शिक्षा मंत्री राव उदय प्रताप सिंह को नोटिस जारी, तिरंगे के अपमान का है आरोप

Aman Vaishnav | Mar 06, 2026, 15:35 IST
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मध्य प्रदेश के मंत्री राव उदय प्रताप सिंह की मुश्किलें अब बढ़ने वाली हैं। जबलपुर कोर्ट ने राष्ट्रीय ध्वज के अपमान के मामले में उन्हें नोटिस भेजा है। मंत्री पर तिरंगा यात्रा के दौरान ध्वज संहिता के उल्लंघन का आरोप है।

जबलपुर कोर्ट ने मध्य प्रदेश के परिवहन और स्कूल शिक्षा मंत्री राव उदय प्रताप सिंह के खिलाफ नोटिस जारी किया है। ये मामला तिरंगे ध्वज के अपमान से जुड़ा हुआ है। कोर्ट में शिकायत की गई थी कि मंत्री राव ने एक रैली के दौरान अपनी खुली जीप में तिरंगे को बोनट पर चिपकाया था।



वहीं राष्ट्रीय ध्वज जीप पर खड़े एक व्यक्ति के पैरों से टच हो रहा था। इसे अपत्तिजनक और तिरंगे का अपमान माना गया है। विशेष न्यायालय ने मंत्री राव को 7 अप्रैल 2026 को कोर्ट में पेश होने का आदेश दिया है।



मंत्री राव उदय प्रताप सिंह को नोटिस

न्यायधीश डी.पी. सूत्रकार की कोर्ट ने मंत्री राव उदय प्रताप सिंह को नोटिस जारी किया है। साथ ही उनसे यह पूछा है कि तिरंगे झंडे का अपमान करने के मामले में क्यों न एफआईआर दर्ज की जाए। यह मामला नरसिंहपुर जिले के गोटेगांव के कोशल द्वारा दायर शिकायत पर आधारित है। इसमें मंत्री पर आरोप लगाया गया कि 2024 में हुई तिरंगा यात्रा के दौरान राष्ट्रीय ध्वज का अपमान किया गया था।



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तिरंगा यात्रा में हुई ये हरकत

कौशल सिलावट नरसिंहपुर के निवासी हैं। उन्होंने मंत्री राव उदय प्रताप सिंह के खिलाफ परिवाद दायर किया है। उनका आरोप है कि 11 अगस्त 2024 को गाडरवारा (नरसिंहपुर) में तिरंगा यात्रा के हुई थी। इस दौरान मंत्री ने खुली जीप के बोनट पर बैठकर लोगों को संबोधित किया था।



इस दौरान राष्ट्रीय ध्वज इस तरह से जीप के बोनट पर रखा गया कि वह झुक रहा था। साथ ही मंत्री के पांव को छू रहा था। यह राष्ट्रीय गौरव का अपमान है। भारतीय राष्ट्रीय ध्वज को लेकर बने कानून का उल्लंघन भी है। इस कृत्य को लेकर तीन साल तक की सजा का प्रावधान है।



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मंत्री होने के कारण एफआईआर दर्ज नहीं

परिवादी ने कोर्ट को बताया कि उसने इस घटना की शिकायत गाडरवारा थाने में की थी। पुलिस ने मंत्री होने के कारण एफआईआर दर्ज नहीं की। इसके बाद पुलिस अधीक्षक नरसिंहपुर को कई बार लिखित शिकायतें भेजी गईं थी। इसके बाद भी कोई कार्रवाई नहीं की गई थी। जब शिकायत पंजीकृत डाक से गाडरवारा थाने के प्रभारी को भेजी गई, तो उन्होंने उसे लेने से मना कर दिया, जो उनके कानूनी कर्तव्यों के विपरीत है।



शिकायत के साथ पेश किए सबूत

परिवादी ने ललिता कुमारी बनाम उत्तर प्रदेश सरकार (2014) के सुप्रीम कोर्ट के फैसले का हवाला दिया था। इसमें यह साफ किया गया था कि संज्ञेय अपराध की सूचना मिलने पर पुलिस का काम है कि, वह तुरंत प्राथमिकी दर्ज करे। परिवादी ने अपनी शिकायत के साथ कई सबूत पेश किए हैं।



इनमें बयान, घटना की तस्वीरें, मीडिया क्लिप, रिपोर्ट और अलग-अलग अधिकारियों को भेजी गई शिकायतों की प्रतियां शामिल हैं। कोर्ट ने मामले को गंभीरता से लिया है। साथ ही विशेष न्यायालय ने मंत्री राव उदय प्रताप सिंह को नोटिस भेजने का आदेश दिया है।



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