एमपी के बड़े नगर निगम टैक्स वसूली में पिछड़े, सिर्फ उज्जैन रहा आगे, कलेक्शन में 166 करोड़ की कमी
मध्यप्रदेश के शहरी निकायों को आत्मनिर्भर बनाने के लिए जो प्रयास किए जा रहे हैं, उनके बीच ताजा आंकड़े कुछ अलग ही कहानी बयां कर रहे हैं। राज्य के पांच बड़े नगर निगमों (इंदौर, भोपाल, जबलपुर, ग्वालियर और उज्जैन) में से सिर्फ उज्जैन ने 2025-26 में अपने राजस्व संग्रह में बढ़ोतरी की है।
वहीं बाकी के शहरों में वसूली घट गई है। 25 मार्च तक के आंकड़ों के मुताबिक भोपाल निगम (भोपाल निगम टैक्स) की वसूली 586 करोड़ से घटकर 573 करोड़ रह गई है।
किसकी कितनी वसूली घटी
इसी तरह इंदौर की वसूली 861 करोड़ से घटकर 856 करोड़ हो गई है। जबलपुर की 241 करोड़ से घटकर 233 करोड़ और ग्वालियर की वसूली 179 करोड़ से घटकर 152 करोड़ पर आ गई है।
वहीं उज्जैन ने राजस्व संग्रह (राजस्व संग्रहण) में बढ़ोतरी की है उज्जैन की वसूली 57 करोड़ से बढ़कर 131 करोड़ हो गई है।
प्रॉपर्टी टैक्स में सुधार, पानी का टैक्स कम
प्रदेश के 16 नगर निगमों ने पिछले साल के मुकाबले केवल 93% वसूली की है। वहीं नगरपालिकाओं ने 95% और नगर परिषदों ने 5% ज्यादा वसूली (एमपी टैक्स वसूली) की है। प्रॉपर्टी टैक्स में थोड़ा सुधार हुआ है लेकिन पानी का टैक्स कम हुआ है।
भोपाल में प्रॉपर्टी टैक्स 293 करोड़ से घटकर 253 करोड़ रह गया है। सरकार ने जीआईएस टैगिंग, टैक्स बढ़ोतरी और सख्त समीक्षा जैसे उपाय किए हैं, लेकिन बड़े निगमों में इनका असर बहुत सीमित नजर आ रहा है।
निगम के टैक्स कलेक्शन में 166 करोड़ की कमी
नगरीय विभाग के मुताबिक प्रदेश के नगर निगमों का कुल टैक्स कलेक्शन करीब दो हजार 400 करोड़ से घटकर 2234 करोड़ रह गया है। नगरपालिकाओं की वसूली भी 453 करोड़ से घटकर 418 करोड़ हो गई है।
वहीं नगर परिषदों ने 277 करोड़ के मुकाबले 292 करोड़ वसूले हैं। अधिकारियों का कहना है कि आखिरी हफ्ते में आंकड़े सुधर सकते हैं। रीवा, देवास, कटनी, सतना, बुरहानपुर और मुरैना में भी वसूली बढ़ी है।
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