मध्यप्रदेश के गांवों में विकास की रफ्तार थमी! मनरेगा का भुगतान अटका, नई योजना के बीच पुराने काम अटके
एक तरफ पुराने कामों का बकाया भुगतान करना है। दूसरी तरफ नए कामों को भी जारी रखना है।
ग्रामीण विकास कार्यों पर भुगतान में देरी का असर
मध्यप्रदेश की कुछ ग्राम पंचायतों में निर्माण सामग्री का पैसा अटकने से विकास कार्यों की रफ्तार धीमी पड़ रही है। रिपोर्ट के मुताबिक, मनरेगा के तहत हुए कामों के लिए केंद्र सरकार से मिलने वाली कुछ राशि अभी बाकी है। भुगतान नहीं मिलने से कुछ पंचायतों में सप्लायरों ने निर्माण सामग्री देना बंद कर दिया है। इससे मकान बनाने और गांवों में चल रहे दूसरे निर्माण कार्य समय पर पूरे होने में दिक्कत आ सकती है।
हालांकि, विभाग के अधिकारियों का कहना है कि पूरे प्रदेश में काम प्रभावित नहीं हुए हैं। बकाया राशि जारी कराने के लिए केंद्र सरकार से बातचीत चल रही है।
मनरेगा की जगह वीबी-जीरामजी योजना लागू
मध्यप्रदेश में एक जुलाई 2026 से मनरेगा की जगह नई वीबी-जीरामजी योजना लागू हो गई है। इसका पूरा नाम विकसित भारत रोजगार एवं आजीविका मिशन की गारंटी (ग्रामीण) है। नई योजना में केंद्र सरकार 60 फीसदी और राज्य सरकार 40 फीसदी पैसा देगी। यानी अब राज्य सरकार को पहले से ज्यादा खर्च करना होगा।
इस योजना में ग्रामीण परिवारों को साल में 125 दिन रोजगार देने की गारंटी है। वहीं, मनरेगा के तहत पहले से चल रहे कामों को भी पूरा करना होगा। इसके साथ ही नई योजना के तहत ग्रामीणों को रोजगार देने की प्रक्रिया भी जारी है।
छह लाख से अधिक निर्माण कार्य प्रगति पर
विभाग के मुताबिक, मध्यप्रदेश में मनरेगा के तहत छह लाख से ज्यादा काम अभी चल रहे हैं। इनमें करीब आधे काम सरकारी आवास योजनाओं से जुड़े हैं। इन कामों को पूरा करने के लिए मजदूरों की मजदूरी और निर्माण सामग्री का पैसा समय पर मिलना जरूरी है।
हालांकि, कुछ जगहों पर निर्माण सामग्री की सप्लाई रुकने से काम पूरा होने में देरी हो सकती है। फिलहाल यह साफ नहीं है कि प्रदेश में कितने काम तय समय से पीछे चल रहे हैं। उपलब्ध रिपोर्ट में इसकी जिलेवार जानकारी नहीं दी गई है।
सामग्री भुगतान लंबित, मजदूरी जारी
रिपोर्ट के मुताबिक, मनरेगा में मजदूरों की मजदूरी और निर्माण सामग्री के भुगतान की स्थिति अलग-अलग है। अधिकारियों का कहना है कि केंद्र और राज्य सरकार से मिल रही राशि से मजदूरों को भुगतान किया जा रहा है। हालांकि, निर्माण सामग्री का पैसा अभी अटका हुआ है। इससे सप्लायरों को भुगतान नहीं हो पा रहा है।
बकाया पैसा नहीं मिलने से कुछ ग्राम पंचायतों में सप्लायरों ने आगे निर्माण सामग्री देने से मना कर दिया है। ऐसे में पहले से मंजूर निर्माण कार्यों की रफ्तार धीमी पड़ सकती है।
नई योजना के 40 हजार कार्यों की आईडी तैयार
वीबी-जीरामजी योजना के तहत मध्यप्रदेश में करीब 40 हजार नए कामों की आईडी तैयार हो गई है। अधिकारियों के मुताबिक, इन सभी कामों को मंजूरी भी मिल चुकी है। अब गांवों में रोजगार देने और नए निर्माण कार्य शुरू करने की तैयारी है।
वहीं, मनरेगा के तहत पहले से चल रहे काम भी पूरे करने होंगे। इनके बकाया भुगतान भी करने होंगे। यानी राज्य सरकार को पुराने और नए दोनों कामों के लिए पैसा जुटाना होगा। ऐसे में सरकार के लिए बजट संभालना और खर्च का सही हिसाब रखना बड़ी चुनौती होगी।
राज्य पर बढ़ी वित्तीय जिम्मेदारी
नई वीबी-जीरामजी योजना में केंद्र सरकार 60 फीसदी और राज्य सरकार 40 फीसदी खर्च उठाएगी। यानी अब मध्यप्रदेश सरकार को पहले से ज्यादा पैसा देना होगा।
इसके साथ ही मनरेगा के पुराने निर्माण कार्यों का बकाया भुगतान भी करना है। ऐसे में पुराने और नए कामों के लिए बजट का इंतजाम करना जरूरी होगा। यह इस बात पर भी निर्भर करेगा कि केंद्र से कितनी राशि मिलती है और राज्य के बजट में कितना पैसा रखा गया है।
हालांकि, उपलब्ध रिपोर्ट में ऐसा कोई सीधा सबूत नहीं मिला है कि राज्य सरकार के बढ़ते कर्ज के कारण निर्माण सामग्री का भुगतान अटका हुआ है।
केंद्र से राशि जारी होने की उम्मीद
वीबी-जीरामजी योजना से जुड़े अधिकारी मयंक अग्रवाल ने बताया कि मनरेगा का बकाया पैसा जारी कराने के लिए केंद्र सरकार से बातचीत चल रही है। उन्होंने उम्मीद जताई कि जल्द ही राशि मिल जाएगी। उनका कहना है कि विभाग के स्तर पर काम प्रभावित नहीं हुए हैं।
हालांकि, कुछ पंचायतों में निर्माण सामग्री की सप्लाई रुकने की जानकारी सामने आई है। इससे कितने काम प्रभावित हुए हैं, यह जिलों के भुगतान और काम की प्रगति के आंकड़े मिलने के बाद ही साफ होगा।
केंद्र सरकार से बकाया राशि मिलने पर पंचायतें सप्लायरों का भुगतान कर सकेंगी। इससे रुके हुए निर्माण कार्यों को आगे बढ़ाने में भी मदद मिलेगी।