घोटाले पकड़े गए, लेकिन 4 साल बाद! कार्रवाई से ज्यादा सवालों में सरकारी सिस्टम
ऐसे समझें क्या है पूरा मामला...
- चार साल बाद कोरोना काल की खरीद पर कार्रवाई हुई।
- कई अधिकारियों की वेतनवृद्धियां और प्रमोशन रोके गए।
- एक कर्मचारी को अनिवार्य सेवानिवृत्ति दी गई।
- स्टॉप डेम और तालाब निर्माण में अनियमितताएं सामने आईं।
- देरी से हुई कार्रवाई ने प्रशासनिक सिस्टम पर सवाल उठाए।
नगरीय विकास विभाग ने कोरोना काल की खरीद, स्टॉप डेम निर्माण, तालाब सौंदर्यीकरण और जमीन से जुड़े मामलों में कई अधिकारियों-कर्मचारियों पर कार्रवाई की है। वेतनवृद्धियां रोकी गई हैं, प्रमोशन पर रोक लगी है और एक कर्मचारी को अनिवार्य सेवानिवृत्ति दी गई है।
सबसे बड़ा सवाल यह है कि यदि अनियमितताएं इतनी गंभीर थीं तो कार्रवाई होने में वर्षों का समय क्यों लग गया? जिस सरकारी तंत्र ने हमेशा अपनी व्यवस्था को चुस्त-दुरुस्त बताया, उसी तंत्र में करोड़ों रुपए के संभावित नुकसान और भ्रष्टाचार के आरोप इतने लंबे समय तक दबे कैसे रहे?
कार्रवाई से ज्यादा कटघरे में व्यवस्था
आयुक्त स्तर की जांच के बाद दोषी अधिकारियों पर कार्रवाई जरूर हुई है, लेकिन यह कार्रवाई सरकारी सिस्टम की कार्यप्रणाली पर भी सवाल खड़े कर रही है।
कोरोना काल में हुई खरीद से लेकर विकास कार्यों तक में गड़बड़ियां सामने आईं। यदि समय रहते निगरानी होती तो शासन को आर्थिक नुकसान और विवादों से बचाया जा सकता था।
विशेषज्ञों का मानना है कि वर्षों बाद होने वाली कार्रवाई भ्रष्टाचार पर नियंत्रण से ज्यादा प्रशासनिक निगरानी की विफलता को उजागर करती है।
कोरोना काल की खरीद में अनियमितता के आरोप...
- स्टॉप डेम निर्माण में गड़बड़ी उजागर।
- तालाब और सौंदर्यीकरण कार्यों में अनियमितताएं मिलीं।
- कई अधिकारियों की वेतनवृद्धियां रोकी गईं।
- कुछ अधिकारियों के प्रमोशन पर असर पड़ेगा।
- एक कर्मचारी को अनिवार्य सेवानिवृत्ति।
- सेवानिवृत्त अधिकारी की पेंशन में भी कटौती।
- कार्रवाई से ज्यादा जांच और निगरानी व्यवस्था पर सवाल।
नागौद: स्टॉप डेम निर्माण में गड़बड़ी
नगर परिषद नागौद में स्टॉप डेम निर्माण कार्य में अनियमितताएं पाए जाने के बाद तत्कालीन जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई की गई है। सीएमओ संजय पांडेय को एक वर्ष तक पदोन्नति के लिए अपात्र घोषित किया गया है।
जैतहरी: कोरोना खरीद पर फूटा भ्रष्टाचार का मामला
नगर परिषद जैतहरी में कोरोना लॉकडाउन के दौरान सामग्री खरीदी में अनियमितताओं की पुष्टि हुई। भंडार प्रभारी मोहित शर्मा, प्रभारी मुख्य लिपिक एवं लेखपाल रजनीश लहंगीर तथा स्वच्छता प्रभारी संजीव राठौर की चार-चार वेतनवृद्धियां रोकी गई हैं। वहीं, प्रभारी सीएमओ भूपेंद्र सिंह और राजस्व निरीक्षक अवधेश बीझी की दो-दो वेतनवृद्धियां रोकने की कार्रवाई की गई है।
जमीन और राजस्व मामलों में भी मिली गड़बड़ी
जैतहरी में शासकीय स्कूल की भूमि और उससे जुड़े राजस्व मामलों में भी गंभीर अनियमितताओं के आरोप सामने आए।
प्रभारी मुख्य नगर पालिका अधिकारी रहे राममिलन तिवारी सेवानिवृत्त हो चुके हैं, इसलिए उनकी देय पेंशन की 10 प्रतिशत राशि स्थायी रूप से रोकने का निर्णय लिया गया है।
पिपलौदा: नीलामी प्रक्रिया पर उठे सवाल
नगर परिषद पिपलौदा में नीलामी प्रक्रिया के दौरान गंभीर अनियमितताओं का मामला सामने आया। जांच के बाद प्रभारी मुख्य नगर पालिका अधिकारी अरुण पाठक की तीन वेतनवृद्धियां रोक दी गईं।
शहडोल: तालाब और मंदिर निर्माण कार्य जांच के घेरे में
नगर पालिका परिषद शहडोल में मोहनराम मंदिर तालाब सौंदर्यीकरण और मंदिर परिसर में कराए गए निर्माण कार्यों में गड़बड़ियां मिलीं।
उप यंत्री देवकुमार गुप्ता और तत्कालीन सहायक यंत्री बृजेंद्र प्रसाद शर्मा की तीन-तीन वार्षिक वेतनवृद्धियां रोकी गई हैं।
धार: तालाब निर्माण में भी अनियमितता
नगर पालिका परिषद धार में देवीसागर तालाब निर्माण कार्य की जांच में भी अनियमितताएं सामने आईं। उप यंत्री सुधीर ठाकुर की एक वेतनवृद्धि रोकी गई है। इसी तरह तालाब सौंदर्यीकरण कार्य में गड़बड़ी मिलने पर सहायक यंत्री देवेंद्र कोल की भी एक वेतनवृद्धि रोकने की कार्रवाई हुई है।
सबसे बड़ा सवाल अभी बाकी
सरकार और विभाग अब कार्रवाई का दावा कर रहे हैं, लेकिन जनता के मन में सबसे बड़ा सवाल यही है कि यदि गड़बड़ियां वास्तविक थीं तो उन्हें पकड़ने में चार साल से ज्यादा समय क्यों लग गया?
क्या भ्रष्टाचार देर से पकड़ा गया या फिर कार्रवाई भी तब हुई जब मामला दबाना मुश्किल हो गया? यही सवाल इस पूरी कार्रवाई को उपलब्धि से ज्यादा प्रशासनिक विफलता की कहानी बना रहे हैं।
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