MP के 2592 सरकारी स्कूल बनेंगे मिनी सांदीपनि, बच्चों को मिलेंगी स्मार्ट क्लास और कंप्यूटर लैब, पढ़ाई के लिए बनेंगे नौ हजार से ज्यादा नए कमरे
खास बात यह है कि स्कूलों की पूरी नई इमारत बनाने के बजाय मौजूदा भवनों को ही बेहतर किया जाएगा। इस योजना पर करीब 2367 करोड़ रुपए खर्च करने का प्रस्ताव है। हालांकि, प्रदेश में 3000 से ज्यादा जर्जर स्कूल इसके बाद भी सुधार का इंतजार करते रहेंगे।
स्कूलों की बदलेगी तस्वीर, हर स्कूल पर 91 लाख खर्च
लोक शिक्षण संचालनालय (DPI) ने प्रदेश के 2 हजार 592 सरकारी स्कूलों को मिनी सांदीपनि के रूप में विकसित करने का प्रस्ताव शासन को भेज दिया है। योजना पर करीब 2 हजार 367 करोड़ रुपए खर्च होंगे। इस हिसाब से हर एक स्कूल पर औसतन 91 लाख रुपए का बजट रहेगा। इन स्कूलों में पुराने भवनों की मरम्मत, नए क्लासरूम, बिजली, इंटरनेट और मॉडर्न पढ़ाई के लिए जरूरी सुविधाएं विकसित की जाएंगी।
बच्चों को क्या फायदा होगा?
मिनी सांदीपनि स्कूलों में बच्चों को केवल किताबों के सहारे नहीं पढ़ाया जाएगा। पढ़ाई को आसान और रोचक बनाने के लिए Smart Class, डिजिटल बोर्ड और कंप्यूटर लैब जैसी सुविधाएं विकसित की जाएंगी। शिक्षकों को डिजिटल डिवाइस का इस्तेमाल करना सिखाया जाएगा।
इसके साथ ही Activity-Based Learning की ट्रेनिंग दी जाएगी, ताकि बच्चे अलग-अलग गतिविधियों के जरिए विषयों को बेहतर तरीके से समझ सकें। इससे सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले बच्चों को आधुनिक तकनीक से सीखने के ज्यादा अवसर मिल सकेंगे।
दो चरणों में बदलेंगे स्कूल, 9 हजार से ज्यादा कमरे बनेंगे
इस योजना को दो चरणों में लागू करने की तैयारी है।
- पहला चरण: इसमें 82 हाई स्कूल और हायर सेकंडरी स्कूल शामिल किए गए हैं। इन स्कूलों को अपग्रेड करने के साथ करीब 350 नए कक्ष बनाए जाएंगे।
- दूसरा चरण: इसमें 25 सौ से ज्यादा स्कूलों को शामिल किया जाएगा। इन पर करीब 2 हजार 290 करोड़ रुपए खर्च करने का प्रस्ताव है। इस राशि से नौ हजार से अधिक नए कक्ष बनाए जाएंगे। इस तरह पुराने स्कूलों को बेहतर बनाने के साथ बच्चों के बैठने और पढ़ने के लिए अतिरिक्त जगह भी तैयार की जाएगी।
दक्षिण कोरिया के मॉडल पर पढ़ेंगे सरकारी स्कूलों के बच्चे
मिनी सांदीपनि स्कूलों में पढ़ाई का तरीका दक्षिण कोरिया के स्कूली मॉडल से प्रेरित होगा। मध्य प्रदेश सरकार ने साल 2019 में करीब 62 लाख रुपए खर्च कर लगभग 200 अधिकारियों और प्राचार्यों को दक्षिण कोरिया की स्कूली शिक्षा व्यवस्था देखने भेजा था।
उसी मॉडल के आधार पर प्रदेश में सांदीपनि स्कूल विकसित किए गए। अब इसी व्यवस्था को छोटे स्तर पर पुराने सरकारी स्कूलों में लागू करने की तैयारी है। इसके तहत शिक्षकों को डिजिटल डिवाइस और एक्टिविटीज के जरिए बच्चों को पढ़ाने का ट्रेनिंग दिया जाएगा।
किन सरकारी स्कूलों को मिलेगा योजना का फायदा
मिनी सांदीपनि योजना के लिए ऐसे स्कूलों को प्राथमिकता दी जाएगी। यहां औसतन 150 से ज्यादा छात्र पढ़ते हैं और बीच में पढ़ाई छोड़ने वाले बच्चों की दर कम है। इसके अलावा स्कूल के 2 से 3 किलोमीटर के दायरे में प्राथमिक शालाएं भी होनी चाहिए। मकसद इन स्कूलों को आसपास की प्राथमिक शालाओं से जोड़कर एक शिक्षा केंद्र के रूप में विकसित करना है, ताकि बच्चे आगे की पढ़ाई के लिए इनका लाभ उठा सकें।
नई बिल्डिंग की जगह पुराने स्कूलों को ही बनाएंगे आधुनिक
सरकार ने पूरी तरह नई इमारतें बनाने के बजाय मजबूत पुराने भवनों को अपग्रेड करने का रास्ता चुना है। प्रदेश में करीब डेढ़ हजार ऐसे स्कूल भवन हैं, जिनका ढांचा मजबूत है। इन्हें बेहतर सुविधाओं के साथ विकसित किया जा सकता है।
योजना के तहत भवनों की बड़ी मरम्मत, जरूरी ढांचागत बदलाव और बच्चों के अनुकूल सुविधाएं विकसित की जाएंगी। नई इमारतों पर ज्यादा खर्च और निर्माण में लगने वाले लंबे समय को देखते हुए यह मॉडल तैयार किया गया है।
3000 से ज्यादा जर्जर स्कूल फिर भी रह जाएंगे
एक ओर सरकार करीब 26 सौ स्कूलों को मॉडर्न बनाने की तैयारी कर रही है। वहीं प्रदेश में बड़ी संख्या में स्कूल भवन अब भी खराब हालत में हैं। विधानसभा में पेश आंकड़ों और UDISE (Unified District Information System for Education) रिपोर्ट के मुताबिक, मध्य प्रदेश में 5700 से ज्यादा स्कूल भवन जर्जर या बड़ी मरम्मत की जरूरत वाली श्रेणी में हैं।
हाई कोर्ट में हाल ही में प्रस्तुत कैग रिपोर्ट के हवाले से सामने आया था कि प्रदेश के 83 हजार से ज्यादा स्कूलों में करीब 5000 भवन जर्जर हैं। वहीं, 200 से अधिक स्कूल बिना पक्के भवन के संचालित हो रहे हैं। ऐसे में प्रस्तावित 2592 स्कूलों का कायाकल्प होने के बाद भी 3000 से ज्यादा खराब हालत वाले स्कूल शेष रहेंगे।
अगले एकेडमिक सेशन से शुरू हो सकती है योजना
योजना को फाइनेंसियल अप्रूवल मिलने के बाद अगले एकेडमिक सेशन से लागू करने की तैयारी है। पहले फेज में 6 से 8 महीने के दौरान स्कूल भवनों की मरम्मत और सुधार, बिजली-इंटरनेट की व्यवस्था तथा कंप्यूटर लैब तैयार करने का काम होगा। दूसरे फेज में शिक्षकों को ट्रेनिंग दिया जाएगा। इसके साथ स्मार्ट क्लास और एक्टिविटी-बेस्ड करिकुलम की सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएंगी।
शिक्षा मंत्री बोले- पुराने स्कूलों में बढ़ाएंगे आधुनिक सुविधाएं
स्कूल शिक्षा मंत्री उदय प्रताप सिंह के मुताबिक, सांदीपनि स्कूलों के बाद अब प्रदेश के पुराने सरकारी स्कूलों को अपग्रेड करने की योजना बनाई गई है। इसके तहत स्कूल भवनों में मॉडर्न रिसोर्सेज बढ़ाए जाएंगे और शिक्षकों को नई तकनीक से पढ़ाने का ट्रेनिंग दिया जाएगा।
योजना को मंजूरी मिलने और काम पूरा होने के बाद हजारों सरकारी स्कूली बच्चों को बेहतर क्लासरूम, तकनीक आधारित पढ़ाई और आधुनिक शैक्षणिक सुविधाओं का लाभ मिल सकेगा।
FAQs:
- मिनी सांदीपनि योजना का मुख्य उद्देश्य क्या है?
मिनी सांदीपनि योजना का मुख्य उद्देश्य मध्य प्रदेश के सरकारी स्कूलों को अपग्रेड करके उन्हें आधुनिक तकनीक और सुविधाओं से लैस करना है, ताकि विद्यार्थियों को बेहतर शिक्षा मिल सके। - इस योजना के तहत स्कूलों में किन सुविधाओं का विकास किया जाएगा?
इस योजना के तहत स्कूलों में स्मार्ट क्लास, डिजिटल बोर्ड, कंप्यूटर लैब, और गतिविधि आधारित अध्ययन प्रणाली जैसे आधुनिक सुविधाओं का विकास किया जाएगा। - प्रस्तावित सुधार से कितने स्कूलों को लाभ होगा?
प्रस्तावित सुधार से कुल 2592 सरकारी स्कूलों को लाभ होगा, लेकिन प्रदेश में अभी भी 3000 से ज्यादा जर्जर स्कूलों की स्थिति में सुधार का इंतजार रहेगा।