मोहन कैबिनेट बैठक आज: ई-बस से जगदीशपुर पहुंचे सभी मंत्री, 9 विधेयकों पर लगेगी मुहर

Amresh Kushwaha | Jul 18, 2026, 08:02 IST
मोहन कैबिनेट
मध्य प्रदेश की जगदीशपुर कैबिनेट में आज, रविवार को 9 विधेयकों को मंजूरी मिलेगी। अब मल्टीस्टोरी यूनिवर्सिटी खोलना आसान होगा। कोचिंग, फायर एक्ट, यूसीसी और श्रम संहिता से जुड़े अहम बदलाव भी इसी बैठक में तय होंगे। सभी मंत्री एक साथ ई-बस से जगदीशपुर पहुंचे हैं।

समझें क्या है पूरा मामला...

  • मध्य प्रदेश कैबिनेट में आज 9 विधेयक आएंगे।
  • सीएम मोहन यादव ने सभी विधेयकों को मंजूरी दी है।
  • निजी यूनिवर्सिटी के लिए 25 एकड़ जमीन की शर्त हटेगी।
  • मल्टीस्टोरी बिल्डिंग में भी अब यूनिवर्सिटी खोली जा सकेगी।
  • कोचिंग, फायर सेफ्टी और यूसीसी से जुड़े बिल भी शामिल हैं।

मध्य प्रदेश की मोहन कैबिनेट आज यानी रविवार, 19 जुलाई को जगदीशपुर में बैठक करेगी। इस बैठक में 9 अहम विधेयक पेश होंगे। मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव ने सभी विधेयकों को पहले ही मंजूरी दे दी है। मानसून सत्र 20 जुलाई से शुरू हो रहा है। सभी विधेयक इसी सत्र में विधानसभा में रखे जाएंगे।



ई-बस से जगदीशपुर पहुंचे सभी मंत्री

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भोपाल के जगदीशपुर में हो रही कैबिनेट बैठक में मुख्यमंत्री और सभी मंत्री इलेक्ट्रिक बस से पहुंचे। बैठक से पहले सभी मंत्रियों को सुबह सीएम हाउस बुलाया गया था। इसके बाद मंत्री अपने सरकारी वाहन और सुरक्षा काफिले के वाहन सीएम हाउस में ही छोड़कर एक साथ ई-बस से जगदीशपुर के लिए रवाना हुए।



कैबिनेट बैठक में शामिल होने वाले वरिष्ठ आईएएस अधिकारियों के वाहन भी कुशाभाऊ ठाकरे परिसर में खड़े करवाए गए। इसके बाद अधिकारियों को भी ई-बस से बैठक स्थल तक ले जाया गया।



मुख्यमंत्री की इस पहल को ईंधन और सरकारी संसाधनों की बचत से जोड़कर देखा जा रहा है। इसके जरिए सरकार ने सादगी, मितव्ययिता और जनता के पैसे का सोच-समझकर इस्तेमाल करने का संदेश भी दिया है।



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जमीन की शर्त होगी खत्म

सबसे बड़ा बदलाव निजी यूनिवर्सिटी खोलने के नियमों में हो रहा है। अभी तक इसके लिए कम से कम 25 एकड़ जमीन जरूरी थी। नए विधेयक में यह शर्त हटाई जा रही है। अब सिर्फ पर्याप्त जमीन होना काफी होगा। इससे मल्टीस्टोरी प्राइवेट यूनिवर्सिटी भी खोली जा सकेंगी। कोई भी संस्था अब शहर के भीतर यूनिवर्सिटी खोल सकेगी। सीमा के पास भी यूनिवर्सिटी खोलने की छूट मिलेगी।



देश के कई बड़े शहरों में यह मॉडल पहले से चल रहा है। वहां दो से पांच एकड़ जमीन में भी यूनिवर्सिटी चल रही हैं। मध्य प्रदेश सरकार अब इसी मॉडल को अपनाना चाहती है। नई शिक्षा नीति के नए कोर्स शुरू करने में भी यह बदलाव मदद करेगा।



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उद्योगों के लिए नया सचिवालय

कैबिनेट में ईज ऑफ डूइंग बिजनेस एक्ट 2026 भी आएगा। इसका मतलब है व्यापार को आसान बनाने वाला कानून। इसके तहत एमपीआईडीसी (Madhya Pradesh Industrial Development Corporation) में एक नया सचिवालय बनेगा। एमपीआईडीसी का मतलब है मध्य प्रदेश इंडस्ट्रियल डेवलपमेंट कॉरपोरेशन।



इसे बिजनेस सचिवालय कहा जाएगा। नई इंडस्ट्री लगाने की सभी मंजूरियां अब यहीं से मिलेंगी। सभी सरकारी विभाग अपने अधिकारी इस सचिवालय में भेजेंगे। अगर कोई विभाग ऐसा नहीं करता है तो कार्रवाई होगी। उसके अधिकारी की पोस्टिंग सीधे यहीं कर दी जाएगी।



निवेशक अब खुद हलफनामा देकर इंडस्ट्री शुरू कर सकेंगे। इसी आधार पर एक मंजूरी पत्र जारी होगा, जिसे लेटर ऑफ एस्टेब्लिशमेंट कहते हैं। अलग से पॉलिसी सर्टिफिकेट लेने की जरूरत नहीं रहेगी। अभी यह पूरा काम करने में चार से पांच महीने लगते हैं।



कोचिंग पर अब सख्ती

मध्य प्रदेश निजी कोचिंग संस्थान विधेयक 2026 भी कैबिनेट में आएगा। इसका पूरा नाम रजिस्ट्रेशन एवं विनियमन विधेयक है। इसमें 16 साल से कम उम्र के बच्चों का एडमिशन बंद होगा। यानी अब 11वीं क्लास के बाद ही कोचिंग में प्रवेश मिलेगा। हर कोचिंग संस्थान का पंजीयन कराना अनिवार्य होगा।



कोचिंग संस्थान भावनात्मक विज्ञापन नहीं दे सकेंगे। झूठे दावे करने पर कानूनी कार्रवाई होगी। अगर कोई छात्र कोचिंग बीच में छोड़ता है तो फीस लौटानी होगी। यह रकम 10 दिन के भीतर वापस करनी होगी। फीस यथानुपात आधार पर लौटाई जाएगी। यानी जितने दिन पढ़ाई हुई, उतनी ही फीस ली जाएगी।



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ऊंची इमारतों में फायर एनओसी

मध्य प्रदेश अग्निशमन एवं आपातकालीन सेवा विधेयक 2026 भी बैठक में रखा जाएगा। इसके तहत 15 मीटर से ऊंची हर इमारत के लिए फायर एनओसी जरूरी होगा। एनओसी का मतलब है नो ऑब्जेक्शन सर्टिफिकेट। इसमें बहुमंजिला इमारतें शामिल हैं। 500 से ज्यादा छात्रों वाले स्कूल भी दायरे में आएंगे। मॉल और 15 बेड से बड़े अस्पताल भी शामिल होंगे। साथ ही 50 से ज्यादा कमरों वाले होटल भी इसमें आएंगे।



नियम न मानने पर भारी जुर्माना लगेगा। नगर निकाय प्रॉपर्टी टैक्स के साथ एक नया टैक्स भी जोड़ सकेंगे। इसे फायर सेफ्टी टैक्स कहा जाएगा। इससे शहरों में आग से जुड़े हादसे कम होने की उम्मीद है।



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यूसीसी और श्रम कानून भी शामिल

मानसून सत्र में समान नागरिक संहिता विधेयक 2026 भी पेश होगा। इसे यूसीसी यानी यूनिफॉर्म सिविल कोड (Uniform Civil Code) भी कहते हैं। इसमें शादी और तलाक के लिए एक जैसा कानून होगा। गोद लेने और संपत्ति के अधिकार पर भी नियम एक जैसे होंगे। यह कानून सभी धर्मों पर लागू होगा। लिव-इन में रहने वाले जोड़ों को पंजीयन कराना होगा। बेटे और बेटी को पैतृक संपत्ति में बराबर अधिकार मिलेगा। हालांकि जनजातीय समुदायों को इस कानून से छूट दी गई है।



श्रम संहिता 2026 में छह पुराने श्रम कानून खत्म होंगे। इनकी जगह एक नया एकीकृत कानून लागू होगा। यह केंद्र सरकार के श्रम कोड जैसा ही होगा। थिएटर और रेस्टोरेंट अब 24 घंटे खुल सकेंगे। इसके लिए तीन शिफ्ट में काम होगा। नई फैक्ट्री शुरू करने के नियम भी आसान होंगे। इंस्पेक्टर की जांच की शर्त हटाई जा रही है। नागरिक सुरक्षा संहिता में भी संशोधन होगा। इससे जांच प्रक्रिया पूरी तरह डिजिटल हो जाएगी।



विधानसभा में होगी बहस

इन विधेयकों पर मानसून सत्र में लंबी बहस हो सकती है। खासकर यूसीसी और कोचिंग विधेयक पर विपक्ष सवाल उठा सकता है। सरकार का कहना है कि ये कानून जनता के हित में हैं। छात्रों और निवेशकों को भी इससे फायदा मिलेगा। शिक्षा और उद्योग जगत के जानकार इन बदलावों को सकारात्मक बता रहे हैं। उनका मानना है कि इससे प्रदेश में निवेश बढ़ेगा। नई यूनिवर्सिटी भी ज्यादा संख्या में खुल सकेंगी।



बैठक में और क्या-क्या

रविवार की बैठक में कई और विधेयक भी शामिल होंगे। इनमें राजस्व संशोधन विधेयक और निवेश विधेयक भी हैं। निजी विश्वविद्यालय संशोधन विधेयक पर भी चर्चा होगी। आयुर्विज्ञान विश्वविद्यालय संशोधन विधेयक भी एजेंडे में है। इसके तहत जबलपुर की एक यूनिवर्सिटी को दो हिस्सों में बांटा जाएगा। धनवंतरि स्वास्थ्य विज्ञान विश्वविद्यालय संशोधन विधेयक भी रखा जाएगा। ईज ऑफ डूइंग बिजनेस विधेयक और श्रम संहिता विधेयक भी शामिल हैं। मंजूरी के बाद सभी विधेयक विधानसभा में पेश होंगे। यह पूरी प्रक्रिया मानसून सत्र के दौरान पूरी होगी।



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मानसून सत्र में आएंगे ये अहम बिल

मप्र पंचायत राज एवं ग्राम स्वराज (संशोधन) विधेयक, 2026

सरकार 2 जून को मंजूर किए गए अध्यादेश की जगह यह बिल लाएगी। अभी ग्रामीण इलाकों में जमीन या संपत्ति की खरीद-बिक्री की रजिस्ट्री पर 1 प्रतिशत जनपद उपकर लगता है। अब स्वामित्व योजना के तहत ग्रामीण आबादी के अधिकार पत्रों की रजिस्ट्री मुफ्त करने का फैसला लिया गया है। इसके लिए कानून में बदलाव किया जाएगा, ताकि सिर्फ इस योजना से जुड़ी रजिस्ट्री पर यह छूट मिल सके।



मप्र उपकर (संशोधन) विधेयक, 2026

यह बिल भी 2 जून को लागू अध्यादेश की जगह लाया जाएगा। सरकार विकास कार्यों और इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट के लिए उपकर के जरिए फंड जुटाती है। अब स्वामित्व योजना के तहत ग्रामीणों को मिलने वाले अधिकार पत्रों की रजिस्ट्री पर संपत्ति मूल्य के 0.5 प्रतिशत उपकर से छूट देने का प्रावधान किया जाएगा।



मप्र राजमार्ग (संशोधन) विधेयक, 2026

पीडब्ल्यूडी यह बिल लेकर आएगा। इसके जरिए प्रदेश के स्टेट हाईवे पर अवैध कट और अतिक्रमण रोकने के लिए नियम और सख्त किए जाएंगे। सरकार का मकसद सड़क सुरक्षा बढ़ाना और हाईवे पर होने वाली अव्यवस्था को रोकना है।



यह खबर क्यों जरूरी है

यह खबर आम जनता, छात्रों और निवेशकों तीनों से जुड़ी है। निजी यूनिवर्सिटी के नियम आसान होने से नए शिक्षण संस्थान खुल सकेंगे। इससे छात्रों को अपने शहर में ही बेहतर पढ़ाई का मौका मिलेगा। कोचिंग विधेयक बच्चों की उम्र और मानसिक सेहत का ध्यान रखता है। फीस वापसी का नियम छात्रों के आर्थिक हित की रक्षा करता है।



फायर एक्ट से इमारतों में सुरक्षा बढ़ेगी और हादसे कम होंगे। यूसीसी जैसे कानून सामाजिक और पारिवारिक जीवन को सीधे प्रभावित करते हैं। इसलिए हर वर्ग को इन विधेयकों की जानकारी होना जरूरी है। यह जानकारी संविधान सम्मत तरीके से दी गई है और तथ्यों पर आधारित है।





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