मंत्री गौतम टेटवाल पर सरकारी शिक्षक को जान से मारने का आरोप, ये है पूरा मामला
क्या आपने सुना है कि एक सरकारी स्कूल के मास्टर ने मध्य प्रदेश के एक बड़े मंत्री की नींद उड़ा दी हो? ये मामला वाकई में हैरान करने वाला है। क्योंकि अब ये स्कूल की फाइलों से निकलकर थाने और हाईकोर्ट तक पहुंच चुका है।
मामला राज्यमंत्री गौतम टेटवाल और शिक्षक सुभाष शर्मा का है। आरोप है कि मंत्री का जाति प्रमाण पत्र फर्जी है। जब शिक्षक ने इसे कोर्ट में चुनौती दी तो मंत्री ने शिक्षक को जान से मारने की धमकी दे डाली।
झूठे केस में फंसाने का भी आरोप
राज्य मंत्री गौतम टेटवाल पर एक शिक्षक ने झूठे केस में फंसाने का भी आरोप लगाया है। शिक्षक सुभाष शर्मा ने थाने में शिकायत दर्ज करवाई है। साथ ही सीएम (सीएम मोहन यादव), डीजीपी, कलेक्टर, सांसद को भी आवेदन भेजा है।
शिक्षक का कहना है कि 5 मार्च को वह अपने साथियों के साथ बाइक से जा रहे थे, तभी मंत्री टेटवाल गनर के साथ आए और धमकी दी।
मंत्री बोले मेरे पीछे क्यों पड़े हो?
आरोप है कि शिक्षक से मंत्री ने कहा कि तुम सुधरोगे नहीं! मान जाओ वरना मैं तुम्हारी जिंदगी बर्बाद कर दूंगा। तुम सारंगपुर में रह नहीं पाओगे। जान से मार डालूंगा या झूठे केस में फंसवा दूंगा।
मेरे पीछे क्यों पड़े हो? तुम ही तो जाति वाली शिकायत करवा रहे हो। शिक्षक ने दावा किया कि पूरा वाकया थाने के कैमरे में कैद हो गया है। इसके बाद भी पुलिस अब तक जांच नहीं कर रही है।
केस वापस लेने का दबाव
क्या है पूरा मामला?
सारंगपुर विधायक गौतम टेटवाल (राज्यमंत्री) का जाति प्रमाण पत्र विवाद इंदौर हाईकोर्ट में उठा था। मंत्री के वकील ने जज जयकुमार पिल्लई की बेंच के सामने हलफनामे के साथ नए दस्तावेज पेश किए थे। इस मामले में गुरुवार, 5 मार्च को सुनवाई होनी थी, लेकिन नहीं हुई।
जाति को लेकर चल रहा विवाद
इस मामले में कुछ उलझे हुए तथ्य सामने आए थे। याचिकाकर्ता का कहना था कि मंत्री के स्कूल के दस्तावेज में उनकी जाति जीनगर लिखी हुई है।
स्कूल के प्राचार्य ने एक और प्रमाण पत्र पेश किया था। इसमें उनकी जाति मोची बताई गई थी। इसके अलावा नगर पालिका के दाखिला रिकॉर्ड में भी उनके दादा की जाति मोची होने का दावा किया गया था।
फर्जी जाति प्रमाण पत्र के आधार पर लड़ा चुनाव
यह विवाद गुना के कोमलप्रसाद शाक्य के जरिए दायर की गई रिट याचिका से जुड़ा हुआ है। शाक्य का आरोप है कि विधायक टेटवाल ने फर्जी जाति प्रमाण पत्र के आधार पर चुनाव लड़ा है।
याचिकाकर्ता ने अपने आरोपों को सही साबित करने के लिए कई जरूरी दस्तावेज कोर्ट में पेश किए थे। जैसे कि पिता की सर्विस बुक, परिवार वंशावली और आरटीआई से प्राप्त स्कॉलर पंजी आदि।
रिकॉर्ड में विधायक की जाति जीनगर
याचिकाकर्ता का कहना था कि 2007 और 2013 में आरटीआई के जरिए रिकॉर्ड मिले हैं। इनमें विधायक की जाति जीनगर और वर्ग पिछड़ा लिखा है।
वहीं बचाव पक्ष ने 2011 का एक प्रमाण पत्र पेश किया था। इसमें जाति मोची लिखी हुई है। याचिकाकर्ता ने इस नए प्रमाण पत्र को संदिग्ध बताते हुए उसकी सत्यता पर सवाल उठाए थे।
ये खबरें भी पढ़िए...
क्या बीजेपी विधायक गौतम टेटवाल ने फर्जी दस्तावेजों से जीता चुनाव?
गौतम टेटवाल के फर्जी जाति प्रमाण पत्र का मामला, पहले भी उठे कई सवाल, किस नियम में होती है कार्रवाई?
एमपी न्यूज: भोपाल के पूर्व IAS को जान से मारने की धमकी, बिल्डर पर लगाया आरोप
मध्यप्रदेश न्यूज: झाड़-फूंक के बहाने बनाया हवस का शिकार, फोटो वायरल कर धर्म परिवर्तन की धमकी