सांसद निधि खर्च में MP की नारी शक्ति आगे, सागर की लता वानखेड़े बनीं नंबर-1

Amresh Kushwaha | Sept 17, 2026, 10:06 IST
एमपी में सांसद निधि खर्च में महिला सांसद आगे
सांसद निधि खर्च के मामले में मध्य प्रदेश देश में 13वें नंबर पर है। महिला सांसदों ने पुरुष सांसदों से 9% ज्यादा राशि खर्च की है। सागर सांसद लता वानखेड़े टॉप पर हैं, जबकि मुरैना सांसद सबसे पीछे हैं।

समझें क्या है पूरा मामला...

  • सांसद निधि खर्च में मध्य प्रदेश देश में 13वें नंबर पर है।
  • प्रदेश के 40 सांसदों ने अब तक सिर्फ 40.4% राशि खर्च की है।
  • महिला सांसदों ने पुरुष सांसदों से 9% ज्यादा राशि खर्च की है।
  • सागर सांसद लता वानखेड़े ने 99.89% राशि खर्च कर टॉप किया है।
  • मुरैना सांसद शिवमंगल सिंह तोमर सबसे पीछे, सिर्फ 26.38% खर्च हुआ है।

मध्य प्रदेश के सांसद अपनी संसदीय निधि यानी एमपीलैड्स (Member of Parliament Local Area Development Scheme) खर्च करने में देश में पीछे चल रहे हैं। प्रदेश सांसद निधि खर्च के मामले में देशभर में 13वें नंबर पर है।



प्रदेश के 40 सांसदों को कुल 592.6 करोड़ रुपए की राशि मिली है। इसमें से अब तक सिर्फ 239.5 करोड़ रुपए ही खर्च हो पाए हैं। यह कुल राशि का महज 40.4% है। यह आंकड़े मौजूदा कार्यकाल के दौरान हुए कुल आवंटन और खर्च पर आधारित हैं।



महिला सांसद खर्च में आगे

इस पूरे आंकड़े में एक बड़ी बात सामने आई है। प्रदेश की महिला सांसदों ने पुरुष सांसदों से बेहतर प्रदर्शन किया है। प्रदेश के आठ महिला सांसदों ने औसतन करीब 74% राशि खर्च की है। वहीं 23 पुरुष सांसदों की औसत खर्च दर करीब 65% रही है।



यानी महिला सांसद पुरुष सांसदों से करीब नौ प्रतिशत अंक आगे हैं। केंद्रीय मंत्रियों और नए राज्यसभा सदस्यों को इस तुलना में शामिल नहीं किया गया है। मंत्रियों के पास अतिरिक्त जिम्मेदारियां होती हैं, इसलिए उनका अलग आकलन जरूरी माना गया। नए राज्यसभा सदस्यों का कार्यकाल अभी शुरू ही हुआ है।



टॉप पर लता वानखेड़े

प्रदेश में सबसे ज्यादा निधि खर्च करने वाली सांसद सागर से डॉ. लता वानखेड़े हैं। उन्होंने अपनी 14.70 करोड़ रुपए की राशि में से 14.68 करोड़ रुपए खर्च कर दिए हैं। यह करीब 99.89% राशि है, जो प्रदेश में सबसे ज्यादा है।



राजगढ़ सांसद रोडमल नागर दूसरे नंबर पर हैं, जिन्होंने 99.69% राशि खर्च की है। राज्यसभा सांसद सुमित्रा बाल्मीक ने 19.60 करोड़ में से 18.41 करोड़ रुपए यानी 93.92% खर्च किए हैं। भोपाल सांसद आलोक शर्मा चौथे नंबर पर हैं, जिन्होंने 86.08% राशि का उपयोग किया है।



तोमर सबसे पीछे

इसी सूची में सबसे नीचे मुरैना सांसद शिवमंगल सिंह तोमर हैं। उन्होंने अपनी 14.70 करोड़ रुपए की राशि में से अब तक सिर्फ 3.87 करोड़ रुपए खर्च किए हैं। यह सिर्फ 26.38% राशि है, जो प्रदेश में सबसे कम है।



मंदसौर सांसद सुधीर गुप्ता दूसरे सबसे कम खर्च करने वाले सांसद हैं। उन्होंने 14.89 करोड़ में से सिर्फ 4.20 करोड़ यानी 28.20% राशि खर्च की है। राज्यसभा सांसद अशोक सिंह ने 35.20% और बंशीलाल गुर्जर ने 41.48% राशि ही खर्च की है।



लोकसभा सांसदों का हाल

लोकसभा सांसदों के खर्च में भी बड़ा अंतर देखने को मिला है। इंदौर सांसद शंकर लालवानी का खर्च 83.22% रहा है। खंडवा सांसद ज्ञानेश्वर पाटिल ने 78.43% राशि खर्च की है। खरगोन सांसद गजेंद्र सिंह पटेल ने 14.70 करोड़ में से 11.12 करोड़ रुपए खर्च किए हैं।



देवास सांसद महेंद्र सिंह सोलंकी का खर्च 73.84% रहा है। उज्जैन सांसद अनिल फिरोजिया ने 68.05% राशि खर्च की है। ग्वालियर सांसद भारत सिंह कुशवाह ने सिर्फ 54.82% राशि का उपयोग किया है। नर्मदापुरम सांसद दर्शन सिंह चौधरी ने 14.70 करोड़ में से 6.96 करोड़ यानी 47.36% राशि ही खर्च की है।



राज्यसभा सांसदों का हाल

राज्यसभा सांसदों में विवेक तंखा सबसे आगे हैं। उनका कार्यकाल 2022 से 2028 तक है। उन्हें अब तक 22.05 करोड़ रुपए मिले हैं, जिसमें से 18.47 करोड़ रुपए खर्च हो चुके हैं। यह करीब 83.75% राशि है, जो प्रदेश के सभी राज्यसभा सदस्यों में सबसे ज्यादा है।



डॉ. कविता पाटीदार, जिनका कार्यकाल भी 2022 से 2028 तक है, ने 75.54% राशि खर्च की है। वहीं माया नरोलिया का कार्यकाल 2024 से 2030 तक है। उन्होंने 14.70 करोड़ में से 10.62 करोड़ यानी 72.31% राशि का उपयोग किया है। यह प्रदर्शन उनके साथ शपथ लेने वाले कई सांसदों से बेहतर है।



कितने टिकाऊ हैं काम

सांसद निधि से हुए कामों की गुणवत्ता को लेकर भी सरकार ने पड़ताल कराई है। देशभर में सांसद निधि से बने कामों का जमीनी सर्वे किया गया। सर्वे में शामिल सभी परिसंपत्तियां मौके पर मौजूद मिलीं। लेकिन इनमें से हर 20वां काम बेकार हालत में पाया गया।



सिर्फ 82% कामों की ही सही देखभाल हो रही थी। बाकी 18% काम बदहाली में मिले हैं। यह आंकड़ा बताता है कि निधि खर्च होने के बाद भी रखरखाव में कमी है।



स्वीकृति में भी देरी

काम को मंजूरी मिलने की प्रक्रिया में भी कुछ देरी सामने आई है। कुल 87% काम समय पर मंजूर हुए हैं। लेकिन हर आठवें काम को पूरा होने में देरी हुई है। यह आंकड़ा बताता है कि मंजूरी के बाद भी काम पूरा होने में वक्त लग रहा है। इससे निधि के सही और समय पर उपयोग पर सवाल उठते हैं। जमीनी स्तर पर काम पूरा करना अब भी एक चुनौती बना हुआ है।



यह खबर क्यों जरूरी है

यह खबर सीधे जनता के पैसे और विकास कार्यों से जुड़ी है। सांसद निधि जनता के टैक्स से बनती है और इसका सही उपयोग जरूरी है। संविधान जनप्रतिनिधियों को जनता के प्रति जवाबदेह बनाता है। यह आंकड़े बताते हैं कि कौन सांसद अपने क्षेत्र में कितना काम करा रहा है। महिला सांसदों का बेहतर प्रदर्शन एक सकारात्मक संकेत है।



वहीं कम खर्च वाले सांसदों के क्षेत्र में विकास कार्य धीमे होने की आशंका रहती है। यह खबर पारदर्शिता बढ़ाने और जनता को जागरूक करने के मकसद से तैयार की गई है। इसमें किसी सांसद या दल पर व्यक्तिगत टिप्पणी नहीं की गई है, सिर्फ आधिकारिक आंकड़े पेश किए गए हैं।



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