वृंदावन गांव कहां हैं ? 1 साल बाद कहां तक पहुंची मुख्यमंत्री वृंदावन ग्राम योजना? आत्मनिर्भर बन गए गांव ?
भगवान श्री कृष्ण के वृंदावन की तरह मध्यप्रदेश सरकार प्रदेश में वृंदावन गांव बसाना चाहती है। लेकिन अगर कोई किसी से पूछ ले कि वृंदावन गांव कहां है ? तो शायद सामने वाला सिर पकड़ कर बैठ जाए।
ऐसा इसलिए क्योंकि ऐसा कोई गांव मध्यप्रदेश में है ही नहीं। सरकार ने मुख्यमंत्री वृंदावन ग्राम योजना शुरु करने का ऐलान तो किया। लेकिन 1 साल बाद भी ये ऐलान सिर्फ घोषणाओं तक सिमट कर रह गया है।
वृंदावन ग्राम योजना क्या है ?
बता दें कि 1 जुलाई 2025 को आधिकारिक तौर पर इसकी शुरुआत हुई थी। वित्तीय वर्ष 2025-26 के लिए सरकार ने योजना के लिए 100 करोड़ का प्रावधान भी किया।
इस योजना का मुख्य उद्देश्य राज्य के गांवों को आत्मनिर्भर, स्वच्छ, आर्थिक रूप से मजबूत और सांस्कृतिक रूप से समृद्ध बनाना है।
सरकार का दावा है कि प्रदेश के सभी 313 विकासखंडों में से एक एक गांव का चयन किया जाएगा। इसके बाद इन गांवों में बुनियादी सुविधाएं विकसित की जाएंगी। योजना में गांव को शामिल करने के लिए कुछ शर्तें भी रखी गई हैं।
- गांव की आबादी कम से कम 2 हजार या उससे ज्यादा हो।
- गांव में कम से कम 500 से ज्यादा गौवंश हों।
- ऐसे गांवों को प्राथमिकता जो आपसी विवाद और झगड़ों से दूर हों।
योजना से गांव को क्या मिलता ?
जिन गांवों का चयन इस योजना में होगा, उन्हें विशेष फंड दिया जाता। इस फंड से कई तरह के काम गांव में करने के वादे थे। दावा था कि गांव को कई तरह की सुविधाएं मिलेंगी जिनमें ये सुविधाएं शामिल है।
- गौशाला, सामुदायिक भवन, आंगनबाड़ी, स्वास्थ्य केंद्र, पुस्तकालय
- सोलर स्ट्रीट लाइट, जलकुंड, बायोगैस प्लांट, हर घर जल
- ड्रिप इरिगेशन, चारागाह विकास, ग्रामीण उद्योग, आर्ट एंड क्राफ्ट सेंटर
- पर्यावरण और जल संरक्षण, रूफ वॉटर हार्वेस्टिंग,
- नंदन फलोद्यान, लघु उद्योग, पोषण वाटिका, दुग्ध कलेक्शन सेंटर
यानी सीधे शब्दों में सरकार ऐसे गांव बसाना चाहती है। जो भगवान कृष्ण के वृंदावन की तरह समृद्ध, हरा भरा और खुशहाल हो। लेकिन द सूत्र ने जब पड़ताल की तो हमें पता चला कि 1 साल बाद भी इस योजना की फाइल आगे ही नहीं बढ़ी है। जिन जिलों में फाइल आगे बढ़ी भी है तो वहां के लिए अभी तक फंड का जुगाड़ नहीं हो पाया है।
पड़ताल में क्या पता चला ?
द सूत्र को मिली जानकारी के मुताबिक जबलपुर, इंदौर, नीमच और पन्ना के कुल 14 गांवों का सिलेक्शन किया गया है। जबलपुर जिला पंचायत सीईओ अभिषेक गहलोत ने द सूत्र को बताया कि 6 महीने पहले जबलपुर से 4 गांवों को चुना गया।
उनकी कार्ययोजना बनाकर सरकार को भेजी जा चुकी है, लेकिन अभी तक सरकार की तरफ से कोई जवाब नहीं आया है। भोपाल जिला पंचायत सीईओ इला तिवारी से भी हमने बात की।
इला तिवारी ने बताया कि भोपाल से 2 गांवों का सिलेक्शन वृंदावन ग्राम योजना में हुआ है। लेकिन फंड नहीं दिया गया है। यानी भोपाल का हाल भी जबलपुर जैसा ही है।
लेटलतीफी की भेंट चढ़ी योजना !
सरकार की ये दीर्घकालिक योजना है। पहले 5 साल की विस्तृत कार्ययोजना यानी डीपीआर तैयार की जा रही है। इसके बाद टेंडर बुलाएं जाएंगे। फिर जाकर जमीन पर काम शुरु होगा।
वहीं जिस स्पीड से योजना का काम चल रहा है, 1 साल बीत जाने के बाद 313 विकासखंडों में गांव ही सिलेक्ट नहीं हो पाए हैं। ऐसे में क्या 5 साल बाद योजना वाकई पूरी तरह जमीन पर उतर सकेगी, ये बड़ा सवाल है।
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