मुख्यमंत्री स्कूटी योजना: पैसा लेकर स्कूटी नहीं खरीदी तो लौटाने होंगे रुपए, माता-पिता भी फंसेंगे

Sourabh Bhatnagar | Sept 16, 2026, 11:32 IST
MP mukhyamantri scooty yojana paisa wapas
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मध्यप्रदेश में मुख्यमंत्री स्कूटी योजना के नए नियम लागू हो गए हैं। 12वीं में 70 प्रतिशत से ज्यादा अंक लाने वाले विद्यार्थियों को स्कूटी खरीदने के लिए सरकार पैसे देगी। वहीं पैसे लेकर वाहन नहीं खरीदा तो सरकार वसूली करेगी और पालक पर एफआईआर भी हो सकती है।

समझें क्या है पूरा मामला

  • मध्य प्रदेश में मुख्यमंत्री स्कूटी योजना के लिए नए निर्देश जारी हुए।
  • 12वीं बोर्ड परीक्षा में 70 प्रतिशत से ज्यादा अंक वाले विद्यार्थी पात्र हैं।
  • ई-स्कूटी के लिए 1.20 लाख रुपए और वाहन के लिए 90 हजार रुपए मिलेंगे।
  • पैसा मिलने के बाद वाहन नहीं खरीदा तो सरकार वसूली करेगी।
  • लापरवाही पर पालक और जिला शिक्षा अधिकारी पर भी कार्रवाई होगी।

क्या है पूरी योजना

मध्यप्रदेश सरकार ने अच्छे अंक लाने वाले विद्यार्थियों के लिए योजना शुरू की है। इसका नाम मुख्यमंत्री ई-स्कूटी और मोटराइज्ड वाहन योजना है।



इस योजना के तहत सरकारी स्कूलों में 12वीं बोर्ड में बेहतर प्रदर्शन करने वाले विद्यार्थियों को वाहन खरीदने के लिए आर्थिक मदद दी जाती है। एमपी शिक्षा विभाग ने योजना को लेकर नए निर्देश जारी किए हैं।



इन निर्देशों में बताया गया है कि विद्यार्थियों को राशि कैसे मिलेगी। साथ ही वाहन नहीं खरीदने पर पैसा वापस लेने का नियम भी बताया गया है।



70% वालों को मिलेगा फायदा

राज्य सरकार ने यह नियम शैक्षणिक सत्र 2025-26 से लागू किया है। इसके तहत सरकारी उच्चतर माध्यमिक स्कूलों से 12वीं पास करने वाले विद्यार्थी पात्र होंगे।



योजना का लाभ उन्हीं विद्यार्थियों को मिलेगा जिनके 70 प्रतिशत से ज्यादा अंक होंगे। ऐसे मेधावी विद्यार्थियों को स्कूटी खरीदने के लिए आर्थिक सहायता दी जाएगी।



शिक्षा विभाग के नए निर्देशों में योजना के नियम स्पष्ट किए गए हैं। इनमें विद्यार्थी और पालक दोनों की जिम्मेदारी तय की गई है।



कितनी मिलेगी राशि

नए निर्देशों में वाहन खरीदने के लिए राशि तय कर दी गई है। पात्र विद्यार्थी अपनी पसंद का इलेक्ट्रिक वाहन चुन सकेंगे।



ई-स्कूटी (e scooty yojana) खरीदने के लिए अधिकतम 1.20 लाख रुपए मिलेंगे। मोटराइज्ड वाहन के लिए अधिकतम 90 हजार रुपए दिए जाएंगे।



यह राशि केवल स्कूटी या तय वाहन खरीदने पर खर्च होगी। विद्यार्थी इस पैसे से कोई दूसरा वाहन नहीं खरीद सकेंगे। इससे योजना की राशि का गलत इस्तेमाल रुक सकेगा।



कैसे मिलेगा पैसा

वाहन की तय राशि सीधे विद्यार्थी के बैंक खाते में भेजी जाएगी। अगर विद्यार्थी का बैंक खाता नहीं है तो पैसा माता-पिता या अभिभावक के खाते में भेजा जाएगा।



रजिस्ट्रेशन, इंश्योरेंस और एसेसरीज का पैसा अलग से मिलेगा। यह राशि सीधे वाहन बेचने वाले डीलर के खाते में भेजी जाएगी। इससे कागजी प्रक्रिया में गड़बड़ी की संभावना कम होगी।



न खरीदी तो होगी वसूली

खाते में पैसा आने के बाद वाहन खरीदना जरूरी होगा। इस प्रक्रिया की निगरानी जिला शिक्षा अधिकारी करेंगे।



अगर विद्यार्थी तय समय में स्कूटी या वाहन नहीं खरीदता है तो कार्रवाई की जाएगी। ऐसे मामलों में विद्यार्थी और उसके पालक जिम्मेदार माने जाएंगे। संबंधित जिला शिक्षा अधिकारी की भी जवाबदेही तय होगी।



विभाग वाहन नहीं खरीदने पर राशि वापस वसूल करेगा। यह पैसा विद्यार्थी या उसके पालक से वसूला जा सकता है। गंभीर लापरवाही होने पर पालक के खिलाफ एफआईआर भी दर्ज हो सकती है।



एफआईआर नजदीकी पुलिस थाने में दर्ज कराई जा सकती है। इसलिए पात्र विद्यार्थियों को समय पर वाहन खरीदने के निर्देश दिए गए हैं।



तीन साल बेचना मना

योजना में अब एक और सख्त नियम जोड़ा गया है। इसके तहत खरीदा गया वाहन तीन साल तक बेचा नहीं जा सकेगा।



विद्यार्थी इस वाहन को किसी दूसरे व्यक्ति के नाम ट्रांसफर भी नहीं कर सकेगा। वाहन के रजिस्ट्रेशन के समय यह शर्त दर्ज की जाएगी।



वाहन पर तीन साल के लिए हाइपोथिकेशन दर्ज होगा। इससे वाहन को बीच में बेचना या ट्रांसफर करना मुश्किल होगा। सरकार का कहना है कि योजना का लाभ सही विद्यार्थी तक पहुंचना चाहिए।



निगरानी करेगी समिति

योजना की निगरानी के लिए जिला स्तर पर समिति बनाई जाएगी। इस समिति की अध्यक्षता जिला कलेक्टर करेंगे।



समिति में जिला परिवहन अधिकारी भी शामिल होंगे। जिला कोषालय अधिकारी और जिला शिक्षा अधिकारी भी इसके सदस्य रहेंगे।



यह समिति स्थानीय स्तर पर योजना की निगरानी करेगी। साथ ही राशि के सही इस्तेमाल पर नजर रखेगी। इससे योजना में गड़बड़ी और पैसे के दुरुपयोग को रोकने में मदद मिलेगी।



7500 को मिलेगा फायदा

इस साल योजना के आंकड़े भी सामने आए हैं। इस बार 7,500 से ज्यादा विद्यार्थियों को इसका लाभ मिलेगा।



मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव (mp scooty yojana cm mohan yadav) खुद विद्यार्थियों के खातों में राशि ट्रांसफर करेंगे। इसके लिए 19 सितंबर को भोपाल में राज्य स्तरीय कार्यक्रम होगा।



कार्यक्रम सुभाष उत्कृष्ट उच्चतर माध्यमिक स्कूल परिसर में आयोजित किया जाएगा। मुख्यमंत्री ऑनलाइन माध्यम से विद्यार्थियों को राशि भेजेंगे। इससे हजारों विद्यार्थी योजना का लाभ उठा सकेंगे।



अधिकारी की दो टूक

विदिशा के जिला शिक्षा अधिकारी एनके अहिरवार ने भी इस बारे में जानकारी दी। उन्होंने कहा कि योजना की राशि मिलने के बाद वाहन खरीदना जरूरी है।



अगर विद्यार्थी वाहन नहीं खरीदता है तो उससे राशि वापस वसूली जाएगी। जरूरत पड़ने पर पालक से भी पैसा वसूला जा सकता है।



अहिरवार ने बताया कि लापरवाही पर पुलिस थाने में एफआईआर दर्ज हो सकती है। उन्होंने कहा कि योजना का लाभ लेने वालों को सभी नियमों का पालन करना होगा।



जिम्मेदारी भी जरूरी

कुल मिलाकर मुख्यमंत्री स्कूटी योजना विद्यार्थियों के लिए बड़ी मदद है। इस योजना से उन्हें वाहन खरीदने के लिए राशि मिलेगी।



इसके साथ कुछ जिम्मेदारियां भी तय की गई हैं। पैसा मिलने के बाद तय समय में वाहन खरीदना जरूरी होगा।



जो विद्यार्थी और पालक नियमों का पालन करेंगे उन्हें परेशानी नहीं होगी। लापरवाही करने पर राशि की वसूली हो सकती है। गंभीर मामलों में कानूनी कार्रवाई भी की जा सकती है। इसलिए पात्र विद्यार्थियों को समय पर वाहन खरीद लेना चाहिए।



FAQ

  1. प्रश्न 1: मुख्यमंत्री स्कूटी योजना में कितना पैसा मिलता है?
    उत्तर: ई-स्कूटी के लिए अधिकतम 1.20 लाख रुपए दिए जाते हैं। मोटराइज्ड वाहन के लिए यह राशि 90 हजार रुपए तय है। यह पैसा विद्यार्थी के बैंक खाते में भेजा जाता है। रजिस्ट्रेशन, इंश्योरेंस और एसेसरीज का पैसा सीधे वाहन विक्रेता को दिया जाता है। खाता न होने पर राशि माता-पिता या अभिभावक के खाते में जाती है।
  2. प्रश्न 2: मुख्यमंत्री स्कूटी योजना में वाहन नहीं खरीदा तो क्या होगा?
    उत्तर: तय समय में वाहन नहीं खरीदने पर विभाग पैसा वापस वसूलेगा। यह वसूली विद्यार्थी के साथ पालक से भी की जा सकती है। इसके अलावा पालक के खिलाफ पुलिस थाने में एफआईआर भी दर्ज हो सकती है। संबंधित जिला शिक्षा अधिकारी के खिलाफ भी दंडात्मक कार्रवाई प्रस्तावित की जा सकती है। इसलिए तय समय में वाहन खरीदना जरूरी है।
  3. प्रश्न 3: मुख्यमंत्री स्कूटी योजना के तहत खरीदा वाहन कब बेचा जा सकता है?
    उत्तर: योजना के तहत खरीदे गए वाहन को तीन साल तक बेचा नहीं जा सकता। इसे किसी दूसरे व्यक्ति को ट्रांसफर करना भी मना है। वाहन के रजिस्ट्रेशन के समय ही तीन साल की हाइपोथिकेशन दर्ज होती है। तीन साल पूरे होने के बाद ही विद्यार्थी वाहन बेच सकता है। यह नियम योजना का दुरुपयोग रोकने के लिए बनाया गया है।

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