एमपी के प्रभारी मंत्रियों का रिपोर्ट कार्ड, प्रदर्शन में कौन पिछड़ा, कौन निकला सबसे आगे?

Aman Vaishnav | Mar 12, 2026, 13:27 IST
mp ministers performance report district incharge news
मध्य प्रदेश के मंत्रियों के कामकाज की चौंकाने वाली रिपोर्ट सामने आई है। डेढ़ साल पहले जिलों का प्रभार देते वक्त किए गए वादे अधूरे दिखे हैं। कई दिग्गज मंत्रियों ने अपने जिलों में रात गुजारना तो दूर... दौरा तक नहीं किया।

सत्ता की कुर्सी मिलते ही जनता के बीच जाने का वादा अक्सर हवा हो जाता है। मध्य प्रदेश की मोहन सरकार में भी कुछ ऐसा ही देखने को मिला है। जिन मंत्रियों को जिलों का जिम्मा सौंपा गया था, वे वहां मेहमान बनकर भी नहीं पहुंचे।



क्या है पूरा मामला?

अगस्त 2024 में जब मोहन सरकार के मंत्रियों को जिलों का प्रभार सौंपा गया तो एक वादा किया गया था। मंत्री इन जिलों का दौरा करेंगे रात रुकेंगे साथ ही वहां स्थानीय स्तर पर बैठकें करेंगे।



अब डेढ़ साल बाद इसकी रिपोर्ट सामने आई है। एक प्रतिष्ठित अखबार में छपी खबर के अनुसार, कई मंत्री न तो जिले में गए और न ही बैठकें कीं। कुछ मंत्रियों ने तो 18 महीनों में अपने प्रभार वाले जिलों में दस बार भी कदम नहीं रखा है।



पार्टी इसे गंभीरता से ले सकती है।



कैलाश विजयवर्गीय धार में रात तक नहीं रुके

रिपोर्ट के मुताबिक, डिप्टी सीएम और वित्त मंत्री जगदीश देवड़ा ने जबलपुर जैसे बड़े जिले में सिर्फ दो रातें बिताईं। एक ही बैठक की। डिप्टी सीएम राजेंद्र शुक्ला ने शहडोल में भी सिर्फ दो रातें बिताईं और दो बैठकें कीं।



मंत्री कैलाश विजयवर्गीय धार में रात भर नहीं रुके और सतना में भी सिर्फ एक रात रहे। राकेश सिंह ने नर्मदापुरम में अब तक कोई बैठक नहीं की। प्रहलाद पटेल भिंड में सिर्फ दो रातें रहे।



गौतम टेटवाल सबसे आगे

मध्यप्रदेश के नेताओं के दौरे और बैठकों के स्कोर के आधार पर गौतम टेटवाल ने 75 स्कोर के साथ सबसे बेहतर प्रदर्शन किया है। इसमें उन्होंने 50 दौरे किए हैं। वहीं 21 बैठकें कीं और 4 रातें रुके हैं। इसके बाद लखन सिंह पटेल 56 स्कोर के साथ दूसरे स्थान पर हैं।



लखन सिंह ने 34 दौरे किए थे। इनमें 6 बैठकें और 16 रातें शामिल हैं। चैतन्य काश्यप 51 स्कोर के साथ तीसरे स्थान पर हैं। इन्होंने 37 दौरे किए थे। साथ ही 2 बैठकें की और 12 रातें रुके थे।



ये 10 प्रभारी मंत्री रहे सबसे ज्यादा एक्टिव



मंत्री का नामदौरे रात रुके बैठकस्कोर
गौतम टेटवाल5021475
लखन सिंह पटेल3461656
चैतन्य काश्यप3721251
प्रद्युम्न सिंह तोमर359549
गोविंद सिंह राजपूत2513745
तुलसीराम सिलावट20101141
राजेंद्र शुक्ल305540
राधा सिंह14131138
राकेश सिंह1813435
दिलीप जायसवाल1411833

सबसे Inactiveमंत्री की लिस्ट में पहले नंबर पर विश्वास सारंग का नाम आता है। उन्होंने सिर्फ सात दौरे किए थे और इन दौरों के दौरान कुल एक ही बैठक की थी। इसके अलावा वे केवल तीन रात ही रुके।



दूसरे नंबर पर मंत्री प्रतिमा बागरी हैं, जिन्होंने पांच दौरे किए। इस दौरान उन्होंने दो बैठकें कीं और चार रात रुकीं।



तीसरे नंबर पर मंत्री दिलीप अहिरवार का नाम है, जिन्होंने आठ दौरे किए। लेकिन, इस दौरान उन्होंने सिर्फ एक ही बैठक की।



ये 10 प्रभारी मंत्री सबसे ज्यादा Inactive



मंत्री का नामदौरेरात रुकेबैठकस्कोर
विश्वास सारंग73111
प्रतिमा बागरी54211
दिलीप अहिरवार84113
इंदर सिंह परमार56415
नरेंद्र शिवाजी पटेल94316
धर्मेंद्र सिंह लोधी75517
विजय शाह114318
एदल सिंह कंसाना115218
नागर सिंह चौहान113418
कृष्णा गौर131418

किस मंत्री के पास है कौनसे जिले का प्रभार?

mp ministers performance report district incharge news


बैठकें करने और रुकने से ये चार बड़े फायदे होते हैं

  1. कलेक्टर, एसपी, तहसीलदार वगैरह विधायकों और कार्यकर्ताओं की बात नहीं सुनते, तो प्रभारी मंत्री के जरिए ये बातें सीएम तक पहुंच जाती हैं और दबाव बनता है।
  2. रात रुकने से कार्यकर्ताओं और विधायकों से मुलाकात होती है। अनौपचारिक बातों का आदान-प्रदान होता है। इससे तीन चौथाई कार्यकर्ता संतुष्ट हो जाते हैं।
  3. जिले के काम प्रभारी मंत्री के जरिए हल हो जाते हैं। वहीं भोपाल के काम भी वहीं करवा देता है।
  4. पार्टी के कार्यकर्ताओं और अधिकारियों में एक दूसरे के साथ काम करने का भरोसा बढ़ता है।

ये खबरें भी पढ़िए...



ईरान-इजराइल युद्ध का असर एमपी पर, एक्शन मोड में सीएम मोहन यादव, कैबिनेट के साथ बुलाई एक और बैठक



विधानसभा में मंत्री का खुलासा-केंद्रीय अंशदान नहीं मिलने से मनरेगा में मजदूरी भुगतान में देरी



एमपी न्यूज: मंत्री गौतम टेटवाल मुश्किल में, इंदौर हाईकोर्ट में चल रही कानूनी लड़ाई !



अफसर कर रहे मंत्री कैलाश विजयवर्गीय के खिलाफ षड्यंत्र!



Tags:
  • एमपी न्यूज
  • कैलाश विजयवर्गीय
  • मोहन सरकार
  • डिप्टी सीएम राजेंद्र शुक्ला
  • प्रहलाद पटेल
  • वित्त मंत्री जगदीश देवड़ा