MP में अब दूध बेचने वालों के लिए भी लाइसेंस जरूरी : मिलावट रोकने के लिए बड़ा कदम
News in Short
- लाइसेंस अनिवार्य: एमपी में अब सभी निजी दूध उत्पादकों और विक्रेताओं को सरकारी लाइसेंस लेना जरूरी है।
- मिलावट पर लगाम: सरकार अब दूध ले जाने वाले बर्तनों और टैंकरों की सख्त निगरानी और जांच करेगी।
- उत्पादन का लक्ष्य: मुख्यमंत्री मोहन यादव ने प्रदेश का दूध उत्पादन 9% से बढ़ाकर 20% करने का लक्ष्य रखा।
- कामधेनु योजना: 25 गायों की यूनिट लगाने पर पशुपालकों को 10 लाख रुपए की बड़ी प्रोत्साहन राशि मिलेगी।
- FSSAI की सख्ती: केंद्र सरकार ने बिना रजिस्ट्रेशन दूध बेचने वालों पर सख्त कार्रवाई के कड़े निर्देश दिए।
News in Detail
BHOPAL. मध्यप्रदेश की मोहन यादव सरकार अब दूध की शुद्धता को लेकर 'एक्शन मोड' में आ गई है। प्रदेश में अब डेयरी सहकारी समितियों को छोड़कर बाकी सभी दूध उत्पादकों और विक्रेताओं को सरकारी लाइसेंस लेना अनिवार्य होगा। सरकार का मानना है कि इस कदम से न सिर्फ दूध की क्वालिटी सुधरेगी, बल्कि मिलावट करने वाले 'सफेदपोशों' पर भी लगाम लगेगी।
अब गली-मोहल्ले में दूध बेचने वाले हों या बड़े दूध उत्पादक, सबको अपना रजिस्ट्रेशन कराना ही होगा। इसके बिना कारोबार करना अब गैर-कानूनी माना जाएगा। प्रशासन ने साफ कर दिया है कि अब दूध ढोने वाली गाड़ियों और बर्तनों की भी बारीकी से जांच की जाएगी।
MP में 213 लाख टन दूध उत्पादन का रिकॉर्ड
आपको जानकर हैरानी होगी कि हमारा मध्यप्रदेश देश के टॉप दूध उत्पादक राज्यों में शामिल है। भारत के कुल दूध उत्पादन का लगभग 9 प्रतिशत हिस्सा अकेले एमपी से आता है। आंकड़ों की बात करें तो यहां सालाना करीब 213 लाख टन दूध पैदा होता है। मुख्यमंत्री का लक्ष्य इस आंकड़े को 9% से बढ़ाकर सीधे 20% तक ले जाने का है।
इसी विजन को पूरा करने के लिए सरकार ने नेशनल डेयरी डेवलपमेंट बोर्ड (NDDB) के साथ हाथ मिलाया है। प्रदेश में 'सांची' जैसे बड़े ब्रांड के साथ-साथ अब ग्रामीण इलाकों में 381 नई सहकारी समितियां भी काम कर रही हैं।
पशुपालकों के लिए खुशखबरी: 25 गायों पर 10 लाख की मदद
सरकार सिर्फ नियम ही नहीं बना रही, बल्कि किसानों की जेब भरने का भी इंतजाम कर रही है। डॉ. भीमराव अंबेडकर कामधेनु योजना के तहत अगर आप 25 गायों की एक यूनिट लगाते हैं, तो सरकार आपको 10 लाख रुपए तक की प्रोत्साहन राशि देगी। यह कदम इसलिए उठाया गया है ताकि लोग वैज्ञानिक तरीके से दूध का उत्पादन करें और प्रदेश की आर्थिक स्थिति मजबूत हो।
वर्तमान में मध्यप्रदेश में प्रति व्यक्ति दूध की उपलब्धता लगभग 700 ग्राम प्रतिदिन है, जो काफी अच्छी मानी जाती है। इसमें सबसे बड़ा योगदान भैंस के दूध का है, जो कुल उत्पादन का 48% है।
केंद्र सरकार और FSSAI की सख्त एडवाइजरी
सिर्फ राज्य ही नहीं, बल्कि दिल्ली से भी आदेश आ चुका है। भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण (FSSAI) ने साफ कहा है कि जो लोग बिना रजिस्ट्रेशन के दूध का बिजनेस कर रहे हैं, वे कानून तोड़ रहे हैं। अब हर महीने की 15 और 30 तारीख को सरकार को दूध की शुद्धता और लाइसेंस की रिपोर्ट भेजनी होगी।
कलेक्टरों को निर्देश दिए गए हैं कि वे अपने-अपने जिलों में विशेष अभियान चलाएं। जो दूध विक्रेता अब तक सिस्टम से बाहर थे, उन्हें अब दायरे में लाया जाएगा। परिवहन में इस्तेमाल होने वाले टैंकरों और स्टोरेज मशीनों की हाइजीन चेक की जाएगी।
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