छत्तीसगढ़ के रास्ते पर एमपी के विधायक, छत्तीसगढ़ मॉडल पर वेतन और पेंशन बढ़ाने पर जोर
भोपाल. मध्य प्रदेश की राजनीति में इन दिनों विधायकों के वेतन को लेकर हलचल तेज है। प्रदेश के विधायक अब पड़ोसी राज्य छत्तीसगढ़ की तर्ज पर अपने वेतन और भत्तों में बढ़ोतरी की मांग कर रहे हैं।
मामला तब और गरमा गया जब हाल ही में पूर्व कांग्रेस विधायक भगवान सिंह यादव ने विधानसभा अध्यक्ष नरेंद्र सिंह तोमर से मुलाकात कर छत्तीसगढ़ के समान वेतनमान लागू करने की मांग दोहराई।
छत्तीसगढ़ बनाम मध्य प्रदेश
मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ के विधायकों की कमाई के बीच की खाई गहरी है। एक नवंबर दो हजार को मध्य प्रदेश से अलग होकर बने छत्तीसगढ़ में आज विधायकों को एमपी की तुलना में लगभग दोगुना वेतन मिल रहा है।
- सिटिंग विधायक: जहां छत्तीसगढ़ में एक विधायक को हर महीने 1 लाख 75 हजार मिलते हैं, वहीं मध्य प्रदेश में यह राशि महज 1 लाख 10 हजार है।
- पूर्व विधायक (पेंशन): पेंशन के मामले में तो अंतर और भी चौंकाने वाला है। छत्तीसगढ़ में पूर्व विधायकों को 98 हजार 300 मासिक पेंशन मिलती है, जबकि एमपी में यह आंकड़ा सिर्फ 35 हजार पर सिमटा हुआ है।
- अन्य सुविधाएं: छत्तीसगढ़ के विधायकों को सालाना 10 लाख रुपए तक का हवाई यात्रा पुनर्भुगतान मिलता है, और पूर्व विधायकों के लिए यह सीमा पांच लाख रुपए है। मध्य प्रदेश में वर्तमान में ऐसी कोई व्यवस्था नहीं है।
देशभर के राज्यों की तुलना में एमपी कहां खड़ा है?
अक्टूबर 2025 में गठित तीन सदस्यीय उच्च स्तरीय समिति ने देशभर के 11 राज्यों के वेतन ढांचे का अध्ययन किया। इस रिपोर्ट के अनुसार, मध्य प्रदेश के विधायकों का वेतन और पेंशन देश में सबसे कम श्रेणियों में आता है।
| राज्य | विधायक वेतन (मासिक) | पूर्व विधायक पेंशन |
| महाराष्ट्र | 3 लाख 10 हजार 400 | 50 हजार |
| तेलंगाना | 2 लाख 75 हजार | 50 हजार |
| उत्तरखंड | 2 लाख 64 हजार 300 | 40 हजार |
| हिमाचल प्रदेश | 2 लाख 10 हजार | 35 हजार |
| हरियाणा | 1 लाख 85 हजार | 50 हजार |
| छत्तीसगढ़ | 1 लाख 75 हजार | 98 हजार 300 |
| मध्य प्रदेश | 1 लाख 10 हजार | 35 हजार |
चार्ट से स्पष्ट है कि महाराष्ट्र और तेलंगाना जैसे राज्य अपने विधायकों को एमपी से तीन गुना ज्यादा भुगतान कर रहे हैं। वहीं बिहार और गुजरात जैसे राज्यों में पेंशन की व्यवस्था नहीं है, हालांकि गुजरात में इसके बदले विशेष भत्ते दिए जाते हैं।
अधर में लटका है फैसला
विधायकों के वेतन पर विचार करने के लिए बनी समिति में उपमुख्यमंत्री और वित्त मंत्री जगदीश देवड़ा, बीजेपी विधायक अजय विश्नोई और कांग्रेस विधायक सचिन सुभाषचंद्र यादव शामिल हैं। हालांकि समिति के भीतर सैलरी बढ़ाने पर तो आम सहमति बन गई है, लेकिन पेंशन को छत्तीसगढ़ के बराबर करने पर पेंच फंसा हुआ है।
भाजपा विधायक अजय विश्नोई का कहना है कि वेतन बढ़ाने की मांग जायज है क्योंकि छत्तीसगढ़ कभी मध्य प्रदेश का ही हिस्सा था, लेकिन पेंशन पर अभी सर्वसम्मति नहीं बन पाई है। समिति ने अपनी रिपोर्ट अभी सरकार को नहीं सौंपी है।
क्या होगा अगला कदम?
मध्य प्रदेश विधानसभा में कुल 230 सदस्य हैं, जबकि पूर्व विधायकों की संख्या 506 है (जिसमें 301 भाजपा और 205 कांग्रेस व अन्य दलों से हैं)। अगर छत्तीसगढ़ वाला फॉर्मूला लागू होता है, तो राजकोष पर पड़ेगा असर करोड़ों रुपए का अतिरिक्त बोझ पड़ेगा।
फिलहाल, शीतकालीन और बजट सत्र बीत जाने के बाद भी यह फाइल ठंडे बस्ते में है। जानकारों का मानना है कि जब तक मुख्यमंत्री या विधानसभा अध्यक्ष इस पर व्यक्तिगत रुचि नहीं लेते, तब तक माननीयों को छत्तीसगढ़ जैसी सुख-सुविधाओं के लिए और इंतजार करना पड़ सकता है।
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