एमपी में मिड-डे मील घोटाला! रसोइयों के नाम पर डकार गए हर महीने करोड़ों रुपए

Sanjay Dhiman | Jul 12, 2026, 16:42 IST
Photograph: (the sootr)
एमपी में मिड-डे मील योजना में बड़ा फर्जीवाड़ा सामने आया है। रसोइयों के नाम पर हर महीने करीब 20 करोड़ रुपए का घोटाला हो रहा है। सरकार ने जांच के आदेश दिए हैं।

पांच पाइंट में समझें मामला..

  • एमपी में मिड-डे मील में 74 हजार रसोइयों की जांच शुरू।
  • रसोइयों के नाम सही, बैंक खाते किसी और के निकले।
  • हर महीने 20 करोड़ के भुगतान पर सवाल उठे।
  • 20 जुलाई तक सभी रसोइयों का सत्यापन जरूरी।
  • फर्जी पंजीयन मिलने पर मानदेय पर लगेगी रोक।

मध्य प्रदेश के सरकारी स्कूलों से एक बेहद हैरान करने वाली खबर सामने आ रही है। यहां गरीब स्कूली बच्चों को मिलने वाले मिड-डे मील में बड़ा घोटाला हुआ है। प्रधानमंत्री पोषण शक्ति निर्माण योजना के तहत करोड़ों रुपए का फर्जीवाड़ा पकड़ा गया है। विभागीय समीक्षा के दौरान करीब 74 हजार रसोइयों के रिकॉर्ड में गड़बड़ी मिली है। इन सभी रसोइयों और सहायकों के रजिस्ट्रेशन और पेमेंट में भारी हेरफेर हुआ है।



नाम-पता असली पर बैंक खाते निकले नकली

जांच में यह बात सामने आई है कि रसोइयों के नाम बिल्कुल सही हैं। उनके घर के पते भी जांच के दौरान एकदम सही पाए गए हैं। लेकिन सबसे बड़ा खेल उनके बैंक खातों के साथ किया गया। रसोइयों के नाम पर दर्ज बैंक खाते किसी दूसरे अनजान व्यक्तियों के निकले। यानी काम कोई और कर रहा है और पैसा किसी और को मिला। इस तरीके से हर महीने करीब 20 करोड़ रुपए सीधे साफ किए गए। सरकार की नाक के नीचे यह पूरा सिंडिकेट काफी समय से सक्रिय था।



कलेक्टर और जिला पंचायत सीईओ को जांच का जिम्मा

इस बड़े खुलासे के बाद भोपाल से लेकर जिलों तक हड़कंप मच गया है। सरकार ने तुरंत एक्शन लेते हुए सभी जिला कलेक्टरों को कड़े निर्देश दिए हैं। इसके साथ ही जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारियों को जिम्मेदारी सौंपी गई है। शासन ने इस पूरे मामले की गहराई से जांच करने को कहा है। दोषियों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई करने के आदेश भी जारी हुए हैं।



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सभी रसोइयों का होगा कड़ा वेरिफिकेशन

सरकार ने सभी स्कूलों के प्रधानाध्यापकों को एक नया कड़ा पत्र भेजा है। आगामी 20 जुलाई 2026 तक सभी रसोइयों का भौतिक सत्यापन करना अनिवार्य है। इसके तहत सभी कर्मचारियों का ईकेवाईसी(ekyc) और समग्र आईडी वेरिफिकेशन कराया जाएगा। उनके बैंक खातों का मिलान भी उनके आधार कार्ड से किया जाएगा। सही जानकारी पोर्टल पर अपडेट होने के बाद ही मानदेय दिया जाएगा।



बिना वेरिफिकेशन नहीं मिलेगा मानदेय

शासन ने साफ कर दिया है कि वेरिफिकेशन के बिना अब मानदेय नहीं मिलेगा। यदि किसी स्कूल में निर्धारित संख्या से अधिक रसोइऐ पंजीकृत मिलेंगे, तो उनका भुगतान बिल्कुल नहीं किया जाएगा। उस अतिरिक्त मानदेय की पूरी जिम्मेदारी संबंधित क्रियान्वयन एजेंसी की खुद होगी। विकासखंड स्तर पर ब्लॉक रिसोर्स को-ऑर्डिनेटर (BRC) भी रिकॉर्ड खंगालेंगे। डुप्लीकेट या फर्जी पंजीयन मिलने पर तुरंत पुलिस एफआईआर दर्ज कराई जाएगी। पूरी व्यवस्था को पारदर्शी बनाने के लिए सरकार अब लगातार मॉनिटरिंग करेगी।



कर्मचारी संघ ने कहा- यह प्रशासनिक लापरवाही

इस पूरे मामले पर कर्मचारी संगठनों ने सरकार को घेरना शुरू कर दिया है। अस्थायी एवं आउटसोर्स कर्मचारी संघ के प्रांताध्यक्ष वासुदेव शर्मा ने बयान दिया है। उन्होंने कहा कि यह योजना पिछले 20 वर्षों से लगातार चल रही है। इसके बावजूद सरकार के पास रसोइयों का कोई सही रिकॉर्ड उपलब्ध नहीं है। यह सीधे तौर पर बड़ी प्रशासनिक लापरवाही और गहरे भ्रष्टाचार की तरफ इशारा करता है।



Education Portal 3.0 से जुड़ा पीएम पोषण पोर्टल

अब सरकार ने इस चोरी को रोकने के लिए पुख्ता इंतजाम किए हैं। Education Portal 3.0 (EP 3.0) की लॉगिन आईडी को मुख्य पोर्टल से जोड़ा गया है। अब स्कूल के प्रधानाध्यापक आधिकारिक यूजर नेम और पासवर्ड से लॉगिन करेंगे। इसके अलावा BRC अधिकारियों के लिए भी विशेष पंजीकृत लॉगिन आईडी अनिवार्य है। डिजिटल ट्रैकिंग के जरिए अब हर एक पैसे के भुगतान पर नजर रहेगी।



FAQ

  1. मध्य प्रदेश में मिड-डे मील योजना में कितने करोड़ का घोटाला हुआ है?
    मध्य प्रदेश में प्रधानमंत्री पोषण शक्ति निर्माण योजना के तहत हर महीने करीब 20 करोड़ रुपए के घोटाले की आशंका जताई गई है। जांच में 74 हजार से अधिक रसोइयों और सहायकों के खातों में गंभीर गड़बड़ियां और फर्जीवाड़ा मिला है।
  2. रसोइयों के मानदेय भुगतान में किस तरह की धोखाधड़ी पकड़ी गई है?
    जांच के दौरान रसोइयों के नाम और पते तो बिल्कुल सही पाए गए, लेकिन उनके पोर्टल पर दर्ज बैंक खाते किसी दूसरे व्यक्तियों के मिले। इस तरह असली कामगारों का पैसा गलत खातों में ट्रांसफर किया जा रहा था।
  3. सरकार ने इस मिड-डे मील घोटाले को रोकने के लिए क्या कदम उठाए हैं?
    सरकार ने 20 जुलाई 2026 तक सभी रसोइयों का ईकेवाईसी, समग्र आईडी और बैंक खाता सत्यापन अनिवार्य किया है। साथ ही पीएम पोषण पोर्टल को Education Portal 3.0 से जोड़कर पूरी प्रक्रिया को डिजिटल और पारदर्शी बना दिया है।

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