति घंटा और चलती मेट्रो के लिए 7 हजार रुपए प्रति घंटा किराया तय किया गया है। एक बार में अधिकतम 50 लोग शामिल हो सकेंगे। साथ ही 20 हजार रुपए की सुरक्षा राशि जमा करनी होगी, जो बाद में वापस कर दी जाएगी।



मेट्रो में बर्थडे पार्टी, प्री-वेडिंग शूट, किटी पार्टी के अलावा फिल्म, वेब सीरीज, डॉक्यूमेंट्री और विज्ञापन की शूटिंग भी की जा सकेगी।



एमपीएमआरसीएल के प्रबंध संचालक एस. कृष्ण चैतन्य के अनुसार, यह पहल शहरों की बदलती लाइफस्टाइल और लोगों की जरूरतों को ध्यान में रखकर शुरू की गई है, ताकि मेट्रो आम लोगों के और करीब आ सके।



प्रोजेक्ट की विफलता के दो बड़े कारण...

मेट्रो सफल तब होती है, जब घर से स्टेशन तक आना-जाना आसान हो। भोपाल-इंदौर में कोई समर्पित फीडर बस सेवा, ई-रिक्शा नेटवर्क या पार्किंग नहीं बनाई गई। नतीजा यह है कि लोग बाइक से स्टेशन जाते हैं, लेकिन फिर मेट्रो से क्यों जाएं, जब बाइक आगे तक ले जा सकती है। एक्सपर्ट ने कहा कि मेट्रो को इंटीग्रेटेड अर्बन ट्रांसपोर्ट सिस्टम से जोड़ना जरूरी है, बिना इसके यात्री नहीं मिलेंगे।



भोपाल-इंदौर में बाइक और कार की पहुंच घर-घर है। सड़कें अपेक्षाकृत चौड़ी हैं और ट्रैफिक दिल्ली जैसा भयावह नहीं। ऐसे में लोगों के पास मेट्रो छोड़ने का विकल्प है। मेट्रो की ट्रेन फ्रीक्वेंसी 30-75 मिनट तक पहुंच गई है। यानी लोग 1 घंटा इंतजार नहीं करेंगे, जब बाइक तुरंत है। आम आदमी मेट्रो से कनेक्ट ही नहीं कर पा रहा है।



लोगों ने सोशल मीडिया पर तंज कसा...

Palash Surjan ने कहा, हाथी खरीद लिया है तो पालने के लिए कुछ न कुछ तो करना पड़ेगा।



Faizan Khan ने लिखा, वैसे भी पैसेंजर तो मिल नहीं रहे मेट्रो को, खर्चा पानी तो निकालेंगे अब कैसे भी करके।



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